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प्रधान डाकघर में करोड़ों का गोलमाल

Mon, 29 Oct 2018 07:32 PM IST
Updated Mon, 29 Oct 2018 07:32 PM IST
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प्रधान डाकघर में करोड़ों का गोलमाल
प्रधान डाकघर में लाखों का गोलमाल
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पासबुक में दर्ज करने के बाद खाते में नहीं जमा किए रुपये
कर्मचारियों और अभिकर्ताओं की मिलीभगत से हुआ खेल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले के प्रधान डाकघर में लाखों रुपये का गोलमाल हुआ है। डाककर्मियों और अभिकर्ताओं की मिलीभगत से हुए खेल का खुलासा उस समय हुआ जब एक ग्राहक आरडी पूरी होने पर भुगतान लेने पहुंचा। काउंटर पर फार्म भरकर जमा करने पर जब कैशियर को दिया तो पता चला कि खाते में रुपये ही नहीं हैं। इसके बाद इस तरह के और भी मामले सामने आने पर हड़कंप मच गया। पता चला कि शहर की एक महिला को 84 लाख रुपये का चूना लगा दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
शहर का प्रधान डाकघर एक बार फिर फर्जीवाड़े की गिरफ्त में आ गया है। लंबे समय से डटे कर्मचारियों ने अभिकर्ताओं के सहयोग से एक बार फिर ग्राहकों के विश्वास पर कुठाराघात किया है। प्रधान डाकघर में गोलमाल का मामला उस समय सामने आया जब आरडी जमा करने वाला एक व्यक्ति भुगतान लेने डाकघर पहुंच गया। उसकी पासबुक में मुहर तो डाकघर की लगी हुई है, मगर बैलेंस हाथ से लिखा हुआ था। काउंटर पर बैठे कैशियर ने कंप्यूटर में जब खाता नंबर डालकर देखा तो उसमें रुपये ही नहीं थे। इसकी जानकारी होते ही अन्य ग्राहकों ने इसकी खोजबीन प्रारंभ की तो पता चला कि व्यापक स्तर पर खेल हुआ है। शहर के एक महिला के नाम आरडी और एफडी में जमा 84 लाख रुपये का खेल कर लिया गया है। दरअसल, डाकघर में आरडी और एफडी करने वाले अधिकांश ग्राहक अभिकर्ताओं पर विश्वास करके रुपये जमा करते हैं। आरडी और एफडी करने पर नौकरी पेशा वालों को जहां आयकर में छूट मिलती है, वहीं अभिकर्ताओं को कमीशन मिलता है। तीन दिन के अंदर डाकघर में जांच के बाद करोड़ों रुपये का घपला उजागर हुआ है। फिलहाल इन दिनों दहिलामऊ निवासी शारदा देवी के 84 लाख घपले का मामला डाकघर में गरमाया हुआ है। कोई भी कर्मचारी और अभिकर्ता मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
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आठ साल पहले पेंशन घोटाला हुआ था उजागर
प्रधान डाकघर में फर्जीवाड़े का यह कोई नया मामला नहीं है। आठ साल पहले वृद्धावस्था पेंशन में लाखों रुपये का घपला उजागर हुआ था। समाज कल्याण विभाग से 72 ऐसे लाभार्थियों का खुलासा हुआ था, जिनके नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं था। डाकघर में तैनात अभिकर्ता इन फर्जी नामों से आने वाली धनराशि को निकालकर बंदरबाट कर रहे थे।
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मुहर डाकघर की और पासबुक पर हाथ से लिखते थे बैलेंस
शहर के अधिकांश ग्राहकों ने आरडी खोल रखी है। खाताधारकों से रुपये लेने वाले अभिकर्ता डाकघर में जमा करते हैं और हप्ते-दस दिन बाद खाताधारकों के घर पासबुक पहुंचाते हैं। अधिकांश अभिकर्ता ऐसे हैं, जो बैलेंस तो हाथ से लिखते हैं और मुहर डाकघर की लगाकर देते हैं। ग्राहक जब हाथ से लिखने के बारे में पूछता है तो उसे सरवर डाउन होने की बात कहकर विश्वास दिलाया जाता है कि पासबुक में लिख हुए एक-एक अंक का मिलान कंप्यूटर से किया गया है।
इनसेट--------
दो दर्जन से अधिक लोगों के साथ फर्जीवाड़ा
हाथ से लिखी हुई पासबुक में गोलमाल होने के अभी तक दो दर्जन तक मामले सामने आ चुके हैं। मगर विभागीय अधिकारी किसी भी जानकारी से इनकार कर रहे हैं। अधिकारी सिर्फ अभिकर्ताओं पर यह दबाव बनाए हुए हैं कि कोई भी लिखित शिकायत उनके पास आई तो वह सीधे मुकदमा दर्ज कराएंगे। इससे घबराकर अभिकर्ता मामले को खत्म कराने में लगे हुए हैं।

वर्जन--------
जो भी गड़बड़ी सुनने को मिल रही है, उसके लिए पूरी तरह ग्राहक जिम्मेदार हैं। वह अभिकर्ताओं पर इतना विश्वास क्यों करते हैं। उन्हें स्वयं डाकघर में आकर रुपये जमा करनेे चाहिए। फिलहाल अभी मेरे पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मचारी और अभिकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
केएस बाजपेयी, प्रवर डाक अधीक्षक।
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