{"_id":"5e94bdbc8ebc3e76b5637d47","slug":"61-thousand-vehicles-stopped-pollution-became-normal-pratapgarh-news-ald2732812171","type":"story","status":"publish","title_hn":"61 हजार वाहनों के पहिये थमे, ध्वनि और वायु प्रदूषण से शहर को मिली निजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
61 हजार वाहनों के पहिये थमे, ध्वनि और वायु प्रदूषण से शहर को मिली निजात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉकडाउन के बाद जिले में 61 हजार वाहनों के पहिये थम चुके हैं। जिससे ध्वनि और वायु प्रदूषण में कमी आई है। शहर की हवा काफी हद तक ठीक हो गई है। सड़कों से अब धूल भी नहीं उठ रही।
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है। इस दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी है। जिसके चलते वाहन भी जहां के तहां खड़े हैं। उपसंभागीय विभाग में छोटे व बड़े कुल मिलाकर 61,500 वाहन पंजीकृत हैं। लॉकडाउन के बाद ये वाहन जहां के तहां खड़े हो गए हैं।
कुछ वाहन ही सड़कों पर दिख रहे हैं। दिन हो या रात हाइवे से लेकर दूसरी सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। वाहनों के न चलने के कारण प्रदूषण में काफी कमी आई है। जिसका असर शहर से लेकर ग्रामीण अंचल में साफ दिख रहा है। वाहनों के प्रेशर हार्न के साथ धुआं भी गायब है। ध्वनि के साथ ही वायु प्रदूषण कम हो गया है। सड़कों पर उड़ती हुई धूल भी कहीं नजर नहीं आती। जबकि पहले वाहनों के आवागमन के दौरान वाहनों की धूल से सड़क के किनारे का व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो जाता था। दुकानदार धूल साफ करते हुए परेशान रहते थे। ऐसे समय में सड़कों पर धूल भी नहीं उड़ रही है। हवा चल रही है लेकिन उसमे धूल के कण नाम मात्र के देखने को मिलते हैं।
विज्ञापन
कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बाद वाहनों के खड़े होने से डीजल व पेट्रोल की बिक्री में खासी कमी आई है। बलीपुर स्थित पेट्रोलपंप संचालक देवव्रत मिश्रा ने बताया कि पहले प्रतिदिन 10 हजार लीटर के करीब डीजल व पेट्रोल की बिक्री हो जाया करती थी। मौजूदा समय में सात सौ लीटर भी नहीं हो पा रही है। हाइवे के पेट्रोलपंपों पर भले ही कुछ अधिक डीजल बिक जाए, लेकिन शहर में स्थित पेट्रोल पंपों की हालत दयनीय हो चुकी है।
लॉकडाउन के चलते जिले में भले ही घरेलू बिजली का भार बढ़ा है, लेकिन कल कारखाने व दुकानें बंद होने के कारण बिजली की खपत कम है। पिछले साल मार्च में शहरी क्षेत्र में 7.07 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई थी। इस बार 6.65 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई है। कोरोना के डर से लोग एसी व कूलर भी नहीं चला रहे हैं। गर्मी प्रारंभ होने के बाद भी लोगों को लो वोल्टेज की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा।
विज्ञापन
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है। इस दौरान लोगों को घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी है। जिसके चलते वाहन भी जहां के तहां खड़े हैं। उपसंभागीय विभाग में छोटे व बड़े कुल मिलाकर 61,500 वाहन पंजीकृत हैं। लॉकडाउन के बाद ये वाहन जहां के तहां खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन
कुछ वाहन ही सड़कों पर दिख रहे हैं। दिन हो या रात हाइवे से लेकर दूसरी सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। वाहनों के न चलने के कारण प्रदूषण में काफी कमी आई है। जिसका असर शहर से लेकर ग्रामीण अंचल में साफ दिख रहा है। वाहनों के प्रेशर हार्न के साथ धुआं भी गायब है। ध्वनि के साथ ही वायु प्रदूषण कम हो गया है। सड़कों पर उड़ती हुई धूल भी कहीं नजर नहीं आती। जबकि पहले वाहनों के आवागमन के दौरान वाहनों की धूल से सड़क के किनारे का व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो जाता था। दुकानदार धूल साफ करते हुए परेशान रहते थे। ऐसे समय में सड़कों पर धूल भी नहीं उड़ रही है। हवा चल रही है लेकिन उसमे धूल के कण नाम मात्र के देखने को मिलते हैं।
विज्ञापन
कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बाद वाहनों के खड़े होने से डीजल व पेट्रोल की बिक्री में खासी कमी आई है। बलीपुर स्थित पेट्रोलपंप संचालक देवव्रत मिश्रा ने बताया कि पहले प्रतिदिन 10 हजार लीटर के करीब डीजल व पेट्रोल की बिक्री हो जाया करती थी। मौजूदा समय में सात सौ लीटर भी नहीं हो पा रही है। हाइवे के पेट्रोलपंपों पर भले ही कुछ अधिक डीजल बिक जाए, लेकिन शहर में स्थित पेट्रोल पंपों की हालत दयनीय हो चुकी है।
लॉकडाउन के चलते जिले में भले ही घरेलू बिजली का भार बढ़ा है, लेकिन कल कारखाने व दुकानें बंद होने के कारण बिजली की खपत कम है। पिछले साल मार्च में शहरी क्षेत्र में 7.07 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई थी। इस बार 6.65 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई है। कोरोना के डर से लोग एसी व कूलर भी नहीं चला रहे हैं। गर्मी प्रारंभ होने के बाद भी लोगों को लो वोल्टेज की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा।