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मानवता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म
Updated Thu, 17 Mar 2016 11:29 PM IST
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प्रवचन।
- फोटो : pilibhit, beureu
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गुरुद्वारा गुुरु कलगीधर सिंह सभा में दो दिवसीय गुरमत समागम का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। इस मौके पर सजे दीवान मेें संगत ने माथा टेका। पंजाब से आए बाबा लखवीर सिंह ने गुरु महिमा का बखान किया।
कस्बे के क्रीड़ा मैदान में स्थित गुरुद्वारा गुरु कलगीधर सिंह सभा में बुधवार को शुरू हुए रुहानी गुरुमत समागम के अंतिम दिन चंडीगढ़ (पंजाब) से आए संत बाबा लखवीर सिंह ने गुरुवाणी का बखान कर सिक्ख संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि अमृतपान कर गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़कर गुरु के बताए मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। धर्म अनेक है पर मार्ग एक ही है भगवान भी एक ही है। कहा कि संगत को अपना गुरु बनाना ही चाहिए, जिससे सत्य मार्ग पर चलन कर ही मानव जीवन से पार पाया जा सकता। सतसंग में सुबह से ही चाय बूंदी लगातार सेवा जारी रही समापन में गुरुद्वारा गुरु कलगीधर सिंह सभा गुरु के लंगर की अटूट् सेवा देर शाम तक चलती रही। सतसंग में कसबे के अलावा खटीमा, नानकमता, अमरिया, पीलीभीत, पूरनपुर, की भारी संख्या में संगम पहुंचकर दीवान पर माथा टेका।
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कस्बे के क्रीड़ा मैदान में स्थित गुरुद्वारा गुरु कलगीधर सिंह सभा में बुधवार को शुरू हुए रुहानी गुरुमत समागम के अंतिम दिन चंडीगढ़ (पंजाब) से आए संत बाबा लखवीर सिंह ने गुरुवाणी का बखान कर सिक्ख संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि अमृतपान कर गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़कर गुरु के बताए मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। धर्म अनेक है पर मार्ग एक ही है भगवान भी एक ही है। कहा कि संगत को अपना गुरु बनाना ही चाहिए, जिससे सत्य मार्ग पर चलन कर ही मानव जीवन से पार पाया जा सकता। सतसंग में सुबह से ही चाय बूंदी लगातार सेवा जारी रही समापन में गुरुद्वारा गुरु कलगीधर सिंह सभा गुरु के लंगर की अटूट् सेवा देर शाम तक चलती रही। सतसंग में कसबे के अलावा खटीमा, नानकमता, अमरिया, पीलीभीत, पूरनपुर, की भारी संख्या में संगम पहुंचकर दीवान पर माथा टेका।
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