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16 करोड़ बर्बाद, अब 32 करोड़ का भेजा प्रस्ताव, शहर में बिछाई गई पुरानी सीवर लाइन हो गई बेकार

Thu, 19 Aug 2021 03:26 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Thu, 19 Aug 2021 03:26 PM IST
सार

वर्ष 2007 में तत्कालीन सपा सरकार ने शहर के लिए सीवेज निस्तारण की योजना स्वीकृत की थी। बजट वित्तीय वर्ष 2009-10 में जारी हुआ था। 18.20 करोड़ से शहर में 12.47 किमी सीवर लाइन बिछाने के साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाना था।

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16 crore wasted, now 32 crore proposal sent, old sewer line laid in the city became useless
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विस्तार

शहर में एक दशक पहले सीवर लाइन बिछाने के लिए जल निगम की ओर से 16 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इसके बाद भी शहर में सीवर की व्यवस्था नहीं हो सकी। शहर के नालों का गंदा पानी लगातार सई नदी में गिरता रहा। इसे लेकर एनजीटी ने नाराजगी जताई थी। एनजीटी की सख्ती के बाद अब जल निगम ने फिर से 32 करोड़ रुपये से सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
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वर्ष 2007 में तत्कालीन सपा सरकार ने शहर के लिए सीवेज निस्तारण की योजना स्वीकृत की थी। बजट वित्तीय वर्ष 2009-10 में जारी हुआ था। 18.20 करोड़ से शहर में 12.47 किमी सीवर लाइन बिछाने के साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाना था। सई नदी के किनारे जमीन मिलने पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य वर्ष 2010 में शुरू कराया गया। दिसंबर 2011 में एसटीपी बनकर तैयार हो गया। फिर जनवरी 2012 से शहर में सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था। सीवर लाइन बिछाने में 16 करोड़ रुपये खर्च हो गए, मगर एसटीपी से इसे जोड़ा नहीं जा सका।
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छह किमी भी पाइप लाइन नहीं बिछ सकी और 16 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च कर दी गई। सीवर लाइन बिछाने में जमकर अनियमितता बरती गई। मानकों की अनदेखी की गई थी। शिकायतों के बाद जांच में सामने आया कि इस योजना के 1.78 करोड़ रुपये तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने दूसरी योजनाओं में व्यय कर दिए। बाकी बची धनराशि 16.42 करोड़ रुपये खर्च की गई, लेकिन इसके बाद भी सिर्फ 6.70 किमी ही सीवर लाइन बिछ सकी। जो सीवर लाइन बिछी है, वह जगह-जगह जर्जर हो गई है। निर्माण के करीब दस साल बाद भी एसटीपी ठप पड़ा रहा। इससे उसके कई उपकरण खराब हो गए।
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अब खराब उपकरणों की मरम्मत सहित एसटीपी को चलाने के लिए 3.54 करोड़ रुपये की दरकार है। 3.54 करोड़ रुपये की डिमांड जल निगम नगर विकास विभाग से सालभर पहले कर चुका है। हालांकि अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हो सका है। इस तरह 16.42 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी शहरवासियों को सीवर लाइन का लाभ नहीं मिल सका। इस बीच एनजीटी ने शहर के गंदे नालों से सई नदी के प्रदूषण का मामला गंभीरता से लिया गया। एनजीटी की सख्ती के बाद जल निगम की ओर से नए सिरे से शहर में सीवर लाइन बिछाने के लिए 32 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। पुरानी लाइन बेकार होने की रिपोर्ट भी भेेजी गई है।


पुरानी सीवर लाइन बिछाने में मानकों की अनदेखी होने के साथ ही अभी काफी काम भी बाकी था। यह सीवर लाइन अब किसी काम की नहीं है। नए सिरे से पाइप लाइन बिछाने के लिए जल निगम की ओर से शासन को 32 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। मुदित सिंह, ईओ नगर पालिका
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