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अब जंगल से सटे गांवों में भी ठहर सकेंगे बाहर से आए सैलानी
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माधोटांडा/ पीलीभीत। टाइगर रिजर्व मेें पर्यटन सत्र के दौरान आने वाले सैलानी चूका बीच की हटों के अलावा जंगल क्षेत्र से सटे इलाकों में भी ठहर सकेंगे। होम स्टे योजना के तहत बने आवास और हटों में सैलानियों के ठहरने की व्यवस्था पिछले साल ही शुरू की गई थी। अब पीटीआर ने इसे और विस्तार देने के प्रयास शुरू किए हैं।
टाइगर रिजर्व का सातवां पर्यटन सत्र एक नवंबर से शुरू हो रहा है। इसके मद्देनजर चूका बीच के अलावा पर्यटन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम तेजी से चल रहा है। पर्यटन सत्र के दौरान दूर दराज से आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए वैसे तो महोफ रेंज स्थित इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच में कई तरह की हट और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं, मगर सैलानियों की मांग को देखते हुए उनके जंगल से बाहर भी ठहरने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए टाइगर रिजर्व और जिला प्रशासन तेजी से काम में जुटा है। सैलानियों को जंगल से सटे बाहरी क्षेत्रों में प्रवास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गत वर्ष ही होम स्टे योजना की शुरूआत की गई थी।
पिछले सत्र में अर्थ होम समेत तीन स्थान पर थी सुविधा
पिछले सत्र में पीटीआर प्रशासन ने होम स्टे योजना की शुरूआत की थी। उसमें मैनाकोट गांव निवासी साहब सिंह और महताब सिंह के मकानों के अलावा बराही क्षेत्र में अर्थ होम नाम से यह योजना शुरू की गई थी। इन स्थानों पर सैलानियों के ठहरने के लिए रूम को पूरी तरह से व्यवस्थित किया गया था। अर्थ होम बकायदा जंगल की थीम पर बना है। यहां चूका बीच की तरह ही हटें बनी हुई है। सैलानियों के खानपान की सुविधा भी उपलब्ध है। इन स्थानों पर रात में ठहरने का चार्ज भी पीटीआर द्वारा निर्धारित किया गया है।
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चिह्नित किए गए गांव
टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा इस सत्र के सैलानियों को स्टे होम की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टाइगर रिजर्व के आसपास 13 गांवों को चिह्नित किया गया है। इन गांवों में मथना, रानीगंज, मैनाकोट, पिपरिया संतोष, मल्लपुर, फुलहर, कटकवारा, रमनगरा, माला कालोनी, कंजा हरैया, गजरौलाकलां, वनकटी और महोफ शामिल है। टाइगर रिजर्व द्वारा इन क्षेत्रों में स्टे होम के लिए अपने भवन किराए पर देने के इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने और जंगल क्षेत्र के आसपास के लोगों को रोजगार दिलाने के लिए होम स्टे योजना की शुरूआत की गई है। वहां सैलानियों के ठहरने साथ खानपान की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। तीन स्थानों पर स्टे होम संचालित है। उसे विस्तार देने के प्रयास चल रहे हैं।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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टाइगर रिजर्व का सातवां पर्यटन सत्र एक नवंबर से शुरू हो रहा है। इसके मद्देनजर चूका बीच के अलावा पर्यटन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम तेजी से चल रहा है। पर्यटन सत्र के दौरान दूर दराज से आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए वैसे तो महोफ रेंज स्थित इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच में कई तरह की हट और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं, मगर सैलानियों की मांग को देखते हुए उनके जंगल से बाहर भी ठहरने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए टाइगर रिजर्व और जिला प्रशासन तेजी से काम में जुटा है। सैलानियों को जंगल से सटे बाहरी क्षेत्रों में प्रवास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गत वर्ष ही होम स्टे योजना की शुरूआत की गई थी।
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पिछले सत्र में अर्थ होम समेत तीन स्थान पर थी सुविधा
पिछले सत्र में पीटीआर प्रशासन ने होम स्टे योजना की शुरूआत की थी। उसमें मैनाकोट गांव निवासी साहब सिंह और महताब सिंह के मकानों के अलावा बराही क्षेत्र में अर्थ होम नाम से यह योजना शुरू की गई थी। इन स्थानों पर सैलानियों के ठहरने के लिए रूम को पूरी तरह से व्यवस्थित किया गया था। अर्थ होम बकायदा जंगल की थीम पर बना है। यहां चूका बीच की तरह ही हटें बनी हुई है। सैलानियों के खानपान की सुविधा भी उपलब्ध है। इन स्थानों पर रात में ठहरने का चार्ज भी पीटीआर द्वारा निर्धारित किया गया है।
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चिह्नित किए गए गांव
टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा इस सत्र के सैलानियों को स्टे होम की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टाइगर रिजर्व के आसपास 13 गांवों को चिह्नित किया गया है। इन गांवों में मथना, रानीगंज, मैनाकोट, पिपरिया संतोष, मल्लपुर, फुलहर, कटकवारा, रमनगरा, माला कालोनी, कंजा हरैया, गजरौलाकलां, वनकटी और महोफ शामिल है। टाइगर रिजर्व द्वारा इन क्षेत्रों में स्टे होम के लिए अपने भवन किराए पर देने के इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने और जंगल क्षेत्र के आसपास के लोगों को रोजगार दिलाने के लिए होम स्टे योजना की शुरूआत की गई है। वहां सैलानियों के ठहरने साथ खानपान की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। तीन स्थानों पर स्टे होम संचालित है। उसे विस्तार देने के प्रयास चल रहे हैं।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व