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लगातार दो बार जीतने वाले नहीं लड़ सकेंगे चुनाव 17-39-24
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:35 AM IST
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लगातार दो बार जीतने वाले नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
सहकारिता चुनाव के नियमों के बाद आए नए आदेश
चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की उम्मीदों पर शासन ने फेरा पानी
121 रुपये जमा ले सकेंगे समिति की सदस्यता, 45 दिन पुराना सदस्य ही हो सकेगा मतदान में शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। आगामी माह जनवरी 2018 में प्रस्तावित सहकारिता चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दिग्गजों के लिए बुरी खबर है। अगर कोई व्यक्ति लगातार दो बार सहकारिता का चुनाव जीत चुका है तो वह इस बार मैदान में नहीं उतर सकेगा। नये नियम सामने आने के बाद कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सदस्यता के नियमों में भी बदलाव किया गया है। 121 रुपये के साथ फार्म भरकर समिति पर जमा कर कोई भी सदस्य बन सकता है। वही चुनाव के मैदान में उतरेगा। सहकारिता के चुनाव में हिस्सा लेने वालों की सदस्यता 45 दिन पुरानी होनी चाहिए।
प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद पार्टी सहकारिता विभाग में सपा के वर्चस्व को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। कई सालों से पदों पर आसीन लोगों को किनारे करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदाता बनाने के लिए नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। पहले 120 दिन पुराना समिति का सदस्य मतदान में हिस्सा ले सकता था। इस अवधि को घटाकर अब 45 दिन कर दिया गया है। अभी तक समिति से खरीदारी करने वाला या सहकारी बैंक का खाताधारक ही समिति का सदस्य माना जाता था लेकिन अब इस नियम में भी बदलाव किया गया है। अब समिति से फार्म लेकर उसे भरकर 121 रुपये के साथ जमा करने पर कोई भी समिति की सदस्यता ले सकता है। इसके अलावा अगर कोई भी व्यक्ति दो बार लगातार सहकारिता का चुनाव जीत चुका है तो वह अब चुनाव नहीं लड़ सकेगा। सूत्रों की मानें तो नियमों में बदलाव की मुख्य वजह सहकारी समितियों से सपा के वर्चस्व को खत्म करना है। ज्यादातर सहकारी समितियों में सपा से जुड़े लोगों का ही कब्जा है। कई सालों से जमे सदस्य भी इन्हीं पक्ष के हैं। ऐसे में सहकारिता चुनाव में इन्हें कोई भी चुनौती नहीं दे पाता है।
इनसेट-----
समिति के हित में है बदलाव
सहकारी चुनाव में बदलाव को लेकर समिति के हित में बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि इससे कोई भी सदस्य बन सकता है और वह चुनाव भी लड़ सकता है। अभी तक कुछ लोग ही अपना वर्चस्व कायम रखते थे। जो अब संभव नही है। अन्य चुनाव की तरह सहकारिता चुनाव भी सभी की भागीदारी से होगा।
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इनसेट----
बेल्हा में हैं 172 समितियां
जिले में कुल 172 साधन सहकारी समिति है। जिसके संचालन के लिए सहकारी संघ और क्रय विक्रय सहकारी समितियां भी हैं। जिनका संचालन सदस्यों की निगरानी में होता है।
इनसेट----
कुछ इस तरह होगा समिति का चुनाव
नए साल के पहले माह में प्रस्तावित सहकारिता चुनाव को लेकर अभी से ही तैयारी चल रही है। पहले साधन सहकारी समिति (किसान सेवा सहकारी समिति) के चुनाव होंगे। इसमें समिति के सदस्य मतदान कर निदेशक चुनेंगे। निदेशक फिर मतदान कर सभापति/ अध्यक्ष और उप सभापति/ उपाध्यक्ष चुनेंगे। इस तरह प्रबंध समिति का गठन होगा। सहकारिता चुनाव का बिगुल बजने के पहले ही राजनैतिक दलों के धुरंधर सक्रिय हो गए हैं।
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सहकारिता चुनाव के नियमों के बाद आए नए आदेश
चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की उम्मीदों पर शासन ने फेरा पानी
121 रुपये जमा ले सकेंगे समिति की सदस्यता, 45 दिन पुराना सदस्य ही हो सकेगा मतदान में शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। आगामी माह जनवरी 2018 में प्रस्तावित सहकारिता चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दिग्गजों के लिए बुरी खबर है। अगर कोई व्यक्ति लगातार दो बार सहकारिता का चुनाव जीत चुका है तो वह इस बार मैदान में नहीं उतर सकेगा। नये नियम सामने आने के बाद कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सदस्यता के नियमों में भी बदलाव किया गया है। 121 रुपये के साथ फार्म भरकर समिति पर जमा कर कोई भी सदस्य बन सकता है। वही चुनाव के मैदान में उतरेगा। सहकारिता के चुनाव में हिस्सा लेने वालों की सदस्यता 45 दिन पुरानी होनी चाहिए।
प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद पार्टी सहकारिता विभाग में सपा के वर्चस्व को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। कई सालों से पदों पर आसीन लोगों को किनारे करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदाता बनाने के लिए नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। पहले 120 दिन पुराना समिति का सदस्य मतदान में हिस्सा ले सकता था। इस अवधि को घटाकर अब 45 दिन कर दिया गया है। अभी तक समिति से खरीदारी करने वाला या सहकारी बैंक का खाताधारक ही समिति का सदस्य माना जाता था लेकिन अब इस नियम में भी बदलाव किया गया है। अब समिति से फार्म लेकर उसे भरकर 121 रुपये के साथ जमा करने पर कोई भी समिति की सदस्यता ले सकता है। इसके अलावा अगर कोई भी व्यक्ति दो बार लगातार सहकारिता का चुनाव जीत चुका है तो वह अब चुनाव नहीं लड़ सकेगा। सूत्रों की मानें तो नियमों में बदलाव की मुख्य वजह सहकारी समितियों से सपा के वर्चस्व को खत्म करना है। ज्यादातर सहकारी समितियों में सपा से जुड़े लोगों का ही कब्जा है। कई सालों से जमे सदस्य भी इन्हीं पक्ष के हैं। ऐसे में सहकारिता चुनाव में इन्हें कोई भी चुनौती नहीं दे पाता है।
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समिति के हित में है बदलाव
सहकारी चुनाव में बदलाव को लेकर समिति के हित में बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि इससे कोई भी सदस्य बन सकता है और वह चुनाव भी लड़ सकता है। अभी तक कुछ लोग ही अपना वर्चस्व कायम रखते थे। जो अब संभव नही है। अन्य चुनाव की तरह सहकारिता चुनाव भी सभी की भागीदारी से होगा।
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बेल्हा में हैं 172 समितियां
जिले में कुल 172 साधन सहकारी समिति है। जिसके संचालन के लिए सहकारी संघ और क्रय विक्रय सहकारी समितियां भी हैं। जिनका संचालन सदस्यों की निगरानी में होता है।
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कुछ इस तरह होगा समिति का चुनाव
नए साल के पहले माह में प्रस्तावित सहकारिता चुनाव को लेकर अभी से ही तैयारी चल रही है। पहले साधन सहकारी समिति (किसान सेवा सहकारी समिति) के चुनाव होंगे। इसमें समिति के सदस्य मतदान कर निदेशक चुनेंगे। निदेशक फिर मतदान कर सभापति/ अध्यक्ष और उप सभापति/ उपाध्यक्ष चुनेंगे। इस तरह प्रबंध समिति का गठन होगा। सहकारिता चुनाव का बिगुल बजने के पहले ही राजनैतिक दलों के धुरंधर सक्रिय हो गए हैं।