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भगवान कृष्ण से सीखें सच्ची मित्रता के मायने

Sun, 11 Nov 2018 12:43 AM IST
Updated Sun, 11 Nov 2018 12:43 AM IST
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भगवान कृष्ण से सीखें सच्ची मित्रता के मायने
प्रतापगढ़। शहर के दहिलामऊ में कंपनी बाग के समीप आयेाजित श्रीमद्भागवत कथा के छठें दिन कथा वाचक हरिवंश सिंह ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि सच्ची मित्रता क्या होती है, इसके मायने भगवान श्रीकृष्ण से सीखें।
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उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण ने सुदामा से सच्ची मित्रता की थी। उन्होंने सच्ची मित्रता भी निभाई। कहा कि सुदामा जब द्वारिका नगरी पहुंचे तो द्वारपाल ने उनकी दीन दशा देखकर गेट पर ही रोक दिया। सुदामा ने अपने को भगवान कृष्ण का सखा बताया तो सभी ने उपहास किया। मगर जैसे ही इस बात की जानकारी भगवान कृष्ण को हुई तो वह जिस हाल में थे वैसे ही राजभवन से भागते हुए मुख्यद्वार पहुंचे और सखा सुदामा को गले लगाकर कुशलक्षेम पूछा। यह देखकर सभी दंग रह गए। उन्होंने बताया कि मित्र कितना भी बड़ा हो जाए, मगर पद और ओहदा कभी उनके संबंध में आड़े नहीं आते। यही सच्ची मित्रता है। कथा श्रवण कर पंडाल मेें जुटे लोग भावविभोर हो उठे। कथा के मुख्य यजमान राजेंद्र प्रसाद तिवारी, मालती तिवारी ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर शंभु प्रसाद द्विवेदी, वशिष्ठ मिश्रा, धर्मेेंद्रनाथ मिश्र, आलोक द्विवेदी, अनुपम तिवारी, वंदना तिवारी, संगीता कुमुद, पार्थ पांडेय आदि मौजूद रहे।
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