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वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति की दौड़ से बाहर हुए 10,304 छात्र-छात्राएं

Wed, 14 Mar 2018 01:24 AM IST
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:24 AM IST
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वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति की दौड़ से बाहर हुए 10,304 छात्र-छात्राएं
वजीफा व शुल्क प्रतिपूर्ति की दौड़ से बाहर हुए 10304 छात्र-छात्राएं
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31 मार्च के पहले सवा दो लाख विद्यार्थियों को मिलेगी छात्रवृत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने वाले 10304 छात्र-छात्राओं को अंतिम दौर में बाहर कर दिया गया है। इन छात्र-छात्राओं का डाटा संदिग्ध होने पर सुधारने का मौका दिया गया था, लेकिन अंतिम समय में आवेदन ही निरस्त कर दिया गया। हालांकि 1156 छात्र-छात्राएं संशोधन करने में सफल रहे हैं।
जिले के लगभग ढाई लाख छात्र-छात्राओं ने दशमोत्तर वजीफा और छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन करने के साथ ही विभिन्न चरणों में कमियों को दुरुस्त करने के लिए मौका दिया गया। जिले के 11,462 छात्र-छात्राओं का डाटा संदिग्ध मिलने पर मूल प्रतियां डाउनलोड करने का मौका दिया था। 1,158 छात्र-छात्राएं डाटा दुरुस्त करने में सफल रहे, मगर 10,304 छात्र-छात्राएं ऐसे थे, जिनका मूल अभिलेख उपलब्ध न होने पर आवेदन निरस्त कर दिया गया है। हालांकि सवा दो लाख छात्र-छात्राओं के चेहरे पर जल्द ही मुस्कान बिखरने वाली है। समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण सिंह ने बताया कि 30 मार्च के पहले सभी छात्र-छात्राओं के खाते में वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि पहुंच जाएगी। साल भर से आवेदन करके वजीफा का इंतजार करने वाले छात्र-छात्राओं को बड़ी ही बेसब्री से वजीफा आने का इंतजार है।
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बाप की बाइक लूटने का आरोपी बना बेटा
अमर उजाला
संडवा चंद्रिका (ब्यूरो)। पढ़ाई लिखाई करने वाले छात्र को पुलिस किस प्रकार अपराधी बनाकर वाहवाही लूट रही है, इसका एक ताजा मामला सामने आया है। अंतू पुलिस ने पिता की बाइक लूटने का आरोपी बेटे को बनाकर जेल में ठूंस दिया है। पुलिस ने चोरी की जो तीन बाइक दिखाई है, उसमें एक पिता और दूसरी उसके सगे भाई की है। पुलिस ने छात्र के घर से ही बाइक उठाई और उसी को बाइक चोर गैंग का सदस्य बना दिया। न्याय के लिए पीड़ित पिता अफसरों के चौखट पर दस्तक दे रहा है, मगर अधिकारी बात सुनने को तैयार नहीं है।
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अंतू इलाके के सांगापुर गांव निवासी सत्यनारायण सिंह के बेटे अंकुर उर्फ प्रियंक सिंह को पुलिस ने तीन मार्च को उस समय पकड़ लिया था, जब वह 28,300 रुपये लेकर मोरंग और सीमेंट लेने बाजार जा रहा था। उसी रात करीब साढ़े बारह बजे पुलिस सत्यनारायण सिंह के घर पहुंचकर उनकी पल्सर बाइक और भाई मयंक सिंह की बाइक उठा लाई। सुबह पुलिस ने पिता और भाई की बाइक की लूट का आरोपी अंकुर सिंह को बनाते हुए 28,300 रुपये बरामदगी दिखाकर चालान कर दिया। बाइक का चालान करने से पहले पुलिस ने नंबर प्लेट भी बदल दी। सेवानिवृत्त कर्मचारी सत्यनारायण सिंह की मानें तो अंकुर इलाहाबाद में रहकर पढ़ाई करता था। वह मंगरौरा स्थित लाल बहादुर सिंह इंटरमीडिएट कालेज धरौली मुफरिद में इंटरमीटिएट की परीक्षा देने के लिए आया था। अंतू पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र भेजकर न्याय की मांग की है।
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