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रामभरोसे चल रहीं ट्रेनें, नहीं दूर होती खामियां

Sun, 10 Sep 2017 07:27 PM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 07:27 PM IST
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रामभरोसे चल रहीं ट्रेनें, नहीं दूर होती खामियां
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ से बनकर चलने वाली ट्रेनों की बोगियों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। दरअसल बेल्हा में वाशिग लाइन की व्यवस्था नहीं है। चार और पांच नंबर लाइन को ही वाशिंग लाइन बना दिया गया है। इस लाइन पर पानी भरा रहता है। ट्रेनों की सफाई के बाद ट्रैक पर मलबा पड़ा रहता है। ऐसे में ट्रेन के पहियों से लेकर नीचे के हिस्सों में आने वाली खामियों की बारे में जानकारी नहीं हो पाती है। न ही उसे दुरुस्त किया जाता है। रामभरोसे ट्रेनों को रवाना कर दिया जाता है। इससे हादसे का भय बना रहता है। निरीक्षण करने आए डीआरएम का भी ध्यान इस समस्या की ओर नहीं पड़ा।
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प्रतापगढ़ से आधा दर्जन ट्रेनें संचालित की जाती हैं। लौटने पर उन्हें प्लेटफार्म नम्बर तीन और उसके बगल के पांच नंबर लाइन पर खड़ा किया जाता है। चार और पांच नंबर पटरी पर ट्रेनों की धुलाई और सफाई की जाती है। दोनों पटरियों पर बड़ी-बड़ी घासें उगी हैं। जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण ट्रैक पर भी पानी जमा है। पटरियां धंसती जा रही हैं। प्लेटफार्म नंबर तीन के ट्रैक से गिट्टियां गायब हो गई हैं और मलबे से ट्रैक पटा हुआ है। ऐसे में प्रतापगढ़ से बनकर चलने वाली प्रतापगढ़-कानपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस, पद्मावत एक्सप्रेस, भोपाल एक्सप्रेस, उद्योगनगरी, प्रतापगढ़- लखनऊ लिंक, प्रतापगढ़-बनारस पैसेंजर समेत आधा दर्जन ट्रेनों की बोगियों की खामियों को रेलवे के कर्मचारी और अफसर दूर नहीं करवा पा रहे हैं। एक्सप्रेस ट्रेनों में भी केवल एसी कोच पर ही ध्यान दिया जा रहा है। वाशिंग लाइन न होने के कारण भी दिक्कत आ रही है। पटरी नंबर चार पर मलबा जमा है तो पांच नंबर पर पानी भरा है। इसके चलते कोई भी कर्मचारी नीचे फॉल्ट नहीं देख पाता है। बोगी के नीचे पहिया के पास खड़े होना भी मुश्किल है।
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लगातार दो दिन स्टेशन का निरीक्षण करने आए डीआरएम का भी ध्यान इस समस्या की ओर नहीं पड़ा। उन्होंने एक भी अफसर और कर्मचारियों से यह पूछना उचित नहीं समझा कि वाशिंग लाइन नहीं है तो ट्रेनों की बोगियों की मरम्मत कैसे होती है। इतना ही नहीं यहां दिनोंदिन कर्मचारियों की भी संख्या कम होती जा रही है। ट्रेनों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इससे अफसर से लेकर कर्मचारी तक परेशान हैं। वाशिंग लाइन बनने के लिए रेल मंत्रालय ने डेढ़ वर्ष पहले ही इजाजत दे दी थी। इसके लिए लाखों रुपये का बजट भी पास हो चुका है। पूर्व एडीएन अर्जुन प्रसाद अब और तब निर्माण कार्य शुरू होने का हवाला देते-देते रिटायर हो गए। नए एडीएन सचान आए तो सप्ताह भर तक तेजी दिखाने के बाद शांत बैठ गए। डीआरएम के निर्देश के बाद भी अब तक वाशिंग लाइन बनने के लिए कोई कवायद नहीं शुरू हुई। स्टेशन अधीक्षक, प्रतापगढ़ त्रिभुवन मिश्र का कहना है कि वाशिंग लाइन न होने से दिक्कतें आ रही हैं, यह सबको पता है। डीआरएम को इसके बारे में जानकारी भी दी गई है। ट्रेनों की बोगियों में किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो किसी भी हालात में उसे दुरुस्त करवाकर ही आगे के लिए रवाना किया जाता है।
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