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Pilibhit News: पीलीभीत में चिह्नित होगा वेटलैंड, रामसर स्थल के रूप में मिलेगी पहचान

Mon, 27 Apr 2026 01:49 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:49 AM IST
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Wetland to be identified in Pilibhit, to be recognised as Ramsar site
पीलीभीत। पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ करने के लिए जिले में एक ऐसे वेटलैंड का चयन किया जाएगा, जिसे रामसर स्थल (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां) के रूप में पहचान दिलाई जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने वन विभाग से प्रस्ताव मांगा है और निर्धारित मानकों के आधार पर चिह्नांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और जैव-विविधता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में 16 अप्रैल को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे।
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वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 11 रामसर स्थल मौजूद हैं और अब इस सूची में पीलीभीत को भी शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश में पीलीभीत में एक उपयुक्त वेटलैंड चिह्नित करने को कहा गया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर खरा उतर सके। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक (इको विकास) एवं प्राधिकरण के सदस्य सचिव नीरज कुमार ने जोनल मुख्य संरक्षक और प्रभागीय वनाधिकारी को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
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चयन के लिए आठ प्रमुख मानक तय
नए रामसर स्थल के चयन के लिए आठ प्रमुख मानक तय किए गए हैं। इनमें जल संग्रहण, जल शुद्धिकरण और भूजल रिचार्ज की क्षमता, स्थानीय समुदाय की आजीविका से जुड़ाव, विलुप्तप्राय जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का संरक्षण, सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व, ईको-टूरिज्म की संभावनाएं, क्षेत्र की जल सुरक्षा में भूमिका, इको सेंसिटिव जोन में स्थिति और बड़े क्षेत्रफल में विस्तार जैसे बिंदु शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मानकों पर खरा उतरने वाला वेटलैंड न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

शासन से मिले हैं निर्देश : डीएफओ
डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि शासन की ओर से जनपद में रामसर स्थल विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत ऐसे वेटलैंड का चयन किया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के साथ ही जैव-विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभा सके। वहीं, प्रशासन का मानना है कि इस पहल से पीलीभीत का पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होगा तथा जिले को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। संवाद
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