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एक साल की शहर की सरकार, काम कम, ठनी रही रार
Updated Mon, 10 Dec 2018 11:34 PM IST
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एक साल की शहर की सरकार, काम कम, ठनी रही रार
शहर जस का तस बदहाल, बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग परेशान
नगर पालिका में छह माह से ईओ नहीं, सफाई निरीक्षक न होने से सफाई व्यवस्था चरमराई
सभासद व सफाईकर्मी भर चुके हैं हुंकार, कार्यालय में तालाबंदी कर जता चुके हैं विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। 12 दिसंबर को शहर की सरकार एक साल की हो जाएगी। नए अध्यक्ष के कार्यकाल में अभी भी शहर में कुछ बदलाव नहीं हो सका है। स्थिति पहले जैसे ही है। सड़क, पानी, बिजली और जाम की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। सबसे खराब हालत सफाई की है। शहर कचरे से पटा पड़ा है। डोर टू डोर कूड़ा उठाने का अभियान बंद पड़ा है। शहर के सीमा विस्तार का मामला भी ठंडे बस्ते में है। ठंड की शुरुआत होने के बाद भी नगर पालिका सो रही है। अध्यक्ष के एक साल के कार्यकाल में काम कम और नगर पालिका में रार ज्यादा ठनी रही। मांगों को लेकर सभासद व सफाईकर्मियों को आंदोलन करना पड़ा।
नगर पालिका की नई अध्यक्ष प्रेमलता सिंह का शपथ ग्रहण समारोह 12 नवंबर को शहीद उद्यान में हुआ था। जिसमे नगर पालिका के सभी वार्डों में शहरियों की सुविधाओं को पूरा करने का संकल्प भी लिया गया। लेकिन लोगों की समस्याएं अभी भी बरकरार हैं। अध्यक्ष के एक साल के कार्यकाल में नगर पालिका में आपसी विवाद ज्यादा रहा। सफाईकर्मी भी वेतन, पेंशन, वर्दी समेत अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर नवरात्र में हड़ताल पर रहे। करनपुर के सभासद विनय सिंह भोला की अगुवाई में सभासदों ने अपने वार्डों की समस्याओं के निराकरण और बोर्ड की बैठक समयानुसार कराने समेत अन्य समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करते हुए कार्यालय में तालाबंदी कर दी। चेयरमैन और नगर पालिका के अफसरों के बीच तलवार खिंची रही। जिसका असर नगर पालिका के कामकाज पर भी पड़ा। करीब छह माह से ईओ विहीन नगर पालिका में सफाई निरीक्षक भी नहीं है। एडीएम को जहां ईओ का प्रभार सौंपा गया है। वहीं कर अधीक्षक को सफाई निरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार मिला है। पालिका में अफसरों की कमी के कारण मोहल्लों का निरीक्षण तक नहीं हो पाता। जिसके चलते सभासद बराबर साफ-सफाई के साथ ही प्रकाश व्यवस्था को लेकर शिकायत करते रहते हैं।
बेजान हैं शहर के चौराहे
किसी भी शहर की खूबसूरती में चौराहों की अहम भूमिका होती है। शहर में तमाम चौराहों के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च होते रहे हैं। मौजूदा समय में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व महापुरुषों की प्रतिमाओं के अलावा चौराहों को खूबसूरत बनाने के लिए कोई काम नहीं हो सका। एक साल के भीतर चौराहों को सजाने व संवारने की दिशा में कोई पहल तक नहीं हुई।
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स्वच्छता अभियान बेमानी, हर ओर गंदगी का अंबार
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत तीन सालों से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अब तो हर वार्डों में स्वच्छ प्रतिस्पर्धा के लिए वार्डों में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत संचालित डोर टू डोर कार्यक्रम बंद हो चुका है। जिससे शहर की सफाई व्यवस्था धड़ाम हो गई है। मोहल्लों की गलियां तो दूर प्रमुख मार्गो के किनारे कूड़ों का अंबार लगा रहता है। नालियां गंदगी से बजबजा रहीं हैं। सफाई के अधिकांश संसाधन बदहाल हो चुके हैं।
गलियों में अंधेरा, खराब पड़े हैं हाईमास्ट
शहर की प्रमुख सड़कों पर एलईडी, स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट जलाने के लिए पालिका की ओर से जनरेटर लगाया गया है। नगर पालिका के 25 वार्डों में भले ही पर्याप्त मात्रा में प्रकाश की व्यवस्था करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विवेकनगर, सदर बाजार, आजाद नगर, पूर्वी सहोदरपुर, पटखौली समेत अन्य वार्डों की गलियों में अंधेरा कायम रहता है। स्टेशन रोड पर लगा हाईमास्ट सालों से खराब पड़ा है।
पटखौली और बलीपुर में नहीं हो सकी पेयजल आपूर्ति
नगर पालिका के पटखौली और बलीपुर वार्ड में पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकी। बलीपुर की नई बस्ती में अभी तक पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी। यही हाल पटखौली वार्ड में भी देखने को मिलता है। सई नदी के तट पर स्थित बस्ती में आज भी अंधेरा है और वहां तक पानी के लिए पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी।
करोड़ों खर्च फिर भी नहीं बदली सड़कों की सूरत
नगर पालिका हर साल करोड़ों रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कराती है। इसके बावजूद शहर की सड़कों की सूरत नहीं बदली जा सकी। नया माल गोदाम रोड व सुमित्रापुरी रोड पर चलना जानलेवा बना हुआ है। इसके अलावा भी शहर की अन्य सड़कें बदहाल हैं।
जलनिकासी का नहीं हो सका प्रबंध
शहर की सबसे बड़ी समस्या जलनिकासी है। जो हर मोहल्लों में व्याप्त है। घरों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। जलनिकासी के लिए नाला व नालियां बनाई गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। आज भी बरसात में आधा शहर जलभराव की चपेट में आ जाता है। बिना बरसात भैरोपुर, पूर्वी सहोदरपुर, अचलपुर वार्ड में सड़कों पर गंदा पानी फैला रहता है।
पार्किंग का नहीं हो सका इंतजाम
शहर में वाहनों को पार्क करने की समस्या सालों से चली आ रही है। हर बार की तरह इस बार भी वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करने का दावा होता रहा लेकिन इस बार भी वाहन स्टैंड नहीं बन सका। सब्जी मंडी में जिस स्थान पर स्टैंड बनना था। उस पर कुछ लोगों का कब्जा है। जिसे खाली कराने का साहस पालिका प्रशासन नहीं जुटा सका।
अतिक्रमण से सिकुड़ती जा रहीं सड़कें
शहर की सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। पंजाबी मार्केट, फल मंडी, चौक से लेकर जीआईसी तक दिन भर जाम की समस्या देखने को मिलती है। अतिक्रमण के चलते सड़कें सिकुड़ती जा रहीं हैं। इससे दिन में शहर की सड़कों पर चलना किसी मुसीबत से कम नहीं होता।
बढ़ती जा रही आबादी, नहीं हो सका सीमा विस्तार
शहर व आसपास के गांवों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। करीब आठ साल से शहर का दायरा बढ़ाने की कवायद चल रही है। हर बार की तरह इस बार भी सीमा विस्तार की फाइल शासन को भेजी जा चुकी है लेकिन अभी तक सीमा विस्तार की दिशा में शासन की ओर से हरी झंडी नहीं मिल सकी। जबकि शहर से लेकर आसपास के गांवों में प्लाटिंग लगातार हो रही है। मकान भी बन रहे हैं। इन सबके बावजूद शहर का दायरा बढ़ाने में पालिका प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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एक साल की शहर की सरकार, काम कम, ठनी रही रार
शहर जस का तस बदहाल, बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग परेशान
नगर पालिका में छह माह से ईओ नहीं, सफाई निरीक्षक न होने से सफाई व्यवस्था चरमराई
सभासद व सफाईकर्मी भर चुके हैं हुंकार, कार्यालय में तालाबंदी कर जता चुके हैं विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। 12 दिसंबर को शहर की सरकार एक साल की हो जाएगी। नए अध्यक्ष के कार्यकाल में अभी भी शहर में कुछ बदलाव नहीं हो सका है। स्थिति पहले जैसे ही है। सड़क, पानी, बिजली और जाम की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। सबसे खराब हालत सफाई की है। शहर कचरे से पटा पड़ा है। डोर टू डोर कूड़ा उठाने का अभियान बंद पड़ा है। शहर के सीमा विस्तार का मामला भी ठंडे बस्ते में है। ठंड की शुरुआत होने के बाद भी नगर पालिका सो रही है। अध्यक्ष के एक साल के कार्यकाल में काम कम और नगर पालिका में रार ज्यादा ठनी रही। मांगों को लेकर सभासद व सफाईकर्मियों को आंदोलन करना पड़ा।
नगर पालिका की नई अध्यक्ष प्रेमलता सिंह का शपथ ग्रहण समारोह 12 नवंबर को शहीद उद्यान में हुआ था। जिसमे नगर पालिका के सभी वार्डों में शहरियों की सुविधाओं को पूरा करने का संकल्प भी लिया गया। लेकिन लोगों की समस्याएं अभी भी बरकरार हैं। अध्यक्ष के एक साल के कार्यकाल में नगर पालिका में आपसी विवाद ज्यादा रहा। सफाईकर्मी भी वेतन, पेंशन, वर्दी समेत अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर नवरात्र में हड़ताल पर रहे। करनपुर के सभासद विनय सिंह भोला की अगुवाई में सभासदों ने अपने वार्डों की समस्याओं के निराकरण और बोर्ड की बैठक समयानुसार कराने समेत अन्य समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करते हुए कार्यालय में तालाबंदी कर दी। चेयरमैन और नगर पालिका के अफसरों के बीच तलवार खिंची रही। जिसका असर नगर पालिका के कामकाज पर भी पड़ा। करीब छह माह से ईओ विहीन नगर पालिका में सफाई निरीक्षक भी नहीं है। एडीएम को जहां ईओ का प्रभार सौंपा गया है। वहीं कर अधीक्षक को सफाई निरीक्षक का अतिरिक्त प्रभार मिला है। पालिका में अफसरों की कमी के कारण मोहल्लों का निरीक्षण तक नहीं हो पाता। जिसके चलते सभासद बराबर साफ-सफाई के साथ ही प्रकाश व्यवस्था को लेकर शिकायत करते रहते हैं।
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बेजान हैं शहर के चौराहे
किसी भी शहर की खूबसूरती में चौराहों की अहम भूमिका होती है। शहर में तमाम चौराहों के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च होते रहे हैं। मौजूदा समय में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व महापुरुषों की प्रतिमाओं के अलावा चौराहों को खूबसूरत बनाने के लिए कोई काम नहीं हो सका। एक साल के भीतर चौराहों को सजाने व संवारने की दिशा में कोई पहल तक नहीं हुई।
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स्वच्छता अभियान बेमानी, हर ओर गंदगी का अंबार
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत तीन सालों से स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अब तो हर वार्डों में स्वच्छ प्रतिस्पर्धा के लिए वार्डों में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत संचालित डोर टू डोर कार्यक्रम बंद हो चुका है। जिससे शहर की सफाई व्यवस्था धड़ाम हो गई है। मोहल्लों की गलियां तो दूर प्रमुख मार्गो के किनारे कूड़ों का अंबार लगा रहता है। नालियां गंदगी से बजबजा रहीं हैं। सफाई के अधिकांश संसाधन बदहाल हो चुके हैं।
गलियों में अंधेरा, खराब पड़े हैं हाईमास्ट
शहर की प्रमुख सड़कों पर एलईडी, स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट जलाने के लिए पालिका की ओर से जनरेटर लगाया गया है। नगर पालिका के 25 वार्डों में भले ही पर्याप्त मात्रा में प्रकाश की व्यवस्था करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विवेकनगर, सदर बाजार, आजाद नगर, पूर्वी सहोदरपुर, पटखौली समेत अन्य वार्डों की गलियों में अंधेरा कायम रहता है। स्टेशन रोड पर लगा हाईमास्ट सालों से खराब पड़ा है।
पटखौली और बलीपुर में नहीं हो सकी पेयजल आपूर्ति
नगर पालिका के पटखौली और बलीपुर वार्ड में पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकी। बलीपुर की नई बस्ती में अभी तक पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी। यही हाल पटखौली वार्ड में भी देखने को मिलता है। सई नदी के तट पर स्थित बस्ती में आज भी अंधेरा है और वहां तक पानी के लिए पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी।
करोड़ों खर्च फिर भी नहीं बदली सड़कों की सूरत
नगर पालिका हर साल करोड़ों रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कराती है। इसके बावजूद शहर की सड़कों की सूरत नहीं बदली जा सकी। नया माल गोदाम रोड व सुमित्रापुरी रोड पर चलना जानलेवा बना हुआ है। इसके अलावा भी शहर की अन्य सड़कें बदहाल हैं।
जलनिकासी का नहीं हो सका प्रबंध
शहर की सबसे बड़ी समस्या जलनिकासी है। जो हर मोहल्लों में व्याप्त है। घरों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। जलनिकासी के लिए नाला व नालियां बनाई गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। आज भी बरसात में आधा शहर जलभराव की चपेट में आ जाता है। बिना बरसात भैरोपुर, पूर्वी सहोदरपुर, अचलपुर वार्ड में सड़कों पर गंदा पानी फैला रहता है।
पार्किंग का नहीं हो सका इंतजाम
शहर में वाहनों को पार्क करने की समस्या सालों से चली आ रही है। हर बार की तरह इस बार भी वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करने का दावा होता रहा लेकिन इस बार भी वाहन स्टैंड नहीं बन सका। सब्जी मंडी में जिस स्थान पर स्टैंड बनना था। उस पर कुछ लोगों का कब्जा है। जिसे खाली कराने का साहस पालिका प्रशासन नहीं जुटा सका।
अतिक्रमण से सिकुड़ती जा रहीं सड़कें
शहर की सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। पंजाबी मार्केट, फल मंडी, चौक से लेकर जीआईसी तक दिन भर जाम की समस्या देखने को मिलती है। अतिक्रमण के चलते सड़कें सिकुड़ती जा रहीं हैं। इससे दिन में शहर की सड़कों पर चलना किसी मुसीबत से कम नहीं होता।
बढ़ती जा रही आबादी, नहीं हो सका सीमा विस्तार
शहर व आसपास के गांवों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। करीब आठ साल से शहर का दायरा बढ़ाने की कवायद चल रही है। हर बार की तरह इस बार भी सीमा विस्तार की फाइल शासन को भेजी जा चुकी है लेकिन अभी तक सीमा विस्तार की दिशा में शासन की ओर से हरी झंडी नहीं मिल सकी। जबकि शहर से लेकर आसपास के गांवों में प्लाटिंग लगातार हो रही है। मकान भी बन रहे हैं। इन सबके बावजूद शहर का दायरा बढ़ाने में पालिका प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है।