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भूगोल की पढ़ाई के लिए कंप्यूटर जरूरी
Updated Fri, 19 Jan 2018 07:52 PM IST
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भूगोल की शिक्षा के लिए कंप्यूटर जरूरी
राज्य विवि ने पीजी क्लास के लिए जारी किया निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। भूगोल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को अब कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उंगलियां चलानी होंगी। राज्य विवि की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि भूगोल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्य है।
राज्य विश्वविद्यालय इलाहाबाद ने परास्नातक भूगोल की पढ़ाई में कम्प्यूटर को भी शामिल कर दिया है। प्रथम वर्ष के छात्रों को पहले सेमेस्टर की प्रायोगिक परीक्षा में बेहतर अंक पाने के लिए कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। जिले में इस बार परास्नातक भूगोल विषय की पढ़ाई कराने वाले कालेजों की संख्या करीब 12 हो गई है। जबकि पूर्व में सिर्फ एमडीपीजी और कालाकांकर कालेज में ही यह पढ़ाई होती थी। विश्वविद्यालय के जारी निर्देश के अनुसार परास्नातक की परीक्षाएं सेमेस्टर प्रणाली के अनुसार कराई जाएंगी। परास्नातक प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर की प्रयोगात्मक परीक्षा में कम्प्यूटर अध्ययन को शामिल किया गया है। जिसमें छात्रों को साफ्टवेयर, हार्डवेयर, डाटा इंट्री, डाटा चेंज, एमएस एक्सेल सहित इंट्रोडक्शन का प्रशिक्षण लेना होगा।
इनसेट-
कालेजों में नहीं हैं कंप्यूटर लैब
विश्वविद्यालय ने कंप्यूटर प्रशिक्षण को भले ही भूगोल की पीजी कक्षाओं के लिए अनिवार्य कर दिया हो, लेकिन जिले के कुछ कालेजों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश कालेजों में कंप्यूटर लैब ही नहीं हैं। जबकि 2 फरवरी को लिखित परीक्षा देने के बाद छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा होने वाली है। ऐसे में वह बगैर प्रशिक्षण के ही प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होंगे।
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इनसेट-
कम्प्यूटर संस्थानों की बढ़ी कमाई
महाविद्यालयों से निर्देश मिलने के बाद छात्रों ने प्राइवेट कंप्यूटर संस्थानों की ओर रुख करना शुुरू कर दिया है। वहीं छात्रों की भीड़ देख कंप्यूटर प्रशिक्षण दे रहे संचालकों ने भी फीस बढ़ा दी है। ऐसे में कालेजों की अव्यवस्था का खामियाजा छात्रों को आर्थिक रूप से भुगतना पड़ रहा है।
वर्जन
भूगोल विषय में कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य है। जीआईएस यानी भूलेख साफ्टवेयर के साथ जीपीएस व कंप्यूटर मैपिंग को भूगोल की पीजी कक्षाओं में पढ़ाया जाता है। इसे देखते हुए कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
डॉ. विनोद शुक्ला, संयोजक, बोर्ड आफ स्टडीज।
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राज्य विवि ने पीजी क्लास के लिए जारी किया निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। भूगोल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को अब कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उंगलियां चलानी होंगी। राज्य विवि की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि भूगोल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्य है।
राज्य विश्वविद्यालय इलाहाबाद ने परास्नातक भूगोल की पढ़ाई में कम्प्यूटर को भी शामिल कर दिया है। प्रथम वर्ष के छात्रों को पहले सेमेस्टर की प्रायोगिक परीक्षा में बेहतर अंक पाने के लिए कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। जिले में इस बार परास्नातक भूगोल विषय की पढ़ाई कराने वाले कालेजों की संख्या करीब 12 हो गई है। जबकि पूर्व में सिर्फ एमडीपीजी और कालाकांकर कालेज में ही यह पढ़ाई होती थी। विश्वविद्यालय के जारी निर्देश के अनुसार परास्नातक की परीक्षाएं सेमेस्टर प्रणाली के अनुसार कराई जाएंगी। परास्नातक प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर की प्रयोगात्मक परीक्षा में कम्प्यूटर अध्ययन को शामिल किया गया है। जिसमें छात्रों को साफ्टवेयर, हार्डवेयर, डाटा इंट्री, डाटा चेंज, एमएस एक्सेल सहित इंट्रोडक्शन का प्रशिक्षण लेना होगा।
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इनसेट-
कालेजों में नहीं हैं कंप्यूटर लैब
विश्वविद्यालय ने कंप्यूटर प्रशिक्षण को भले ही भूगोल की पीजी कक्षाओं के लिए अनिवार्य कर दिया हो, लेकिन जिले के कुछ कालेजों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश कालेजों में कंप्यूटर लैब ही नहीं हैं। जबकि 2 फरवरी को लिखित परीक्षा देने के बाद छात्रों की प्रैक्टिकल परीक्षा होने वाली है। ऐसे में वह बगैर प्रशिक्षण के ही प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होंगे।
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कम्प्यूटर संस्थानों की बढ़ी कमाई
महाविद्यालयों से निर्देश मिलने के बाद छात्रों ने प्राइवेट कंप्यूटर संस्थानों की ओर रुख करना शुुरू कर दिया है। वहीं छात्रों की भीड़ देख कंप्यूटर प्रशिक्षण दे रहे संचालकों ने भी फीस बढ़ा दी है। ऐसे में कालेजों की अव्यवस्था का खामियाजा छात्रों को आर्थिक रूप से भुगतना पड़ रहा है।
वर्जन
भूगोल विषय में कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य है। जीआईएस यानी भूलेख साफ्टवेयर के साथ जीपीएस व कंप्यूटर मैपिंग को भूगोल की पीजी कक्षाओं में पढ़ाया जाता है। इसे देखते हुए कंप्यूटर प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
डॉ. विनोद शुक्ला, संयोजक, बोर्ड आफ स्टडीज।