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खुद को बचाने के लिए अपराधियों से जमकर जूझी छात्रा, शरीर में थीं आठ चोटें
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पीलीभीत। मौका-ए-वारदात के हालात तो ऐसे ही लग रहे हैं कि छात्रा ने खुद को बचाने के लिए अपराधियों से संघर्ष किया। इसी संघर्ष में उसके शरीर पर चोटों के आठ निशान सामने आए हैं। इससे यही जाहिर होता है कि अपराधियों के आगे छात्रा ने हार नहीं मानी। अपराध का विरोध करते हुए उसने शोर जरूर मचाया है लेकिन पकड़े जाने के भय में अपराधियों ने उसकी चीख दबाने के लिए उसके मुंह पर कपड़ा ठूंस दिया। शव जब मिला तो मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और गले से लेकर गाल और नाक तक में चोट थी। मुंह से खून निकल रहा था।
छात्रा के पिता ने बताया कि छात्रा के शरीर पर आठ चोटें आईं थीं। दरिंदगी के निशान तो उन्होंने आंखों से देखे हैं लेकिन हैरत इस बात की थी अधिकारी देखकर भी इस बात के लिए तत्काल तैयार न हुए थे। दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने की रिपोर्ट दर्ज की जाए। पिता के मुताबिक एक घंटे तक यही कहा जाता रहा कि हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराएं जब वे नहीं माने तब पुलिस उनकी लिखी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए राजी हुई। पिता ने बताया कि उससे पुलिस अधिकारी ने यह भी पूछा कि वह कैसे कह सकते हैं कि दुष्कर्म हुआ? इस पर उन्होंने कहा कि जब उसने प्राइवेट पार्ट से खून आते देखा तो फिर शक करने की गुंजाइश ही कहां बची। इसके बाद अधिकारी ने कहा कि आपको न्याय मिलेगा। भरोसा रखें। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अधिकारियों ने पीड़िता के पिता को अवगत कराया गया है।
घटनाक्रम से जुड़ी अहम बातें
1- सुबह 6:45 बजे छात्रा अपनी साइकिल से अकेले कोचिंग के लिए बरखेड़ा के लिए रवाना हुई।
2- सुबह सात बजे तक कोचिंग में पहुंचना था। सात बजे से आठ बजे तक बॉयोलॉजी का टेस्ट था। इसके बाद इंग्लिश की कोचिंग थी। छात्रा नहीं पहुंची।
3- मां से साढ़े नौ बजे तक लौटने की बात कही थी। लेकिन आई नहीं। तब मां ने सोचा छात्रा स्कूल चली गई होगी। सुबह नौ से अपराह्न तीन बजे तक स्कूल फिर तीन से पांच बजे तक कोचिंग के बाद लौट आएगी।
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4- मां की चिंता तब बढ़ी जब शाम पांच बजे तक छात्रा नहीं आई। तब तक पिता भी घर आ गए। पिता ने 5.25 बजे बजे बॉयोलॉजी शिक्षक को फोन किया तो पता लगा कि कोचिंग में नहीं पहुंची थी।
5- पिता ने स्कूल के शिक्षकों और छात्रा की सहेलियों को भी फोन किया। कहीं कोई जानकारी नहीं मिली तो करीब छह बजे बरखेड़ा थाने पहुंचे। पुलिस ने तीन घंटे बाद नौ बजे पहली रिपोर्ट दर्ज की।
6- पहली रिपोर्ट गांव के ही एक किशोर के खिलाफ दर्ज की गई। जिस पर डेढ़ पहले छात्रा पर डोरे डालने का आरोप था। आरोप था कि किशोर उससे बेवजह बात करता है।
7- पुलिस ने किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और परिजन को यह कहते ही घर भेज दिया कि आप तलाशिए, हम भी तलाशेंगे। लेकिन कोई तलाश नहीं की।
8- परिजन चिंता में थे और रात में अपने स्तर से ही छात्रा की तलाश की। घर से 500 मीटर दूर रात 11 बजे रात में छात्रा का शव मिला।
9- शव की हालत देखकर परिजन दहल गए। मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। प्राइवेट पार्ट और मुंह से खून निकल रहा था। शरीर पर चोट के निशान थे।
10- वारदात स्थल के करीब पर बीयर की चार खाली बोतलें, नमकीन के खाली पैकेट, अधजली सिगरेट के टुकड़े, छात्रा की साइकिल, स्कूली बैग, किताबें बरामद हुईं।
11- छात्रा के पिता की सूचना पर रात 11.30 बजे पुलिस पहुंची और लाश को मौके से उठाकर ले गई। जब पुलिस लाश लेकर गई तब पिता, बेटा और भाई परिजन को बुलाने घर आए थे।
12- परिजन पहुंचे तो मौके लाश नहीं मिली। लाश को अचानक ले जाने पर आक्रोश फैला। पुलिस से परिवार वालों ने रोष जताया।
13- करीब रात 12 बजे परिजन थाने पहुंचे। पुलिस ने इस बात का दबाव बनाया कि तहरीर में दुष्कर्म का उल्लेख न किया जाए लेकिन परिजन नहीं माने। पुलिस की जीडी रुकी रही और एक घंटे जद्दोजेहद के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की।
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छात्रा के पिता ने बताया कि छात्रा के शरीर पर आठ चोटें आईं थीं। दरिंदगी के निशान तो उन्होंने आंखों से देखे हैं लेकिन हैरत इस बात की थी अधिकारी देखकर भी इस बात के लिए तत्काल तैयार न हुए थे। दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने की रिपोर्ट दर्ज की जाए। पिता के मुताबिक एक घंटे तक यही कहा जाता रहा कि हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराएं जब वे नहीं माने तब पुलिस उनकी लिखी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने के लिए राजी हुई। पिता ने बताया कि उससे पुलिस अधिकारी ने यह भी पूछा कि वह कैसे कह सकते हैं कि दुष्कर्म हुआ? इस पर उन्होंने कहा कि जब उसने प्राइवेट पार्ट से खून आते देखा तो फिर शक करने की गुंजाइश ही कहां बची। इसके बाद अधिकारी ने कहा कि आपको न्याय मिलेगा। भरोसा रखें। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अधिकारियों ने पीड़िता के पिता को अवगत कराया गया है।
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घटनाक्रम से जुड़ी अहम बातें
1- सुबह 6:45 बजे छात्रा अपनी साइकिल से अकेले कोचिंग के लिए बरखेड़ा के लिए रवाना हुई।
2- सुबह सात बजे तक कोचिंग में पहुंचना था। सात बजे से आठ बजे तक बॉयोलॉजी का टेस्ट था। इसके बाद इंग्लिश की कोचिंग थी। छात्रा नहीं पहुंची।
3- मां से साढ़े नौ बजे तक लौटने की बात कही थी। लेकिन आई नहीं। तब मां ने सोचा छात्रा स्कूल चली गई होगी। सुबह नौ से अपराह्न तीन बजे तक स्कूल फिर तीन से पांच बजे तक कोचिंग के बाद लौट आएगी।
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4- मां की चिंता तब बढ़ी जब शाम पांच बजे तक छात्रा नहीं आई। तब तक पिता भी घर आ गए। पिता ने 5.25 बजे बजे बॉयोलॉजी शिक्षक को फोन किया तो पता लगा कि कोचिंग में नहीं पहुंची थी।
5- पिता ने स्कूल के शिक्षकों और छात्रा की सहेलियों को भी फोन किया। कहीं कोई जानकारी नहीं मिली तो करीब छह बजे बरखेड़ा थाने पहुंचे। पुलिस ने तीन घंटे बाद नौ बजे पहली रिपोर्ट दर्ज की।
6- पहली रिपोर्ट गांव के ही एक किशोर के खिलाफ दर्ज की गई। जिस पर डेढ़ पहले छात्रा पर डोरे डालने का आरोप था। आरोप था कि किशोर उससे बेवजह बात करता है।
7- पुलिस ने किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और परिजन को यह कहते ही घर भेज दिया कि आप तलाशिए, हम भी तलाशेंगे। लेकिन कोई तलाश नहीं की।
8- परिजन चिंता में थे और रात में अपने स्तर से ही छात्रा की तलाश की। घर से 500 मीटर दूर रात 11 बजे रात में छात्रा का शव मिला।
9- शव की हालत देखकर परिजन दहल गए। मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। प्राइवेट पार्ट और मुंह से खून निकल रहा था। शरीर पर चोट के निशान थे।
10- वारदात स्थल के करीब पर बीयर की चार खाली बोतलें, नमकीन के खाली पैकेट, अधजली सिगरेट के टुकड़े, छात्रा की साइकिल, स्कूली बैग, किताबें बरामद हुईं।
11- छात्रा के पिता की सूचना पर रात 11.30 बजे पुलिस पहुंची और लाश को मौके से उठाकर ले गई। जब पुलिस लाश लेकर गई तब पिता, बेटा और भाई परिजन को बुलाने घर आए थे।
12- परिजन पहुंचे तो मौके लाश नहीं मिली। लाश को अचानक ले जाने पर आक्रोश फैला। पुलिस से परिवार वालों ने रोष जताया।
13- करीब रात 12 बजे परिजन थाने पहुंचे। पुलिस ने इस बात का दबाव बनाया कि तहरीर में दुष्कर्म का उल्लेख न किया जाए लेकिन परिजन नहीं माने। पुलिस की जीडी रुकी रही और एक घंटे जद्दोजेहद के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की।