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रानीगंज विधायक समेत 189 भाजपा नेताओं- कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे होंगे वापस
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 27 Oct 2018 12:30 AM IST
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- फोटो : डेमो
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योगी सरकार रानीगंज विधायक समेत जिले के 186 भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस ले सकती है। जिला प्रशासन से इस बारे में रिपोर्ट मांगी गई थी। जिसमें 53 मामलों की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।
योगी सरकार के सत्ता में आते ही भाजपाइयों पर दर्ज राजनैतिक मुकदमों को वापस लेने की घोषणा की गई थी। योगी सरकार ने पहल करते हुए सत्तापक्ष के विधायकों और संगठनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने का प्रस्ताव मांगा था। सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमों के साथ ही उनके चुनाव में पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस करने के लिए सूची बनाकर शासन में प्रस्तुत किया।
प्रस्ताव मिलने के बाद शासन ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर आख्या तलब की है। जिले में रानीगंज विधायक धीरज ओझा समेत 189 नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों वापस लेने की तैयारी चल रही है। हालांकि योगी सरकार ने सिर्फ राजनैतिक मुकदमे वापस लेने को कहा था, मगर भाजपा नेता इसकी आड़ में आपसी रंजिश के मुकदमों को भी वापस कराने का खेल कर रहे हैं। संयुक्त निदेशक अभियोजन शंभु प्रताप चंद्र ने बताया कि अभी तक शासन से 53 मुकदमे वापस लेने के लिए मेरी राय मांगी गई थी। जिसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। फिलहाल अभी 136 मामले ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट शासन में जानी है। हालांकि इन दिनों फाइलों की पैरवी करने के लिए कलेक्ट्रेट में उमड़ने वाली भीड़ से प्रतीत हो रहा है कि दिवाली के पहले ही मुकदमा वापसी का फैसला हो सकता है।
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जिले में मुकदमा वापसी के सबसे अधिक प्रस्ताव पट्टी विधानसभा क्षेत्र से हैं। योगी सरकार अगर दिवाली के पहले यह तोहफा देती है, तो पट्टी विधानसभा के लोग सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। फिलहाल इन दिनों सब की नजरें मुकदमा वापसी के फैसले पर टिकी हुई हैं।
सपा और बसपा कार्यकाल में बेगुनाह भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों पर थोपे गए मुकदमों को वापस लेने के लिए शासन में प्रस्ताव भेजा गया है। जिन लोगों के मुकदमे वापस लेने का प्रस्ताव भेजा गया है, उन्होंने पार्टी और संगठन के लिए बहुत संघर्ष किया है। मुकदमा वापस होने पर ही वास्तविक न्याय मिलेगा।
ओमप्रकाश त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, भाजपा।
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योगी सरकार के सत्ता में आते ही भाजपाइयों पर दर्ज राजनैतिक मुकदमों को वापस लेने की घोषणा की गई थी। योगी सरकार ने पहल करते हुए सत्तापक्ष के विधायकों और संगठनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने का प्रस्ताव मांगा था। सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमों के साथ ही उनके चुनाव में पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस करने के लिए सूची बनाकर शासन में प्रस्तुत किया।
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प्रस्ताव मिलने के बाद शासन ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर आख्या तलब की है। जिले में रानीगंज विधायक धीरज ओझा समेत 189 नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों वापस लेने की तैयारी चल रही है। हालांकि योगी सरकार ने सिर्फ राजनैतिक मुकदमे वापस लेने को कहा था, मगर भाजपा नेता इसकी आड़ में आपसी रंजिश के मुकदमों को भी वापस कराने का खेल कर रहे हैं। संयुक्त निदेशक अभियोजन शंभु प्रताप चंद्र ने बताया कि अभी तक शासन से 53 मुकदमे वापस लेने के लिए मेरी राय मांगी गई थी। जिसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। फिलहाल अभी 136 मामले ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट शासन में जानी है। हालांकि इन दिनों फाइलों की पैरवी करने के लिए कलेक्ट्रेट में उमड़ने वाली भीड़ से प्रतीत हो रहा है कि दिवाली के पहले ही मुकदमा वापसी का फैसला हो सकता है।
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जिले में मुकदमा वापसी के सबसे अधिक प्रस्ताव पट्टी विधानसभा क्षेत्र से हैं। योगी सरकार अगर दिवाली के पहले यह तोहफा देती है, तो पट्टी विधानसभा के लोग सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। फिलहाल इन दिनों सब की नजरें मुकदमा वापसी के फैसले पर टिकी हुई हैं।
सपा और बसपा कार्यकाल में बेगुनाह भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों पर थोपे गए मुकदमों को वापस लेने के लिए शासन में प्रस्ताव भेजा गया है। जिन लोगों के मुकदमे वापस लेने का प्रस्ताव भेजा गया है, उन्होंने पार्टी और संगठन के लिए बहुत संघर्ष किया है। मुकदमा वापस होने पर ही वास्तविक न्याय मिलेगा।
ओमप्रकाश त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, भाजपा।