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बेरोकटोक गली-गली खुले अवैध स्कूल 19-03-21
Updated Wed, 28 Mar 2018 12:14 AM IST
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प्रतापगढ़। नए शिक्षासत्र की शुरुआत से पहले ही शहर और गांव में गली-गली बिना मान्यता के स्कूल खुल गए हैं। चौराहों पर बड़ी-बड़ी होर्डिंग टांग दी गई हैं, तो कई स्कूल ई-रिक्शा से प्रचार कर दाखिले के लिए अभिभावकों को ऑफर दे रहे हैं। अवैध स्कूल संचालकों में प्रचार-प्रसार करने की होड़ लगी हुई है।
दो अप्रैल से नए शिक्षासत्र की शुरुआत होने के पहले ही जिले में अवैध स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है। शहर हो या गांव हर जगह चौराहों पर अवैध स्कूलों के बड़े-बड़े होर्डिंग टंगे नजर आ रहे हैं। इन अवैध स्कूलों में धड़ल्ले से दाखिला भी हो रहा है। अभिभावकों को गुमराह करके अवैध स्कूल संचालक फर्जी पंजीकरण नंबर भी दिखा रहे हैं। शहर हो या गांव अवैध संचालकों ने इस प्रकार जाल फैला रखा है कि अधिकारी और अभिभावक कोई भी उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। अधिकांश स्कूलों में बच्चों की ड्रेस और कापी-किताब का भी ठेका लिया जा रहा है, जबकि कुछ स्कूल कमीशन सेट होने वाली दुकानों पर भेज रहे हैं।
अभिभावक उसी दुकान से किताब और कॉपी लेने को मजबूर हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि अब ग्रामीण इलाकों में हिंदी मिडियम स्कूल नहीं खुल रहे हैं, बल्कि गांव से शहर तक खुलने वाले सभी स्कूल इंग्लिश मिडियम हैं। बीते शिक्षासत्र में बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वे में 621 अवैध स्कूल मिले थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग ने चुप्पी साध ली। अब नए शिक्षासत्र के लिए फिर शिक्षा की मंडी सजने लगी है, लेकिन अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।
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बीईओ की मिलीभगत से चल रहे अवैध स्कूल
बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध स्कूल चल रहे हैं। पिछले वर्ष तैयार सूची में अधिकांश स्कूलों का नाम सूची से हटा दिया गया था। बीएसए ने जब सूची जारी कि उनमें चर्चित स्कूलों का नाम ही नहीं था।
फर्जी बोर्ड का चल रहा था स्कूल
पट्टी तहसील के सोना देवी छत्रपाल सिंह इंटरमीडिएट कालेज मरहा को जिस बोर्ड से मान्यता मिली थी, दिल्ली में उस नाम का कोई बोर्ड ही नहीं है। नायब तहसीलदार पट्टी की जांच में इस बात का खुलासा होने पर डीआईओएस ने प्रबंधक को नोटिस जारी कर स्कूल को बंद करने का आदेश दिया है। आरोप है कि डीआईओएस के आदेश के बाद भी इंटरकॉलेज अभी संचालित है।
गिनाने के लिए बड़े-बड़े नाम और पढ़ाने वाले इंटर पास
अवैध स्कूलों में टीचर के नाम पर बड़े-बड़े नाम होर्डिंग और पंपलेट में लिखाए जाते हैं, मगर पढ़ाने वाले इंटर पास होते हैं। अभिभावकों से मोटी रकम लेने वाले स्कूल संचालक अप्रशिक्षित टीचरों से बच्चों को पढ़वाते हैं।
जिले में चलने वाले अवैध स्कूलों के खिलाफ अप्रैल माह में अभियान चलेगा। सोमवार को डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिर्फ अवैध स्कूलों के संचालन पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि एसडीएम और खंड शिक्षा अधिकारी मिलकर जिलेभर के अवैध स्कूलों को बंद कराएंगे।
बीएन सिंह, बीएसए, प्रतापगढ़
बेरोकटोक गली-गली खुले अवैध स्कूल
चौराहे पर होर्डिंग, ई-रिक्शा से हो रहा है प्रचार, नए सत्र के लिए सजने लगी शिक्षा की मंडी
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दो अप्रैल से नए शिक्षासत्र की शुरुआत होने के पहले ही जिले में अवैध स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है। शहर हो या गांव हर जगह चौराहों पर अवैध स्कूलों के बड़े-बड़े होर्डिंग टंगे नजर आ रहे हैं। इन अवैध स्कूलों में धड़ल्ले से दाखिला भी हो रहा है। अभिभावकों को गुमराह करके अवैध स्कूल संचालक फर्जी पंजीकरण नंबर भी दिखा रहे हैं। शहर हो या गांव अवैध संचालकों ने इस प्रकार जाल फैला रखा है कि अधिकारी और अभिभावक कोई भी उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। अधिकांश स्कूलों में बच्चों की ड्रेस और कापी-किताब का भी ठेका लिया जा रहा है, जबकि कुछ स्कूल कमीशन सेट होने वाली दुकानों पर भेज रहे हैं।
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अभिभावक उसी दुकान से किताब और कॉपी लेने को मजबूर हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि अब ग्रामीण इलाकों में हिंदी मिडियम स्कूल नहीं खुल रहे हैं, बल्कि गांव से शहर तक खुलने वाले सभी स्कूल इंग्लिश मिडियम हैं। बीते शिक्षासत्र में बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वे में 621 अवैध स्कूल मिले थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग ने चुप्पी साध ली। अब नए शिक्षासत्र के लिए फिर शिक्षा की मंडी सजने लगी है, लेकिन अफसरों ने चुप्पी साध रखी है।
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बीईओ की मिलीभगत से चल रहे अवैध स्कूल
बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध स्कूल चल रहे हैं। पिछले वर्ष तैयार सूची में अधिकांश स्कूलों का नाम सूची से हटा दिया गया था। बीएसए ने जब सूची जारी कि उनमें चर्चित स्कूलों का नाम ही नहीं था।
फर्जी बोर्ड का चल रहा था स्कूल
पट्टी तहसील के सोना देवी छत्रपाल सिंह इंटरमीडिएट कालेज मरहा को जिस बोर्ड से मान्यता मिली थी, दिल्ली में उस नाम का कोई बोर्ड ही नहीं है। नायब तहसीलदार पट्टी की जांच में इस बात का खुलासा होने पर डीआईओएस ने प्रबंधक को नोटिस जारी कर स्कूल को बंद करने का आदेश दिया है। आरोप है कि डीआईओएस के आदेश के बाद भी इंटरकॉलेज अभी संचालित है।
गिनाने के लिए बड़े-बड़े नाम और पढ़ाने वाले इंटर पास
अवैध स्कूलों में टीचर के नाम पर बड़े-बड़े नाम होर्डिंग और पंपलेट में लिखाए जाते हैं, मगर पढ़ाने वाले इंटर पास होते हैं। अभिभावकों से मोटी रकम लेने वाले स्कूल संचालक अप्रशिक्षित टीचरों से बच्चों को पढ़वाते हैं।
जिले में चलने वाले अवैध स्कूलों के खिलाफ अप्रैल माह में अभियान चलेगा। सोमवार को डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिर्फ अवैध स्कूलों के संचालन पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि एसडीएम और खंड शिक्षा अधिकारी मिलकर जिलेभर के अवैध स्कूलों को बंद कराएंगे।
बीएन सिंह, बीएसए, प्रतापगढ़
बेरोकटोक गली-गली खुले अवैध स्कूल
चौराहे पर होर्डिंग, ई-रिक्शा से हो रहा है प्रचार, नए सत्र के लिए सजने लगी शिक्षा की मंडी