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39 हजार किसानों पर 47 करोड़ का कर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Tue, 05 May 2015 11:32 PM IST
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खेती से आर्थिक तंगी दूर करने की उम्मीद में बेल्हा के हजारों किसान कर्ज में डूब गए हैं। जिले के 39 हजार 847 किसानों के ऊपर 47 करोड़ 41 लाख रुपये का कर्ज है। इन कृषकों के सिर कर्ज का यह बोझ सिर्फ साधन सहकारी समितियों (पैक्स) का है। उन्होंने कर्ज का यह पैसा खेती में लगा दिया। ऋण के इस पैसे से की गई खेती में मुनाफा तनिक भी नहीं हो रहा। जिससे वे कर्ज की भरपाई नहीं कर पा रहे।
रबी की खेती से किसानों ने अच्छी उपज का सपना देखा था। इस ख्वाब को पूरा करने के लिए कृषकों ने कर्ज लेने में कोई कोताही नहीं की। रबी फसल की बुवाई में शासन ने साधन सहकारी समितियों को उर्वरक सहित 12 करोड़ रुपये किसानों को कर्ज देने का लक्ष्य दिया था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान इस लक्ष्य को पार कर खेती के लिए 15 करोड़ 36 लाख रुपए का कर्ज लेकर खेती में लगा दिया। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष रबी की खेती में किसानों ने 13 करोड़ 74 लाख रुपये का ही कर्ज लिया था।
मगर इस बार खेती से आर्थिक सुधार की उम्मीद को देखते हुए वे पिछले साल से ज्यादा कर्ज ले बैठे। इन किसानों के सपने को प्रकृति की ऐसी नजर लगी कि कर्ज का सारा पैसा मिट्टी हो गया। बारिश और तूफान से फसलें बर्बाद हो गईं। एआर कोआपरेटिव कार्यालय के दस्तावेज में करीब 39 हजार 847 कर्जदार किसानों की संख्या दर्ज हैं। जिन पर लगभग 47 करोड़ 41 लाख रुपये का ऋण चढ़ा है। इसमें से करीब 20 करोड़ रुपये का कर्ज किसानों पर कई साल से चला आ रहा है। आर्थिक तंगी में वे जमा ही नहीं कर पा रहे। गनीमत ये रही कि बर्बाद फसलों की वजह से मरने वाले किसानों को देख सरकार ने कर्ज की वसूली स्थगित कर दी। वर्ना किसानों के लिए आगे खाईं पीछे कुआं ही था।
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रबी की खेती से किसानों ने अच्छी उपज का सपना देखा था। इस ख्वाब को पूरा करने के लिए कृषकों ने कर्ज लेने में कोई कोताही नहीं की। रबी फसल की बुवाई में शासन ने साधन सहकारी समितियों को उर्वरक सहित 12 करोड़ रुपये किसानों को कर्ज देने का लक्ष्य दिया था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान इस लक्ष्य को पार कर खेती के लिए 15 करोड़ 36 लाख रुपए का कर्ज लेकर खेती में लगा दिया। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष रबी की खेती में किसानों ने 13 करोड़ 74 लाख रुपये का ही कर्ज लिया था।
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मगर इस बार खेती से आर्थिक सुधार की उम्मीद को देखते हुए वे पिछले साल से ज्यादा कर्ज ले बैठे। इन किसानों के सपने को प्रकृति की ऐसी नजर लगी कि कर्ज का सारा पैसा मिट्टी हो गया। बारिश और तूफान से फसलें बर्बाद हो गईं। एआर कोआपरेटिव कार्यालय के दस्तावेज में करीब 39 हजार 847 कर्जदार किसानों की संख्या दर्ज हैं। जिन पर लगभग 47 करोड़ 41 लाख रुपये का ऋण चढ़ा है। इसमें से करीब 20 करोड़ रुपये का कर्ज किसानों पर कई साल से चला आ रहा है। आर्थिक तंगी में वे जमा ही नहीं कर पा रहे। गनीमत ये रही कि बर्बाद फसलों की वजह से मरने वाले किसानों को देख सरकार ने कर्ज की वसूली स्थगित कर दी। वर्ना किसानों के लिए आगे खाईं पीछे कुआं ही था।
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