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दरोगा की करतूत खंगालने में जुटी रेलवे विजिलेंस
Pratapgarh
Updated Wed, 17 Oct 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ के एक दरोगा द्वारा घूस लेने के मामले में अब विभागीय विजलेंस भी जांच में जुट गई है। सीबीआई द्वारा दरोगा को तीस हजार रुपये के साथ पकड़े जाने के बाद विजलेंस की टीम मौके पर पहुंची और दरोगा को लखनऊ ले जाए जाने के बाद यह लोग थाने पर रुककर छानबीन करने लगे।
ट्रेलर 5 अक्तूबर की सुबह पकड़ा गया था। चालक का चालान दूसरे दिन कर दिया गया लेकिन आरपीएफ ने गाड़ी का कागज और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की। ट्रेलर मालिक शफीक मोहम्मद को कुछ सूझ नहीं रहा था कि वह क्या करे। उधर जिसकी मशीन उसने गुवाहाटी पहुंचाने का जिम्मा ले रखा था वह भी किराया न देने की धमकी दे रहा था। शफीक आरपीएफ से गिड़गिड़ाता रहा। उसके ट्रेलर के सभी कागजात दुरुस्त थे लेकिन आरपीएफ का दरोगा रिपोर्ट भेजने के लिए पचास हजार रुपये मांग कर रहा था। शफीक ने आरपीएफ इंस्पेक्टर सहित विभाग के आला अधिकारियाें से भी गुहार लगाई लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। आरपीएफ के दरोगा उससे ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसे वह ही जज हाें और वही ट्रेलर छोडे़ंगे। काफी मिन्नत के बाद भी मांग कम नहीं हुई तो ट्रेलर मालिक ने सीबीआई की शरण ली। सीबीआई के जाने के बाद रेलवे विजलेंस के लोग आरपीएफ थाने पहुुंचे और ट्रेलर पकड़े जाने के बाद से अब तक की कार्रवाई की जानकारी की। देर रात तक लोग आरपीएफ थाने में डटे रहे। आरपीएफ इंस्पेक्टर एके धीमान ने बताया कि दरोगा को ट्रेलर के मामले में सीबीआई ले गई है। वह अभी कुछ नहीं बोल सकते।
स्थानीय रेलवे स्टेशन की आरपीएफ को एक बार फिर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। ट्रेेलर मालिक से पैसा लेने में दरोगा के फंसने से पहले भी आरपीएफ के कारनामाें ने पूरे विभाग को शर्मसार किया था। पूर्व इंस्पेक्टर अजय कुमार खुलेआम रेलवे का लोहा बेच रहे थे। दिन दहाड़े कट रहा गार्डर एडीजी रेलवे के आदेश पर जीआरपी ने बरामद किया तो आरपीएफ इंस्पेक्टर ने भी बरामदगी की औरपचारिकता पूरी कर दी। हालांकि वह जांच में बच नहीं सके। इंस्पेक्टर और एक सिपाही को इस मामले में निलंबित किया गया। हाल में ही ताला खजुरी स्टेशन से रेलवे लाइन की चोरी का मामला सामने आया लेकिन आरपीएफ इसे दबाने का प्रयास करती रही। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मामले को छिपाया जाता रहा। ताजा मामले ने तो दरोगा के साथ ही विभाग के अधिकारियाें की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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आरपीएफ की ड्यूटी बेल्हा में सिर्फ वसूली तक ही सिमटी है। आरक्षण काउंटर के दलालों से पैसा लेना, चोराें और बिना टिकट यात्रियों को पकड़कर छोड़ना, टेंपो और डग्गामार वाहनों को पकड़ने के बाद लंबी वसूली करना विभागीय कर्मियाें का मुख्य काम हो गया है। थाने के सामने से ही रेलवे लाइन पार करके लोडर प्लेटफार्म से माल ढोते हैं। जबकि गरीब और पैसा न देने वालाें को रेलवे लाइन पार करने पर जेल भेज दिया जाता है।
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ट्रेलर 5 अक्तूबर की सुबह पकड़ा गया था। चालक का चालान दूसरे दिन कर दिया गया लेकिन आरपीएफ ने गाड़ी का कागज और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की। ट्रेलर मालिक शफीक मोहम्मद को कुछ सूझ नहीं रहा था कि वह क्या करे। उधर जिसकी मशीन उसने गुवाहाटी पहुंचाने का जिम्मा ले रखा था वह भी किराया न देने की धमकी दे रहा था। शफीक आरपीएफ से गिड़गिड़ाता रहा। उसके ट्रेलर के सभी कागजात दुरुस्त थे लेकिन आरपीएफ का दरोगा रिपोर्ट भेजने के लिए पचास हजार रुपये मांग कर रहा था। शफीक ने आरपीएफ इंस्पेक्टर सहित विभाग के आला अधिकारियाें से भी गुहार लगाई लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। आरपीएफ के दरोगा उससे ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसे वह ही जज हाें और वही ट्रेलर छोडे़ंगे। काफी मिन्नत के बाद भी मांग कम नहीं हुई तो ट्रेलर मालिक ने सीबीआई की शरण ली। सीबीआई के जाने के बाद रेलवे विजलेंस के लोग आरपीएफ थाने पहुुंचे और ट्रेलर पकड़े जाने के बाद से अब तक की कार्रवाई की जानकारी की। देर रात तक लोग आरपीएफ थाने में डटे रहे। आरपीएफ इंस्पेक्टर एके धीमान ने बताया कि दरोगा को ट्रेलर के मामले में सीबीआई ले गई है। वह अभी कुछ नहीं बोल सकते।
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स्थानीय रेलवे स्टेशन की आरपीएफ को एक बार फिर शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। ट्रेेलर मालिक से पैसा लेने में दरोगा के फंसने से पहले भी आरपीएफ के कारनामाें ने पूरे विभाग को शर्मसार किया था। पूर्व इंस्पेक्टर अजय कुमार खुलेआम रेलवे का लोहा बेच रहे थे। दिन दहाड़े कट रहा गार्डर एडीजी रेलवे के आदेश पर जीआरपी ने बरामद किया तो आरपीएफ इंस्पेक्टर ने भी बरामदगी की औरपचारिकता पूरी कर दी। हालांकि वह जांच में बच नहीं सके। इंस्पेक्टर और एक सिपाही को इस मामले में निलंबित किया गया। हाल में ही ताला खजुरी स्टेशन से रेलवे लाइन की चोरी का मामला सामने आया लेकिन आरपीएफ इसे दबाने का प्रयास करती रही। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मामले को छिपाया जाता रहा। ताजा मामले ने तो दरोगा के साथ ही विभाग के अधिकारियाें की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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आरपीएफ की ड्यूटी बेल्हा में सिर्फ वसूली तक ही सिमटी है। आरक्षण काउंटर के दलालों से पैसा लेना, चोराें और बिना टिकट यात्रियों को पकड़कर छोड़ना, टेंपो और डग्गामार वाहनों को पकड़ने के बाद लंबी वसूली करना विभागीय कर्मियाें का मुख्य काम हो गया है। थाने के सामने से ही रेलवे लाइन पार करके लोडर प्लेटफार्म से माल ढोते हैं। जबकि गरीब और पैसा न देने वालाें को रेलवे लाइन पार करने पर जेल भेज दिया जाता है।