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सैनिक बशीर का शव पहुंचते ही गम में डूबा मझवारा
Updated Tue, 23 Oct 2018 11:08 PM IST
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सैनिक बशीर का शव पहुंचते ही गम में डूबा मझवारा
गांव के कब्रिस्तान में सलामी के बीच किया गया सुपुर्दे खाक
ड्यूटी के दौरान हृदयगति रुकने से हुई थी सैनिक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
शमशेरगंज। सैनिक की मौत से मझवारा के लोग गम में डूब गए। सबसे बुरा हाल मां-बाप का था। इकलौते बेटे का जनाजा उनके सामने उठेगा। यह सोचते ही पिता की आंखों से आंसू निकलने लगते। गार्ड आफ आनर की सलामी के बीच गांव के कब्रिस्तान में जनाजे को सुपुर्दे खाक कर दिया गया।
सुलतानपुर जनपद में वर्ष 2000 में सेना परीक्षा में भर्ती हुए जेठवारा के मझवारा निवासी मोहम्मद बशीर पुत्र शौकत अली का चयन हुआ था। सेना के राजपुताना रेजीमेंट की ड्यूटी करते हुए रविवार की रात सिक्किम में बशीर की अचानक तबियत खराब हुई। साथी उन्हें लेकर अस्पताल भागे। जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। यह खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। मंगलवार को सैनिक बशीर का शव लेकर साथी सेना के वाहन से घर पहुंचे। जहां तिरंगे में लिपटे बशीर के पाथव शरीर का आखिरी दीदार करने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। पत्नी मैमुन निशा, पांच साल की बेटी अरबिश का बुरा हाल था। वालिद शौकत व मां जैतून भी अपने इकलौते बेटे की मौत के गम में बेहोश हो जाया करते थे। बहन कैसर जहां व साजिदा भी अपने मां-बाप से लिपटकर रोती रहीं। सेना से बशीर का पार्थिव शरीर लेकर आए सैनिकों ने गार्ड आफ आनर की सलामी दी। जिसके बाद गांव के कब्रिस्तान में जनाजे को सुपुर्दे खाक किया गया।
इनसेट-----
सैनिक की मौत से बेखबर रहे जेठवारा एसओ
वैसे तो पुलिस अफसरों का दावा रहता है कि इलाके की हर गतिविधियों पर पुलिसकर्मियों की पैनी निगाह होती है। हर बात की जानकारी भी उन्हें रहती है। गांवों के लिए सिपाही से लेकर दरोगा तक को हल्कावार इलाका आवंटित किया जाता है। मंगलवार को जेठवारा पुलिस को भी सैनिक को अंतिम विदाई देने की भनक तक नहीं लगी। सिपाही, दरोगा तो दूर थानेदार को भी इलाके में सैनिक के शव को लाए जाने की भनक तक नहीं थी। मंगलवार को सेना के जवान पुलिसकर्मियों को खोजते रहे लेकिन कोई सामने नहीं आया।
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सैनिक बशीर का शव पहुंचते ही गम में डूबा मझवारा
गांव के कब्रिस्तान में सलामी के बीच किया गया सुपुर्दे खाक
ड्यूटी के दौरान हृदयगति रुकने से हुई थी सैनिक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
शमशेरगंज। सैनिक की मौत से मझवारा के लोग गम में डूब गए। सबसे बुरा हाल मां-बाप का था। इकलौते बेटे का जनाजा उनके सामने उठेगा। यह सोचते ही पिता की आंखों से आंसू निकलने लगते। गार्ड आफ आनर की सलामी के बीच गांव के कब्रिस्तान में जनाजे को सुपुर्दे खाक कर दिया गया।
सुलतानपुर जनपद में वर्ष 2000 में सेना परीक्षा में भर्ती हुए जेठवारा के मझवारा निवासी मोहम्मद बशीर पुत्र शौकत अली का चयन हुआ था। सेना के राजपुताना रेजीमेंट की ड्यूटी करते हुए रविवार की रात सिक्किम में बशीर की अचानक तबियत खराब हुई। साथी उन्हें लेकर अस्पताल भागे। जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। यह खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। मंगलवार को सैनिक बशीर का शव लेकर साथी सेना के वाहन से घर पहुंचे। जहां तिरंगे में लिपटे बशीर के पाथव शरीर का आखिरी दीदार करने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। पत्नी मैमुन निशा, पांच साल की बेटी अरबिश का बुरा हाल था। वालिद शौकत व मां जैतून भी अपने इकलौते बेटे की मौत के गम में बेहोश हो जाया करते थे। बहन कैसर जहां व साजिदा भी अपने मां-बाप से लिपटकर रोती रहीं। सेना से बशीर का पार्थिव शरीर लेकर आए सैनिकों ने गार्ड आफ आनर की सलामी दी। जिसके बाद गांव के कब्रिस्तान में जनाजे को सुपुर्दे खाक किया गया।
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सैनिक की मौत से बेखबर रहे जेठवारा एसओ
वैसे तो पुलिस अफसरों का दावा रहता है कि इलाके की हर गतिविधियों पर पुलिसकर्मियों की पैनी निगाह होती है। हर बात की जानकारी भी उन्हें रहती है। गांवों के लिए सिपाही से लेकर दरोगा तक को हल्कावार इलाका आवंटित किया जाता है। मंगलवार को जेठवारा पुलिस को भी सैनिक को अंतिम विदाई देने की भनक तक नहीं लगी। सिपाही, दरोगा तो दूर थानेदार को भी इलाके में सैनिक के शव को लाए जाने की भनक तक नहीं थी। मंगलवार को सेना के जवान पुलिसकर्मियों को खोजते रहे लेकिन कोई सामने नहीं आया।
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