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देहात कोतवाली को नहीं मिली हरी झंडी

Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
Pratapgarh
Pratapgarh Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। नगर कोतवाली का बोझ कम करने के लिए देहात कोतवाली स्थापित करने का प्रस्ताव शासन ने रद कर दिया है। अब दिलीपपुर और देल्हूपुर में थाने बनाने के लिए नया प्रस्ताव मांगा गया है। इसके साथ ही दो नई पुलिस चौकियों का भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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नगर कोतवाली में अपराधों और अपराधियों की बाढ़ को देखते हुए शासन ने देहात कोतवाली की स्थापना का प्रस्ताव मांगा था। बसपा शासनकाल में तत्कालीन एसपी ने पृथ्वीगंज, चांदपुर और कटरामेदनीगंज का इलाका देहात कोतवाली में शामिल करते हुए यहां के अपराधिक हालात और मुकदमों की स्थिति सहित प्रस्ताव शासन को भेजा था। उस समय जनप्रतिनिधियों ने इसे स्वीकृत कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई या फिर उनकी चली नहीं। बसपा सरकार जाने के बाद देहात कोतवाली का प्रस्ताव शासन ने कैंसिल कर दिया।
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अब जिले की हालिया वारदातों व भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए दिलीपपुर और देल्हूपुर को थाना बनाने का प्रस्ताव शासन ने मांगा है। जिला पुलिस ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही रामपुर संग्रामगढ़ ब्लाक परिसर में पुलिस चौकी की स्थापना का प्रस्ताव मांगा गया है। इसके साथ ही जेठवारा थाना क्षेत्र के शमशेरगंज बाजार में भी पुलिस चौकी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। शासन से पत्र आने के बाद एसपी ने मातहताें को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का आदेश दिया है।
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मानधाता थानांतर्गत कुशफरा स्थित शनिदेव धाम पर बनी पुलिस चौकी को रिपोर्टिंग चौकी बनाने की कवायद की जा रही है। यहां अधिकारियों ने अपने स्तर से पुलिस चौकी बना रही थी। शासन ने इस बाबत प्रस्ताव मांगा है। इसी प्रकार नवाबगंज थाना क्षेत्र के अस्थान गांव में खुली पुलिस चौकी को भी रिपोर्टिंग चौकी का दर्जा दिए जाने की कवायद की जा रही है।
महेशगंज थाने से दूर स्थित कई गांव लालगंज कोतवाली में शामिल हो सकते हैं। शासन ने इस बाबत भी एसपी से प्रस्ताव मांगा है। महेशगंज थाना क्षेत्र में शामिल खंडवा गौडियाडीह, पूरेजनई, मादामई आदि इलाके के दर्जनाें गांवों में अपराधी सक्रिय रहते हैं। यह गांव थाने से दूर होने के कारण पुलिस कम ही पहुंचती है। ऐसे में इन्हें महेशगंज से हटाकर लालगंज कोतवाली में शामिल करने की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक किरण एस. का कहना है कि थाना या पुलिस चौकी की स्वीकृति देना शासन का काम है। इस बाबत पुलिस महानिदेशक भी कुछ नहीं करते। शासन का आदेश आने के बाद हम उसे अमल में लाते हैं। पहले के प्रस्तावों की जानकारी हमें नहीं है। शासन ने दो थाने, दो चौकियां स्थापित करने के बाबत प्रस्ताव मांगा है। दो पुलिस चौकियों को अपग्रेड करने का प्रस्ताव जा चुका है।
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