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गो आश्रय केंद्रों पर 18 और गायों की मौत
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प्रतापगढ़ में गो संरक्षण केंद्रों में गायों की मौत के बाद प्रशासन जागा और अब बिछाई जा रही ईंट।
- फोटो : PRATAPGARH
गो आश्रय केंद्रों पर 18 और गायों की मौत
पड़रीपाल में एक गोवंश ने भी दम तोड़ा, नहीं थम रहा मवेशियों की मौत का सिलसिला
केंद्रों पर दलदल में फंस रहे मवेशी, चारे-पानी का इंतजाम नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़/बाबागंज। जिले में गो आश्रय केंद्रों पर बदइंतजामी के चलते मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी है। रविवार को जिले में अलग-अलग स्थानों पर गो आश्रय केंद्रों में 18 गायों और एक गोवंश की मौत हो गई। अधिकांश जगहों पर चारा-पानी और छाया का अभाव है। इससे मवेशी तड़प रहे हैं।
जिले में आवारा पशुओं के संरक्षण के लिए बनाए गए गो आश्रय केंद्रों की हालत खस्ता है। आधे-अधूरे बने केंद्रों पर मवेशियों को रख दिया गया है, लेकिन वहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। न चारा है न पानी। कई जगहों पर टीनशेड तक नहीं है। शासन व अफसरों के दबाव पर किसानों की फसलों को सुरक्षित करने के लिए मवेशियों को गो आश्रय केंद्रों में कैद कर दिया गया है। बीते दिनों दो दिन तक लगातार हुई बारिश के चलते सभी गो आश्रय केंद्र दलदल बन गए हैं। मवेशी उसमें फंसे हुए हैं। बदइंतजामी के चलते भूख-प्यास से तड़पकर वह दम तोड़ रहे हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को गो आश्रय केंद्रों की पड़ताल की तो सांगीपुर के शुकुलपुर, देवली, पडऱीपाल, आसपुर देवसरा सहित एक दर्जन केंद्रों में दो दर्जन से अधिक मवेशी मृत पाए गए। शनिवार को खबर प्रकाशित हुई तो अफसरों की नींद टूटी और पड़ताल कर कार्रवाई के साथ ही आश्रय केंद्रों पर चारा- पानी व संसाधनों की व्यवस्था मुकम्मल करने का निर्देश दिया था। मगर इसके बाद भी आश्रय केंद्रों के जिम्मेदार व्यवस्था व संसाधन के इंतजाम को लेकर फिक्रमंद नहीं दिखे। इसका नतीजा यह रहा कि रविवार को भी मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी रहा। रविवार दोपहर मंगरौरा ब्लाक के पडऱीपाल गोआश्रय केंद्र पर भूख- प्यास से तड़प-तड़प कर दो गाय और एक गोवंश ने दम तोड़ दिया। आश्रय केंद्र पर अब मरने वाले मवेशियों की संख्या बढ़कर आधा दर्जन से अधिक हो गई है। जबकि तीन दर्जन मवेशी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। अभी भी यहां बदइंतजामी कायम है। न तो चारे की व्यवस्था हो सकी है और न ही पानी। पूरा परिसर दलदल बना हुआ है। वहीं मानधाता के दूबे पट्टी गो आश्रय केंद्र में भी रविवार को छह गायों की मौत हो गई। अव्यवस्था के चलते 12 से अधिक मवेशियों की हालत गंभीर बनी हुई है। सूचना के बाद भी अफसर इसे लेकर संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
चारा न पानी, दल-दल से निजात के लिए बिछा रहे ईंट
मंगरौरा के पड़रीपाल गो आश्रय केंद्र में अफसरों के निरीक्षण के बाद भी चारे व पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो सकी है। मवेशी भूख-प्यास तड़प रहे हैं। रविवार को यहां प्रशासन ने ईंट बिछवाना शुरू किया। उधर, संग्रामगढ़ में स्थित गो आश्रय केंद्र में भी चारे-पानी के अभाव में सात गायों की मौत हो गई। इसी तरह लतीफपुर ग्राम पंचायत में बनी गोशाला में भी रविवार को चारा-पानी के अभाव में तीन गायों की मौत हो गई।
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पड़रीपाल में एक गोवंश ने भी दम तोड़ा, नहीं थम रहा मवेशियों की मौत का सिलसिला
केंद्रों पर दलदल में फंस रहे मवेशी, चारे-पानी का इंतजाम नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़/बाबागंज। जिले में गो आश्रय केंद्रों पर बदइंतजामी के चलते मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी है। रविवार को जिले में अलग-अलग स्थानों पर गो आश्रय केंद्रों में 18 गायों और एक गोवंश की मौत हो गई। अधिकांश जगहों पर चारा-पानी और छाया का अभाव है। इससे मवेशी तड़प रहे हैं।
जिले में आवारा पशुओं के संरक्षण के लिए बनाए गए गो आश्रय केंद्रों की हालत खस्ता है। आधे-अधूरे बने केंद्रों पर मवेशियों को रख दिया गया है, लेकिन वहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। न चारा है न पानी। कई जगहों पर टीनशेड तक नहीं है। शासन व अफसरों के दबाव पर किसानों की फसलों को सुरक्षित करने के लिए मवेशियों को गो आश्रय केंद्रों में कैद कर दिया गया है। बीते दिनों दो दिन तक लगातार हुई बारिश के चलते सभी गो आश्रय केंद्र दलदल बन गए हैं। मवेशी उसमें फंसे हुए हैं। बदइंतजामी के चलते भूख-प्यास से तड़पकर वह दम तोड़ रहे हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को गो आश्रय केंद्रों की पड़ताल की तो सांगीपुर के शुकुलपुर, देवली, पडऱीपाल, आसपुर देवसरा सहित एक दर्जन केंद्रों में दो दर्जन से अधिक मवेशी मृत पाए गए। शनिवार को खबर प्रकाशित हुई तो अफसरों की नींद टूटी और पड़ताल कर कार्रवाई के साथ ही आश्रय केंद्रों पर चारा- पानी व संसाधनों की व्यवस्था मुकम्मल करने का निर्देश दिया था। मगर इसके बाद भी आश्रय केंद्रों के जिम्मेदार व्यवस्था व संसाधन के इंतजाम को लेकर फिक्रमंद नहीं दिखे। इसका नतीजा यह रहा कि रविवार को भी मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी रहा। रविवार दोपहर मंगरौरा ब्लाक के पडऱीपाल गोआश्रय केंद्र पर भूख- प्यास से तड़प-तड़प कर दो गाय और एक गोवंश ने दम तोड़ दिया। आश्रय केंद्र पर अब मरने वाले मवेशियों की संख्या बढ़कर आधा दर्जन से अधिक हो गई है। जबकि तीन दर्जन मवेशी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। अभी भी यहां बदइंतजामी कायम है। न तो चारे की व्यवस्था हो सकी है और न ही पानी। पूरा परिसर दलदल बना हुआ है। वहीं मानधाता के दूबे पट्टी गो आश्रय केंद्र में भी रविवार को छह गायों की मौत हो गई। अव्यवस्था के चलते 12 से अधिक मवेशियों की हालत गंभीर बनी हुई है। सूचना के बाद भी अफसर इसे लेकर संजीदा नहीं दिख रहे हैं।
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चारा न पानी, दल-दल से निजात के लिए बिछा रहे ईंट
मंगरौरा के पड़रीपाल गो आश्रय केंद्र में अफसरों के निरीक्षण के बाद भी चारे व पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो सकी है। मवेशी भूख-प्यास तड़प रहे हैं। रविवार को यहां प्रशासन ने ईंट बिछवाना शुरू किया। उधर, संग्रामगढ़ में स्थित गो आश्रय केंद्र में भी चारे-पानी के अभाव में सात गायों की मौत हो गई। इसी तरह लतीफपुर ग्राम पंचायत में बनी गोशाला में भी रविवार को चारा-पानी के अभाव में तीन गायों की मौत हो गई।

प्रतापगढ़ के पड़रीपाल गोशाला में बीमार गाय को उपचार के लिए ले जाते गोशाला के कर्मचारी।- फोटो : PRATAPGARH
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