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Varun Gandhi: पीलीभीत में नेताओं पर बरसे वरुण गांधी, बोले- पहले थे रोटी के लाले, आज काफिलों के साथ चल रहे

Mon, 21 Aug 2023 05:42 AM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 21 Aug 2023 05:42 AM IST
सार

सांसद ने कहा कि उनके पिता ने एक लाख करोड़ की मारुति कंपनी देश के नाम दान दे दी थी, क्या आज के नेता ऐसा कर पाएंगे। आज कोई 500 रुपये टेबल पर छोड़ने को तैयार नहीं है, एक लाख करोड़ की बात तो बहुत दूर है। 

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Varun Gandhi attack on leaders of Pilibhit said earlier they had no roti today they walking with convoys
भाजपा नेता वरुण गांधी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के पीलीभीत में दो दिवसीय दौरे पर रविवार को पहुंचे सांसद वरुण गांधी ने पूरनपुर क्षेत्र के गांवों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों को संबोधित किया। उन्होंने बिना नाम लिए कुछ क्षेत्रीय नेताओं पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, जिनके पास पहले खाने के लिए रोटी तक नहीं थी, आज वह बड़े-बड़े काफिले में चल रहे हैं।

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सांसद ने कहा कि उनके पिता ने एक लाख करोड़ की मारुति कंपनी देश के नाम दान दे दी थी, क्या आज के नेता ऐसा कर पाएंगे। आज कोई 500 रुपये टेबल पर छोड़ने को तैयार नहीं है, एक लाख करोड़ की बात तो बहुत दूर है। सांसद ने जनता से कहा, आप लोगों को अच्छे, बुरे की पहचान है, आपको यह सिखाने की जरूरत नहीं है। पीलीभीत और देश के साथ जो रिश्ता बनाया है, वह रिश्ते हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

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उन्होंने कहा, जब आप दिल्ली, जयपुर, पटना, कोलकाता, सोनीपत, मुंबई आदि शहरों में जाते हैं, तो वहां बोलते हो कि वरुण गांधी और मेनका गांधी वाले पीलीभीत से हूं, यही पूंजी हमारे लिए काफी है। उन्होंने गांव बैजूनगर, विधिपुर, इटोरिया, शिवनगर, बानगंज, ग्रांट, लालपुर, नदहा, सिसैया, पिपरिया आदि में जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित किया।

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संविदाकर्मी दूध में मक्खी की तरह
सांसद ने कहा, हमारे देश में 90 फीसदी सरकारी नौकरी संविदा पर हो रही हैं, संविदा की नौकरी असली नौकरी नहीं है। किसी आशा बहू, आंगनबाड़ी, शिक्षामित्र या किसी अन्य संविदा कर्मचारी से पूछो तो वे कहते हैं कि जब उनसे काम लेना होता है तो काफी काम लेते हैं, लेकिन जब उनको निकालना होता है तो दूध में मक्खी कि तरह निकलकर फेंक देते हैं। न कोई सुरक्षा है न भविष्य। आपको ऐसे लोग राजनीति में चाहिए जो आपके लिए आपके हक की लड़ाई लड़ सकें, सच्चाई बोल सकें, अगर हर आदमी मीठी-मीठी बात करेगा, तो देश कैसे खड़ा होगा।

ऋण प्रणाली पर उठाए सवाल
सांसद ने ऋण प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज ऋण की जरूरत जितनी गरीबों को है, उतनी उद्योगपतियों को नहीं है, लेकिन उद्योगपतियों को आसानी से लोन मिल जाता है। अगर कोई उद्योगपति लोन नहीं चुका पाता है, तो उनसे सिर्फ मूलधन जमा करने को कह दिया जाता है, लेकिन अगर कोई गरीब लोन नहीं चुका पाता है तो उनके घर की कुर्की करने की तैयारी शुरू कर दी जाती है।

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