प्रतापगढ़ के उप-जिलाधिकारी विनीत कुमार निलंबित, जिलाधिकारी के कार्यालय पर दे रहे थे धरना
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प्रतापगढ़ में जिलाधिकारी आवास पर शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों के बीच करीब साढ़े चार घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। एसडीएम विनीत उपाध्याय और उनकी पत्नी आवास पर कैंप कार्यालय स्थित जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार के चैंबर में दोपहर करीब 12.30 बजे से शाम 5 बजे तक धरने पर बैठे रहे। दोनों ने प्रशासनिक अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बाद में अन्य अधिकारियों ने समझाकर धरना खत्म कराया। देर शाम शासन ने एसडीएम को निलंबित कर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया और मामले की जांच प्रयागराज मंडलायुक्त आर. रमेश कुमार को सौंप दी।
विनीत उपाध्याय 2015 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उन्हें मार्च 2019 में प्रतापगढ़ में लालगंज तहसील का एसडीएम बनाया गया था। आठ नवंबर 2019 को वकीलों के साथ विवाद में उन्होंने अपने सुरक्षागार्ड की रायफल अपने हाथ में ले लेने पर विनीत चर्चा में आ गए थे। वकीलों के भारी हंगामा करने पर तत्कालीन डीएम मार्कण्डेय शाही ने उन्हें लालगंज तहसील से हटाकर कलेक्ट्रेट में अतिरिक्त एसडीएम-2 के पद पर तैनात कर दिया था।
शासन के निर्देश पर डीएम ने एडीएम शत्रोहन वैश्य को वकीलों के साथ हुए विवाद का जांच अधिकारी बनाया था। एडीएम की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने विनीत से स्पष्टीकरण मांगा था। बताया जा रहा है कि शुक्रवार दोपहर को स्पष्टीकरण का नोटिस मिलने के बाद ही विनीत अपनी पत्नी के साथ डीएम आवास पहुंचकर धरने पर बैठे थे। उन्होंने बिना उनका पक्ष सुने एकतरफा रिपोर्ट भेजने का आरोप एडीएम शत्रोहन पर लगाया। साथ ही उन्हें भ्रष्टाचार में लिप्त बताया। विनीत ने आरोप लगाया कि लालगंज में उनसे पहले एसडीएम रहे मोहनलाल गुप्ता ने एडीएम के साथ मिलकर डेढ़ सौ से अधिक फर्जी पट्टे जारी किए थे। विनीत की रिपोर्ट पर ये पट्टे निरस्त किए गए। मोहनलाल फिलहाल एसडीएम सदर हैं। उन्होंने वर्तमान डीएम पर भी इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय कथित भ्रष्टाचारी अफसरों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
चैंबर में घुसकर धरने पर बैठ जाना अनुशासनहीनता है। नवंबर में लालगंज में हुए विवाद की जांच के बाद एडीएम की तरफ से दी गई रिपोर्ट पर नियुक्ति विभाग ने एसडीएम विनीत उपाध्याय से स्पष्टीकरण मांगा था। एडीएम ने इसकी प्रति एसडीएम को भेजी थी। इस कारण वह आपा खो बैठे और मेरे चैंबर में आकर उल्टा सीधा आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए। अगर उन्हें कोई दिक्कत थी तो सामान्य तरीके से मुझे बताना चाहिए था। अपीलीय अधिकारी होने के नाते मैं शिकायत की जांच कराता। पूरे घटनाक्रम से शासन को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. रुपेश कुमार, जिलाधिकारी, प्रतापगढ़