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Pilibhit News: रेडियो कॉलर आईडी लगाकर पीटीआर में छोड़ी गई बाघिन

Mon, 01 Jan 2024 01:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jan 2024 01:00 AM IST
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Tigress released in PTR after installing radio caller ID
पिंजरे से बाहर निकलकर दौड़ लगाती बा​घिन । स्रोत - पीटीआर
कलीनगर। अटकोना गांव से पकड़ी गई बाघिन को छठवें दिन पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल में छोड़ दिया गया। बाघिन के गले में कॉलर आईडी भी लगाई गई है। अब पीटीआर की एक टीम बाघिन पर नियमित नजर भी रखेगी। कतर्नियाघाट घाट और पीटीआर के पशु चिकित्सक की मौजूदगी में बाघिन के स्वास्थ्य की जांच के बाद ही उसे छोड़ा गया।
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कलीनगर क्षेत्र के गांव अटकोना में 26 दिसंबर को किसान सुखविंदर सिंह के घर से बाघिन को पकड़ा गया था। बाघिन के शांत स्वभाव को देख विशेषज्ञों ने उसका स्वास्थ्य खराब होने की आशंका जताई थी। इसके बाद बाघिन के खून के नमूने आईवीआरआई भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में बाघिन को कोई बीमारी नहीं निकली।
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मामला सुर्खियों में आने के बाद एनटीसीए के डीआईजी ने भी बाघिन को आकर देखा और उसे स्वस्थ पाया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद दो दिन तक टीम ने बाघिन के स्वभाव की निगरानी की। इसके बाद बाघिन को निगरानी में रखने का फैसला लिया गया। कतर्नियाघाट के चिकित्सक डॉ. दीपक को पीटीआर भेजा गया। माला गेस्ट हाउस में बाघिन को बेहोश कर उसके गले में कॉलर आईडी लगाई गई। इसके बाद रविवार दोपहर को डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल की मौजूदगी में पीटीआर के जंगल में बाघिन को छोड़ दिया गया।
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ऐसे काम करता है रेडियो कॉलर
रेडियो कॉलर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो बाघ की गर्दन में बांधी जाती है। इसमें लगे ट्रांसमीटर के जरिए सिग्नल का आदान-प्रदान होता है। सिग्नल से जगह की जानकारी होती रहती है। इससे कई किलोमीटर तक वन्य जीव की लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। इनमें वीएचएफ, जीपीएस, सैटेलाइट कॉलर्स शामिल हैं। रेडियो कॉलर आमतौर पर नायलॉन या चमड़े से बनाया जाता है, जो काफी मजबूत होता है। इससे टाइगर की गर्दन को नुकसान भी नहीं पहुंचता।

चांदूपुर से पकड़े गए बाघ में भी लगाया लगाया था रेडियो कॉलर

ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर पीटीआर के जंगल में छोड़ा गया हो, हालांकि 2019 में लगातार इंसानों पर हमलावर हो रहे एक बाघ को कलीनगर के गांव चांदूपुर से बेहोश कर पकड़ा गया था। अफसर के निर्देश के बाद बाघ को कॉलर आईडी लगाकर दुधवा के जंगल में छोड़ा गया था। हालांकि कुछ समय बाद बाघ की लोकेशन न मिलने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में अटकोना गांव से पकड़ी गई बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर छोड़ने के बाद उसकी नियमित निगरानी पीटीआर प्रशासन के लिए चुनौती बनी रहेगी।


देहरादून के विशेषज्ञों ने लगाई रेडियो कॉलर आईडी



बाघिन को छोड़ने से पूर्व भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून से टाइगर सैल के डॉ. के रमेश, शशांक सावन और सुप्रतीम दत्ता रिसर्च सहायक द्वारा बाघिन के गले में रेडियो कॉलर आईडी को लगाया गया। इसके बाद टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इस दौरान डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल, डीएफओ राकेश कुमार सिंह समेत कई अफसर मौजूद रहे।


बाघिन के स्वास्थ्य की जांच कर आला अफसरों के निर्देश पर कॉलर आईडी लगाई गई है। उसे पीटीआर के कोर जोन के क्षेत्र में छोड़ दिया गया। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर
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