लूट के आरोपियों को ले जा रही जौनपुर की पुलिस पर हमला, बाद में ग्रामीणों को खबू पीटा
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हरसोस गांव से सोमवार को लूट के दो आरोपियों को ले जा रही जौनपुर जिले की क्राइम ब्रांच की टीम पर अपहरण का आरोप लगा कर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। एक सिपाही को पेड़ से बांध कर पीटा। सरकारी पिस्टल लूट ली और पुलिस की जीपों में तोड़फोड़ कर दोनों आरोपियों को छुड़ा लिया। हमले में जौनपुर क्राइम ब्रांच और जंसा व रोहनिया थाने के छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके बाद रात में पुलिस कर्मियों ने भी ग्रामीणों को खूब पीटा। महिलाओं पर भी लाठियां चलाई गईं।
सूचना पाकर जिले के 18 थानों की फोर्स, क्यूआरटी, दंगा नियंत्रण टीम और पीएसी के साथ एसएसपी, आईजी रेंज और एडीजी जोन हरसोस गांव पहुंचे तो देर रात स्थिति नियंत्रित हुई। जंसा थाने में 15 नामजद और 150 से ज्यादा अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने 38 लोगों को गिरफ्तार किया है। 17 लोग हिरासत में लिए गए हैं। एहतियातन गांव में एक सीओ, तीन थानेदार और पीएसी तैनात की गई है।
‘हमारा क्या कसूर, हमें मत मारो’
जौनपुर जिले के क्राइम ब्रांच प्रभारी विनोद कुमार बरवार के अनुसार, वह और नौ पुलिसकर्मी लूट व हत्या के प्रयास के आरोपी हरसोस गांव के राजन राजभर को गिरफ्तार करने आए थे। शाम करीब 7:30 बजे राजन के घर जौनपुर के जलालपुर थाना के काकोरी का अरविंद राजभर उर्फ दिल्ली भी मिला तो दोनों को लेकर पुलिस टीम सड़क पर आई।
इस बीच राजन और दिल्ली अपहरण का शोर मचाने लगे तो ग्रामीणों ने पुलिस को घेर कर पथराव शुरू कर दिया और राजन और दिल्ली को छुड़ा लिया। ग्रामीणों ने हेड कांस्टेबल कौशल राही को पेड़ से बांध कर पीटा। ग्रामीणों की पिटाई में दरोगा बालेंद्र यादव, कौशल राही और वेदप्रकाश राय बेहोश हो गए। सूचना पाकर पहुंचे रोहनिया इंस्पेक्टर परशुराम त्रिपाठी का सिर फोड़ दिया। दो अन्य पुलिस कर्मियों को भी पीटा। जंसा व रोहनिया थाने की सरकारी जीप भी क्षतिग्रस्त कर दी। ग्रामीणों ने पुलिस टीम से 24 हजार रुपये, सोने की चेन, मोबाइल और 9एमएम की सरकारी पिस्टल भी लूट ली।
पुलिस और पब्लिक दोनों की गलती से बिगड़ा माहौल
हरसोस गांव में पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद सोमवार की आधी रात बाद तक पुलिस ने जमकर तांडव मचाया। सरकारी पिस्टल और पुलिसकर्मियों के पैसे सहित अन्य सामान बरामद करने के लिए पुलिस ने घरों में घुस कर तोड़फोड़ की। महिलाओं की जमकर पिटाई की गई और सोये हुए लोग हिरासत में ले लिए गए। घटना के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए गांव के ज्यादातर पुरुष घर छोड़ कर भाग निकले हैं और रिश्तेदारों सहित अन्य स्थानों पर छुपे हुए हैं। मंगलवार को दिन भर गांव में सन्नाटा पसरा रहा और चट्टी-चौराहे की चाय-पान की दुकानें बंद नजर आईं।