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Pilibhit News: पीलीभीत के जंगल और वन्य जीवों के व्यवहार को समझ रहे हाथी
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माला रेंज में मौजूद हाथी। फाइल फोटो
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। कर्नाटक से लाए गए चार हाथी अब जंगल में घूमकर वहां की स्थिति को समझ रहे हैं। रोजाना करीब चार से छह घंटे महावतों की निगरानी में हाथियों को जंगल घुुमाया जा रहा है।
लंबी कवायद के बाद 8 नवंबर को कर्नाटक से चार हाथियों को पीलीभीत टाइगर रिजर्व लाया गया। हाथियों के ठहराने के लिए माला गेस्ट परिसर में ही इंतजाम किए गए। टिनशेड का आशियाना बनाया गया। कर्नाटक से हाथियों के साथ चार महावत भी आए थे। हाथियों को स्थानीय वातावरण में ढालने और पीटीआर के महावतों को प्रशिक्षण देने के लिए कर्नाटक के महावतों को यहां रोका गया।
बीस दिन रुकने के बाद चार दिन पहले महावत कर्नाटक लौट गए। इसके बाद जंगल और बाघ समेत वन्यजीवों के व्यवहार को समझने के लिए हाथियों को जंगल भ्रमण पर ले जाया जाने लगा। रोजाना अपनी निगरानी में महावत हाथियों को करीब चार से छह घंटे तक जंगल भ्रमण को ले जा रहे हैं। भ्रमण के दौरान हाथियों के सामने अब तक बाघ तो नहीं आया अलबत्ता बंदर, भालू, हिरन व अन्य जानवर जरूर आए। वन्य जीवों का व्यवहार समझने के साथ हाथी अपने प्राकृतिक भोजन को भी हासिल कर रहे हैं।
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पीपल के पत्तों के अलावा खाने को दिया जा रहा चना, सरसों का तेल
हाथियों की देखरेख महावतों के हवाले हैं। जबकि स्वास्थ्य को लेकर पीटीआर के पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार नजर रख रहे हैं। हाथियों को फिलहाल पीपल के पत्तों के अलावा चना, सरसों का तेल, चावल, गुड़ खाने को दिया जा रहा है। सुबह प्रत्येक हाथी को आधा किलो चना, 250 ग्राम सरसों का तेल, चावल और गुड़ दिया जा रहा है। गन्ने की व्यवस्था भी की गई है।
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लंबी कवायद के बाद 8 नवंबर को कर्नाटक से चार हाथियों को पीलीभीत टाइगर रिजर्व लाया गया। हाथियों के ठहराने के लिए माला गेस्ट परिसर में ही इंतजाम किए गए। टिनशेड का आशियाना बनाया गया। कर्नाटक से हाथियों के साथ चार महावत भी आए थे। हाथियों को स्थानीय वातावरण में ढालने और पीटीआर के महावतों को प्रशिक्षण देने के लिए कर्नाटक के महावतों को यहां रोका गया।
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बीस दिन रुकने के बाद चार दिन पहले महावत कर्नाटक लौट गए। इसके बाद जंगल और बाघ समेत वन्यजीवों के व्यवहार को समझने के लिए हाथियों को जंगल भ्रमण पर ले जाया जाने लगा। रोजाना अपनी निगरानी में महावत हाथियों को करीब चार से छह घंटे तक जंगल भ्रमण को ले जा रहे हैं। भ्रमण के दौरान हाथियों के सामने अब तक बाघ तो नहीं आया अलबत्ता बंदर, भालू, हिरन व अन्य जानवर जरूर आए। वन्य जीवों का व्यवहार समझने के साथ हाथी अपने प्राकृतिक भोजन को भी हासिल कर रहे हैं।
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पीपल के पत्तों के अलावा खाने को दिया जा रहा चना, सरसों का तेल
हाथियों की देखरेख महावतों के हवाले हैं। जबकि स्वास्थ्य को लेकर पीटीआर के पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार नजर रख रहे हैं। हाथियों को फिलहाल पीपल के पत्तों के अलावा चना, सरसों का तेल, चावल, गुड़ खाने को दिया जा रहा है। सुबह प्रत्येक हाथी को आधा किलो चना, 250 ग्राम सरसों का तेल, चावल और गुड़ दिया जा रहा है। गन्ने की व्यवस्था भी की गई है।