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जिले के किसान अब वैज्ञानिक खेती से उगाएंगे फसल
Updated Sat, 19 Aug 2017 06:43 PM IST
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प्रतापगढ़। किसानों की आय दोगुनी करने और खेतों में अधिक अन्न उपजाने के लिए अब बेल्हा में ही शोध होगा। मोदी सरकार की पहल पर जिले में राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है। 20 हेक्टेअर क्षेत्रफल में होने वाले निर्माण के लिए अफसरों ने जमीन की तलाश प्रारंभ कर दी है।
जिले के किसानों को अब खेती-किसानी की समस्या को लेकर झंझट नहीं पालनी होगी। उनकी प्रत्येक समस्या का हल करने के लिए किसान वैज्ञानिक उनके खेतों तक स्वयं पहुंचेंगे। किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल करते हुए जिले में राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र खोलने का फैसला किया है। जिले के कालाकांकर ब्लाक में एक कृषि विज्ञान केंद्र खोला गया है, मगर अब मोदी सरकार ने फैसला किया है कि एक जिले में दो-दो कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की जाएगी। स्थापना के बाद कृषि वैज्ञानिकों की तैनाती की जाएगी। जो किसानों को तकनीकी खेती की जानकारी देने के साथ ही फसलों के सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने के साथ ही कम लागत में अधिक अन्न उपजाने के टिप्स देंगे। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार होने वाले केवीके के लिए 20 हेक्टेअर जमीन की आवश्यकता है। शहर में इतनी जमीन उपलब्ध नहीं है ऐसे में ग्रामीण इलाकों में ही इसकी स्थापना होगी।
केंद्र सरकार से पत्र आने के बाद जमीन की खोजबीन प्रारंभ हो गई हैं। एटीएल की जमीन पर विभागीय अधिकारियों की नजर है। मगर यह जमीन मिलना मुश्किल लग रहा है। इस जमीन को लेकर इतना विवाद खड़ा हो गया है, कि अधिकारी अग्रिम कार्रवाई के लिए तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जिला कृषि अधिकारी अमित जायसवाल का कहना है कि जिले में राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जमीन की उपलब्धता होते ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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जिले के किसानों को अब खेती-किसानी की समस्या को लेकर झंझट नहीं पालनी होगी। उनकी प्रत्येक समस्या का हल करने के लिए किसान वैज्ञानिक उनके खेतों तक स्वयं पहुंचेंगे। किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल करते हुए जिले में राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र खोलने का फैसला किया है। जिले के कालाकांकर ब्लाक में एक कृषि विज्ञान केंद्र खोला गया है, मगर अब मोदी सरकार ने फैसला किया है कि एक जिले में दो-दो कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की जाएगी। स्थापना के बाद कृषि वैज्ञानिकों की तैनाती की जाएगी। जो किसानों को तकनीकी खेती की जानकारी देने के साथ ही फसलों के सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने के साथ ही कम लागत में अधिक अन्न उपजाने के टिप्स देंगे। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार होने वाले केवीके के लिए 20 हेक्टेअर जमीन की आवश्यकता है। शहर में इतनी जमीन उपलब्ध नहीं है ऐसे में ग्रामीण इलाकों में ही इसकी स्थापना होगी।
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केंद्र सरकार से पत्र आने के बाद जमीन की खोजबीन प्रारंभ हो गई हैं। एटीएल की जमीन पर विभागीय अधिकारियों की नजर है। मगर यह जमीन मिलना मुश्किल लग रहा है। इस जमीन को लेकर इतना विवाद खड़ा हो गया है, कि अधिकारी अग्रिम कार्रवाई के लिए तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जिला कृषि अधिकारी अमित जायसवाल का कहना है कि जिले में राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जमीन की उपलब्धता होते ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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