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चुनावी बजट से किसान, कर्मचारी व्यापारी सभी खुश
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बजट में एक बार फिर छले गए किसान
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार के बजट को निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि मोदी के बजट ने एक बार फिर किसानों को छला है। उन्होंने कहा कि मिनिमम इनकम गारंटी की उम्मीद आम आदमी ने कर रखी थी। मगर यह घोषणा भी टांय-टांय फिस हो गई। उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपये देने का वादा किया था, 17 रुपये में काम निपटा दिया।
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चुनावी बजट से किसान, कर्मचारी व्यापारी सभी खुश
आयकर का दायरा बढ़ने पर जताई प्रसन्नता, किसानों के खिले चेहरे
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। मोदी सरकार के चुनावी बजट से किसान, कर्मचारी, व्यापारी और महिलाएं सभी खुश हैं। इस बजट में केंद्र सरकार ने किसानों को छह हजार रुपये वार्षिक देने की घोषणा करके उनका दिल जीत लिया है। आयकर की सीमा बढ़ाकर दोगुनी करने से व्यापारी, कर्मचारियों के साथ ही पेंशनर भी प्रसन्न हैं। हालांकि महिलाओं के लिए अलग से कोई घोषणा न होने से उनमें थोड़ी उदासी है।
फोटो
बजट में आयकर की सीमा दोगुना करने से व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ तो मिला है, मगर उनके लिए कोई खास छूट अलग से नहीं दी गई है। जीएसटी के प्रावधानों को ढीला करने और टैक्स का दायरा बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही थी, मगर ऐसा नहीं हो सका।
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राजेंद्र केसरवानी, जिलाध्यक्ष, व्यापार मंडल।
फोटो
चुनावी बजट व्यापारियों की आशा के अनुरूप नहीं है। मगर आयकर में छूट देने से आम लोगों को राहत मिली है। व्यापारियों के लिए जीएसटी के प्रावधानों में छूट देने की मांग की जा रही थी, मगर सरकार ने नहीं माना है।
अशोक कुमार सिंह, व्यापारी नेता।
फोटो
मध्यम वर्गीय परिवारों और व्यापारियों के लिए आम बजट राहत देने वाला है। आयकर की सीमा दोगुना करने की उम्मीद लोगों को नहीं थी। अगर यह चुनावी वर्ष न होता तो सरकार कर्मचारियों, शिक्षकों और व्यापारियों को यह तोहफा कदापि न देती।
पंकज मिश्र, व्यापारी।
फोटो
आम बजट में आयकर की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने से शिक्षकों को राहत मिली है। मगर सरकार ने गरीबी का मानक आठ लाख के ऊपर निर्धारित किया था, इसलिए हम लोगों को उम्मीद थी, कि आठ बढ़ाकर सीमा होगी। फिलहाल शिक्षकों के लिए संतोषजनक बजट है।
अनिल कुमार सिंह, अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ।
फोटो
केंद्र सरकार ने बजट में शिक्षकों और कर्मचारियों को काफी राहत दी है। शिक्षकों को अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रुप में देना पड़ता था, मगर आयकर की सीमा बढने से नए अध्यापकों और कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी।
विनय सिंह, जिलामंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ।
फोटो
शिक्षकों के लिए काफी बेहतर बजट रहा। ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि आयकर सीमा बढ़ाकर सीधे दो गुना कर दी गई है। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों को काफी राहत मिली है।
रामकुमार सिंह, शिक्षक नेता।
फोटो
केंद्र सरकार ने आयकर की सीमा बढ़ाकर दोगुना तो कर दिया है, मगर कर्मचारियों की जो पुरानी मांग है, उस पर गौर नहीं किया गया है। कर्मचारियों के लिए आयकर की सीमा बढ़ाना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना पुरानी पेंशन है। इसलिए सरकार को इसी बजट में पुरानी पेंशन के लिए धनराशि बढ़ाना चाहिए था।
रमाशंकर तिवारी, संह संयोजक, पुरानी पेंशन बहाली मंच।
फोटो
आयकर की सीमा बढ़ाने से आम कर्मचारियों के साथ ही अफसरों को भी लाभ पहुंचेगा। सरकार का यह कदम सराहनीय है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब आयकर की सीमा बढ़ाकर पांच लाख की गई है। इससे सबसे बड़ा फायदा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलेगा। फिलहाल कर्मचारी वर्ग संतुष्ट नहीं है।
करुणेश सिंह, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद।
फोटो
आयकर की सीमा बढ़ाने से काम चलने वाला नहीं है। सरकार को पुरानी पेंशन अविलंब बहाल करनी चाहिए, जो कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ मामला है। मगर सरकार इस पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है। जिससे कर्मचारी वर्ग असंतुष्ट है।
दुर्गा प्रसाद शुक्ल, अध्यक्ष, रजिस्टार कानूनगो संघ।
फोटो
मोदी सरकार ने पहली बार किसानों की तरफ देखा है। किसानों को साल में छह हजार रुपये देने का फैसला उचित है। इससे आम किसान को खाद और पानी की समस्या से निपटने में आसानी होगी।
श्रीनाथ तिवारी, राजा का पुरवा, बोझवा।
इनसेट-------
किसानों को पेंशन की रकम देने के बजाए सिंचाई के लिए साधन मुहैया कराना चाहिए था। डीएपी खाद इतनी महंगी हो गई है कि किसान खरीदकर खेत में डालता है, मगर खेत में कुछ होता नहीं है। फिलहाल छह हजार रुपये वार्षिक मिलने से किसानी में तेजी आएगी।
रामशिरोमणि सिंह, बझान।
फोटो
किसानों को छह हजार रुपये सालाना पेंशन और गौ पालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज लेने वालों को दो प्रतिशत की छूट देने का फैसला सराहनीय है। केंद्र सरकार के इस फैसले से किसानों का हौसला बढ़ा है।
महावीर तिवारी, जयतीपुर, कटकामानापुर।
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मोदी सरकार का बजट आम लोगों के लिए भले ही राहत भरा हो, मगर महिलाओं के लिए निराशाजनक रहा। बजट में महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर लाभ पहुंचाया गया है, मगर अलग से बजट में कोई छूट नहीं दी गई है। इससे रसोई महंगी ही रहेगी।
श्रध्दा सिंह, समाजसेविका।
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महिलाओं को लुभाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आम बजट ने महिलाओं को निराश किया है। महिलाओं की रसोई जब तक सस्ती नहीं होगी, तब तक बजट का कोई मायने नहीं होता है। फिलहाल किसानों के लिए राहत भरी खबर है।
नमिता पांडेय, गृहणी।
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मोदी का बजट कर्मचारियों, व्यापारियों, अफसरों के लिए फायदेमंद है। मगर महिलाओं का ख्याल नहीं रखा गया। इस बात की पीड़ा है। फिलहाल सरकार ने किसानों का दिल जीतने का प्रयास किषया है।
श्वेता सिंह, गृहणी।
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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार के बजट को निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि मोदी के बजट ने एक बार फिर किसानों को छला है। उन्होंने कहा कि मिनिमम इनकम गारंटी की उम्मीद आम आदमी ने कर रखी थी। मगर यह घोषणा भी टांय-टांय फिस हो गई। उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपये देने का वादा किया था, 17 रुपये में काम निपटा दिया।
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चुनावी बजट से किसान, कर्मचारी व्यापारी सभी खुश
आयकर का दायरा बढ़ने पर जताई प्रसन्नता, किसानों के खिले चेहरे
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। मोदी सरकार के चुनावी बजट से किसान, कर्मचारी, व्यापारी और महिलाएं सभी खुश हैं। इस बजट में केंद्र सरकार ने किसानों को छह हजार रुपये वार्षिक देने की घोषणा करके उनका दिल जीत लिया है। आयकर की सीमा बढ़ाकर दोगुनी करने से व्यापारी, कर्मचारियों के साथ ही पेंशनर भी प्रसन्न हैं। हालांकि महिलाओं के लिए अलग से कोई घोषणा न होने से उनमें थोड़ी उदासी है।
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बजट में आयकर की सीमा दोगुना करने से व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ तो मिला है, मगर उनके लिए कोई खास छूट अलग से नहीं दी गई है। जीएसटी के प्रावधानों को ढीला करने और टैक्स का दायरा बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही थी, मगर ऐसा नहीं हो सका।
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राजेंद्र केसरवानी, जिलाध्यक्ष, व्यापार मंडल।
फोटो
चुनावी बजट व्यापारियों की आशा के अनुरूप नहीं है। मगर आयकर में छूट देने से आम लोगों को राहत मिली है। व्यापारियों के लिए जीएसटी के प्रावधानों में छूट देने की मांग की जा रही थी, मगर सरकार ने नहीं माना है।
अशोक कुमार सिंह, व्यापारी नेता।
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मध्यम वर्गीय परिवारों और व्यापारियों के लिए आम बजट राहत देने वाला है। आयकर की सीमा दोगुना करने की उम्मीद लोगों को नहीं थी। अगर यह चुनावी वर्ष न होता तो सरकार कर्मचारियों, शिक्षकों और व्यापारियों को यह तोहफा कदापि न देती।
पंकज मिश्र, व्यापारी।
फोटो
आम बजट में आयकर की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने से शिक्षकों को राहत मिली है। मगर सरकार ने गरीबी का मानक आठ लाख के ऊपर निर्धारित किया था, इसलिए हम लोगों को उम्मीद थी, कि आठ बढ़ाकर सीमा होगी। फिलहाल शिक्षकों के लिए संतोषजनक बजट है।
अनिल कुमार सिंह, अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ।
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केंद्र सरकार ने बजट में शिक्षकों और कर्मचारियों को काफी राहत दी है। शिक्षकों को अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रुप में देना पड़ता था, मगर आयकर की सीमा बढने से नए अध्यापकों और कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी।
विनय सिंह, जिलामंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ।
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शिक्षकों के लिए काफी बेहतर बजट रहा। ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि आयकर सीमा बढ़ाकर सीधे दो गुना कर दी गई है। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों को काफी राहत मिली है।
रामकुमार सिंह, शिक्षक नेता।
फोटो
केंद्र सरकार ने आयकर की सीमा बढ़ाकर दोगुना तो कर दिया है, मगर कर्मचारियों की जो पुरानी मांग है, उस पर गौर नहीं किया गया है। कर्मचारियों के लिए आयकर की सीमा बढ़ाना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना पुरानी पेंशन है। इसलिए सरकार को इसी बजट में पुरानी पेंशन के लिए धनराशि बढ़ाना चाहिए था।
रमाशंकर तिवारी, संह संयोजक, पुरानी पेंशन बहाली मंच।
फोटो
आयकर की सीमा बढ़ाने से आम कर्मचारियों के साथ ही अफसरों को भी लाभ पहुंचेगा। सरकार का यह कदम सराहनीय है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब आयकर की सीमा बढ़ाकर पांच लाख की गई है। इससे सबसे बड़ा फायदा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलेगा। फिलहाल कर्मचारी वर्ग संतुष्ट नहीं है।
करुणेश सिंह, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद।
फोटो
आयकर की सीमा बढ़ाने से काम चलने वाला नहीं है। सरकार को पुरानी पेंशन अविलंब बहाल करनी चाहिए, जो कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ मामला है। मगर सरकार इस पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है। जिससे कर्मचारी वर्ग असंतुष्ट है।
दुर्गा प्रसाद शुक्ल, अध्यक्ष, रजिस्टार कानूनगो संघ।
फोटो
मोदी सरकार ने पहली बार किसानों की तरफ देखा है। किसानों को साल में छह हजार रुपये देने का फैसला उचित है। इससे आम किसान को खाद और पानी की समस्या से निपटने में आसानी होगी।
श्रीनाथ तिवारी, राजा का पुरवा, बोझवा।
इनसेट-------
किसानों को पेंशन की रकम देने के बजाए सिंचाई के लिए साधन मुहैया कराना चाहिए था। डीएपी खाद इतनी महंगी हो गई है कि किसान खरीदकर खेत में डालता है, मगर खेत में कुछ होता नहीं है। फिलहाल छह हजार रुपये वार्षिक मिलने से किसानी में तेजी आएगी।
रामशिरोमणि सिंह, बझान।
फोटो
किसानों को छह हजार रुपये सालाना पेंशन और गौ पालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज लेने वालों को दो प्रतिशत की छूट देने का फैसला सराहनीय है। केंद्र सरकार के इस फैसले से किसानों का हौसला बढ़ा है।
महावीर तिवारी, जयतीपुर, कटकामानापुर।
फोटो
मोदी सरकार का बजट आम लोगों के लिए भले ही राहत भरा हो, मगर महिलाओं के लिए निराशाजनक रहा। बजट में महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर लाभ पहुंचाया गया है, मगर अलग से बजट में कोई छूट नहीं दी गई है। इससे रसोई महंगी ही रहेगी।
श्रध्दा सिंह, समाजसेविका।
फोटो
महिलाओं को लुभाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आम बजट ने महिलाओं को निराश किया है। महिलाओं की रसोई जब तक सस्ती नहीं होगी, तब तक बजट का कोई मायने नहीं होता है। फिलहाल किसानों के लिए राहत भरी खबर है।
नमिता पांडेय, गृहणी।
फोटो
मोदी का बजट कर्मचारियों, व्यापारियों, अफसरों के लिए फायदेमंद है। मगर महिलाओं का ख्याल नहीं रखा गया। इस बात की पीड़ा है। फिलहाल सरकार ने किसानों का दिल जीतने का प्रयास किषया है।
श्वेता सिंह, गृहणी।