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ऑपरेटर के अभाव में फुंक रहे नलकूप, सिंचाई के लिए किसान परेशान 17-20-13
Updated Sat, 06 Jan 2018 06:29 PM IST
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101 नलकूप हैं खराब, 138 के संचालन के लिए महज 41 ऑपरेटर की हुई है तैनाती
ऑपरेटर के अभाव में फुंक रहे नलकूप, सिंचाई के लिए किसान परेशान
101 नलकूप हैं खराब, 138 के संचालन के लिए महज 41 ऑपरेटरों की हुई है तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। किसानों की सुविधा के लिए लगाए गए नलकूप ऑपरेटर के अभाव में मोटर जल जा रहे हैं। दरअसल 265 राजकीय नलकूप के संचालन के लिए महज 41 ऑपरेटर की तैनाती है। इनमें से 111 नलकूप खराब हो चुके हैं। एक ऑपरेटर को तीन से चार नलकूप की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऐसे में ऑपरेटर नलकूप की चाभी स्थानीय लोगों को देकर पखवारे भर में एक बार नलकूप की देखरेख करने के लिए जाते हैं। हाई और लो वोल्टेज के चलते नलकूप की मोटर जल जाती है।
बेल्हा के किसानों को सिंचाई में दिक्कतें न हो। इसके चलते शासन की ओर से 265 राजकीय नलकूप लगवाया गया था। जबकि महज 41 ऑपरेटरों की तैनाती हुई है। इसी में से एक कार्यवाहक है, तो एक प्रवेक्षक पद पर तैनात हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानी जाए तो ऑपरेटर की संख्या कम होने के चलते वे समय-समय से ट्यूवेल पर नहीं पहुंच पाते हैं। विभाग की ओर से उनपर तीन से चार नलकूपों की जिम्मेदारी थोप दी गई है। ऐसे में ऑपरेटर नलकूप कक्ष की चाभी गांव के किसी एक किसान को दे देते हैं। बिजली आते ही किसान नलकूप पर पहुंच जाते हैं। खुद ही ऑपरेटर बन जाते हैं। लो और हाई बोल्टेज से उनको कोई लेना देना नहीं होता है। खुदा न खास्ता फ्यूज उड़ जाता है तो मोटे तार का फ्यूज बना कर जोड़कर ट्यूवेल चला देते हैं। जिसके चलते मोटर जल जाता है। जिससे किसान परेशान होते हैं। जले मोटर को बनवाने के लिए बार बार वे विभाग के अफसरों से शिकायत करते हैं तो जिम्मेदार उसे बनवाने के लिए इलाहाबाद भेजते हैं। ऐसे में मरम्मत होकर आने में करीब दो से तीन माह का समय लग जाता है। जिससे किसानों को नलकूप का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। विभाग के आकड़े को सत्य माना जाए तो 265 राजकीय नलकूप में से 101 नलकूप पानी की जगह बालू निगल रहे थे। देख रेख के अभाव में मोटर भी जल गया। हाल ही में दस नलकूपों में कुछ खामिया आ र्गइं। जिसकी मरम्मत करवाई जा रही है।
इनसेट-----------
खराब और फेल होने वाले ज्यादातर नलकूप सदर, मानधाता, पट्टी और रानीगंज तहसील क्षेत्र के हैं। इनमें राजगढ़, मानधाता, जेठवारा, सतैसा, संसारपुर, रखहा क्षेत्र के नलकूप हैं। नलकूप खराब होने की शिकायत लेकर किसान बारबार विभागीय अफसरों के पास पहुंच रहे हैं। ऑपरेटर जांच करने के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिसस किसान गेहूं की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
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इनसेट---------
मिनी वर्कशाप होता तो किसानों की खत्म हो जाती परेशानी
बेल्हा में यदि जले हुए राजकीय नलकूप मोटर बनवाने के लिए मिनी वर्कशाप की व्यवस्था होती तो किसानों को इतना परेशान न होना पड़ता। सूचना के बाद यदि ऑपरेटर मोटर को बनवाने के लिए लेकर आते तो शायद दो से तीन दिन के अंदर फिर बनवा कर उसे नलकूप में सेट कर चालू करवा देते । बेल्हा में एक समय वर्कशाप की व्यवस्था थी मगर अब खत्म कर दिया गया है। प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कौशाम्बी और जौनपुर जनपद के जले हुए राजकीय नलकूपों की मरम्मत के लिए इलाहाबाद में स्थित वर्कशाप में लाया जाता है। जहां बनने में समय लग जाता है। इससे अफसर और कर्मचारी भी किसानों के साथ परेशान रहते हैं।
वर्जन-------
ऑपरेटर की कमी के चलते मोटरे जल रही है। नलकूपों में खराबी आ रही है। हलांकि चार-चार नलकूपों की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर को दिया गया है। समय-समय पर वे ट्यूवेल की देख रेख करने के लिए जाते भी हैं। खराबी आने के बाद मोटर को बनवाने के लिए इलाहाबाद भेजा जाता है। वहां से बनकर आने में समय लग जाता है।
विनोद पांडेय, सहायक अभियंता।
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ऑपरेटर के अभाव में फुंक रहे नलकूप, सिंचाई के लिए किसान परेशान
101 नलकूप हैं खराब, 138 के संचालन के लिए महज 41 ऑपरेटरों की हुई है तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। किसानों की सुविधा के लिए लगाए गए नलकूप ऑपरेटर के अभाव में मोटर जल जा रहे हैं। दरअसल 265 राजकीय नलकूप के संचालन के लिए महज 41 ऑपरेटर की तैनाती है। इनमें से 111 नलकूप खराब हो चुके हैं। एक ऑपरेटर को तीन से चार नलकूप की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऐसे में ऑपरेटर नलकूप की चाभी स्थानीय लोगों को देकर पखवारे भर में एक बार नलकूप की देखरेख करने के लिए जाते हैं। हाई और लो वोल्टेज के चलते नलकूप की मोटर जल जाती है।
बेल्हा के किसानों को सिंचाई में दिक्कतें न हो। इसके चलते शासन की ओर से 265 राजकीय नलकूप लगवाया गया था। जबकि महज 41 ऑपरेटरों की तैनाती हुई है। इसी में से एक कार्यवाहक है, तो एक प्रवेक्षक पद पर तैनात हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानी जाए तो ऑपरेटर की संख्या कम होने के चलते वे समय-समय से ट्यूवेल पर नहीं पहुंच पाते हैं। विभाग की ओर से उनपर तीन से चार नलकूपों की जिम्मेदारी थोप दी गई है। ऐसे में ऑपरेटर नलकूप कक्ष की चाभी गांव के किसी एक किसान को दे देते हैं। बिजली आते ही किसान नलकूप पर पहुंच जाते हैं। खुद ही ऑपरेटर बन जाते हैं। लो और हाई बोल्टेज से उनको कोई लेना देना नहीं होता है। खुदा न खास्ता फ्यूज उड़ जाता है तो मोटे तार का फ्यूज बना कर जोड़कर ट्यूवेल चला देते हैं। जिसके चलते मोटर जल जाता है। जिससे किसान परेशान होते हैं। जले मोटर को बनवाने के लिए बार बार वे विभाग के अफसरों से शिकायत करते हैं तो जिम्मेदार उसे बनवाने के लिए इलाहाबाद भेजते हैं। ऐसे में मरम्मत होकर आने में करीब दो से तीन माह का समय लग जाता है। जिससे किसानों को नलकूप का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। विभाग के आकड़े को सत्य माना जाए तो 265 राजकीय नलकूप में से 101 नलकूप पानी की जगह बालू निगल रहे थे। देख रेख के अभाव में मोटर भी जल गया। हाल ही में दस नलकूपों में कुछ खामिया आ र्गइं। जिसकी मरम्मत करवाई जा रही है।
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खराब और फेल होने वाले ज्यादातर नलकूप सदर, मानधाता, पट्टी और रानीगंज तहसील क्षेत्र के हैं। इनमें राजगढ़, मानधाता, जेठवारा, सतैसा, संसारपुर, रखहा क्षेत्र के नलकूप हैं। नलकूप खराब होने की शिकायत लेकर किसान बारबार विभागीय अफसरों के पास पहुंच रहे हैं। ऑपरेटर जांच करने के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिसस किसान गेहूं की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
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मिनी वर्कशाप होता तो किसानों की खत्म हो जाती परेशानी
बेल्हा में यदि जले हुए राजकीय नलकूप मोटर बनवाने के लिए मिनी वर्कशाप की व्यवस्था होती तो किसानों को इतना परेशान न होना पड़ता। सूचना के बाद यदि ऑपरेटर मोटर को बनवाने के लिए लेकर आते तो शायद दो से तीन दिन के अंदर फिर बनवा कर उसे नलकूप में सेट कर चालू करवा देते । बेल्हा में एक समय वर्कशाप की व्यवस्था थी मगर अब खत्म कर दिया गया है। प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कौशाम्बी और जौनपुर जनपद के जले हुए राजकीय नलकूपों की मरम्मत के लिए इलाहाबाद में स्थित वर्कशाप में लाया जाता है। जहां बनने में समय लग जाता है। इससे अफसर और कर्मचारी भी किसानों के साथ परेशान रहते हैं।
वर्जन-------
ऑपरेटर की कमी के चलते मोटरे जल रही है। नलकूपों में खराबी आ रही है। हलांकि चार-चार नलकूपों की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर को दिया गया है। समय-समय पर वे ट्यूवेल की देख रेख करने के लिए जाते भी हैं। खराबी आने के बाद मोटर को बनवाने के लिए इलाहाबाद भेजा जाता है। वहां से बनकर आने में समय लग जाता है।
विनोद पांडेय, सहायक अभियंता।