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जमीन विवाद के निस्तारण में लापरवाही बन रही बवाल-ए-जान

Tue, 29 Aug 2017 07:24 PM IST
Updated Tue, 29 Aug 2017 07:24 PM IST
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जमीन विवाद के निस्तारण में लापरवाही बन रही बवाल-ए-जान
प्रतापगढ़। जिला और तहसील प्रशासन की लापरवाही के चलते जिले में जमीन विवाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अफसरों के निर्देश के बाद भी कानूनगो और लेखपाल पैमाइश और पत्थर नसब कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसका नतीजा है कि आए दिन जमीन के विवाद में खून बह रहा है। जमीन के विवाद में राजस्व विभाग के कर्मचारी बगैर सुविधा शुल्क लिए कोई कदम नहीं उठाते हैं। जिससे भूमि विवादों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में जिले की पांचों तहसीलों में 19,419 राजस्व वाद लंबित हैं। मुख्य राजस्व अधिकारी राम सिंह वर्मा का कहना है कि जमीन विवाद का निपटारा तुरंत करना थोड़ा मुश्किल होता है। जो व्यक्ति शिकायत करता है, वह सिर्फ अपना पक्ष ही रखता है। जब तक दोनों पक्षों को न सुना जाय, तब तक वास्तविकता समझना मुश्किल होता है। फिलहाल जमीन विवाद में पुलिस और राजस्व टीम को मिलकर हल करने को कहा गया है।
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राजस्ववादों को निबटाने के लिए ही तहसील दिवस, थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया, मगर कोई भी अधिकारी मौके पर पहुंचकर न तो समाधान कराना चाहता है और न ही कोई एक्शन लेना चाहता है। सिर्फ आख्या का दौर ही चलता रहता है। जिसके कारण जिले में राजस्ववादों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा है। जिले में होने वाली आपराधिक घटनाओं में हर तीसरा मामला जमीन से जुड़ा होता है। भूमिधरी जमीन पर अवैध कब्जा, हिस्से के बंटवारे को लेकर विवाद कभी-कभी गंभीर रुप धारण कर लेते हैं। राजस्व विभाग के अफसरों को जमीन का विवाद देखते ही बुखार आ जाता है। तहसीलों में एसडीएम की लापरवाही से छोटे-छोटे मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। फिलहाल जिले के पांचों तहसीलों में अगस्त माह में 19,419 राजस्व के मामले लंबित हैं। इसमें सबसे अधिक सदर तहसील के मामले हैं। आलम यह है कि एसडीएम कोर्ट में बैठते ही नहीं है, वह फील्डवर्क से ही दबे रहते हैं। जिले के पांचों तहसीलों में राजस्व निरीक्षक के 60 पदों के सापेक्ष मात्र 22 तैनात हैं, लेखपालों के 587 पद स्वीकृत हैं, मगर जिले में 481 लेखपाल ही तैनात हैं। इस प्रकार 107 पद खाली पड़े हैं।
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मोहनगंज के ढेहरना निवासी बंकटेश बहादुर सिंह की मानें तो गाव के दबंगों ने पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। एसडीएम से लेकर डीएम तक फरियाद कर चुके हैं। मगर पीड़ित की मानें तो उनकी आवाज सुनने को कोई भी तैयार नहीं है। पुलिस दूसरे पक्ष से मिली हुई है। इधर किसी भी अधिकारी ने अवैध निर्माण पर रोक लगाने की पहल नहीं की है। राजस्व विभाग के अधिकारियों से नाप कराने की मांग की, मगर कोई अधिकारी तैयार नहीं हुआ।
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अंतू इलाके के धरौली गांव निवासी राजेश कुमार की मानें तो अपनी भूमिधरी में मकान का निर्माण करवा रहे थे, मगर गांव के दबंग जिनका पूरे गांव में आतंक है, 14 अगस्त को रात में जबरन निर्माणाधीन मकान को जमीदोंज कर दिया। राजस्व विभाग के अधिकारियों से गांव वालों के सामने मौके पर नाप करने की गुजारिश करता रहा, मगर कोई नहीं सुना। अब दबंग जमीन पर अवैध कब्जा करने के फिराक में हैं।

पट्टी के अशोकपुर निवासी राम केवल अपने खेत की पैमाइश कराने के लिए साल भर से चक्कर लगा रहे हैं। मगर जहां जाते हैं, लोग सुविधा शुल्क ही मांगते हैं। कोर्ट का आदेश भी हो चुका है, सीमांकन के लिए एक हजार रुपये भी जमा कर चुके हैं, मगर अभी तक पैमाइश के लिए तहसील और पुलिस का चक्कर लगा रहे हैं। शहर के सगरा निवासी विनोद कुमार द्विवेदी के खेत की पैमाइश करने के लिए एसडीएम कोर्ट से आदेश हुआ। ट्रेजरी में एक हजार रुपये जमा करने के छह माह बाद भी पैमाइश नहीं हुई है। आलम यह है कि पीड़ित पक्ष कहते-कहते थक गया। अब शांत होकर घर बैठा हुआ है।

खेतों की पैमाइश कराना आसान नहीं होता है। जब कोई किसान अपने खेत का सीमांकन कराना चाहता है, तो वह छह माह तक एसडीएम कोर्ट में भू-राजस्व संहिता की धारा 24 के तहत हकबरारी का दावा करता है। न्यायालय में छह माह तक प्रक्रिया चलने पर पैमाइश के लिए आदेश होता है। पीड़ित पक्ष से एक हजार रुपये ट्रेजरी में जमा कराए जाते हैं। इसके बाद भी कभी पुलिस नहीं, तो कभी राजस्व कर्मचारी के नहीं होने पर पैमाइश के लिए सालों लग जाते हैं। पैमाइश कराने के लिए लेखपाल और कानूनगो से कहते रहिए, मगर वह सीधे मुंह बात नहीं करते हैं वह रुपये की तलाश में आज और कल आने की बात कहते रहते हैं। मगर रुपये देखते ही प्यार की लब्ज बोलने लगते हैं।


नगर कोतवाली के पूरे मुस्तफा में जमीन के विवाद को लेकर खूनखराबा हो चुका है। रास्ते व जमीन के विवाद को लेकर लालता व इंद्रजीत पक्ष के लोगों के बीच मुकदमेबाजी चल रही थी। जबरन रास्ता बनाने का विरोध करते हुए पीड़ित पक्ष ने पुलिस व राजस्व विभाग से शिकायत की लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो सका। इसके कारण घटना ने दूसरा रूप ले लिया। लालता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कई अन्य लोग भी घायल हुए थे।नगर कोतवाली के अचलपुर में जमीन के विवाद को लेकर गत दिनों पूर्व दबंगों ने रियाज के घर जमकर फायरिंग की थी। जिससे मोहल्ले के लोग खौफजदा हो गए। बताया गया था दोनों पक्षों के बीच जमीन को लेकर काफी दिनों से तनातनी चल रही है और मुकदमा भी राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। मौके पर पहुंची पुलिस को तलाशी के दौरान आरोपी के घर से कई असलहे मिले थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए इद्दू को जेल भेज दिया। गांव में अभी भी जमीन के विवाद को लेकर चिंगारी सुलग रही है।

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