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वन अफसरों की लापरवाही से मरी बाघिन
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पीलीभीत। दियोरिया रेंज से सटे ग्राम मटहेना कॉलोनी नंबर चार की सीमा में नौ ग्रामीणों को हमला कर घायल करने वाली बाघिन गुस्साई भीड़ का शिकार हो गई। घायल बाघिन करीब 10 घंटे तक तड़पती रही, लेकिन उसे इलाज नहीं मिल पाया। मौके पर मौजूद अफसर रेस्क्यू करने के बजाए बाघिन से दूरी बनाए खड़े रहे। नतीजतन बुरी तरह घायल बाघिन ने दम तोड़ दिया। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर समय रहते बाघिन का उपचार कराया जाता तो शायद उसकी जिंदगी बच जाती।
टाइगर रिजर्व में मानव वन्यजीवों संघर्ष की घटनाएं लंबे समय से जारी है। इसकी रोकथाम के लिए अफसर ग्रामीणों से तालमेल बढ़ाने का दावा भी करते आ रहे हैं। वहीं जंगल से बाहर निकल रहे बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी तमाम दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन हकीकत में स्थिति सुधरती नहीं दिखाई दे रही है। यही वजह है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति जारी है। बुधवार को दियोरिया रेंज से ग्राम मटहेना कॉलोनी नंबर चार निवासी श्याम मोहन और विजयपाल पर बाघिन के हमले के बाद उग्र हुए ग्रामीणों ने जिस तरह घेराबंदी कर बाघिन पर प्रहार किए उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कई दिन पूर्व से ग्रामीण गुस्से को पाले हुए थे। लाठी-डंडे और धारदार हथियारों के प्रहार से गंभीर घायल हुई बाघिन को बचाने के लिए पहुंचे वन अफसर भी मूक दर्शक बने रहे। जहां ग्रामीण बाघिन को पकड़कर दूसरी जगह छोड़ने की मांग करते हुए उग्र हो रहे थे, वहीं वन अफसर रेस्क्यू करने के बजाए बाघिन से दूरी बनाए खड़े रहे। संघर्ष के दस घंटे के बाद आखिरकार उपचार के अभाव में बाघिन ने दम तोड़ दिया।
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टाइगर रिजर्व में मानव वन्यजीवों संघर्ष की घटनाएं लंबे समय से जारी है। इसकी रोकथाम के लिए अफसर ग्रामीणों से तालमेल बढ़ाने का दावा भी करते आ रहे हैं। वहीं जंगल से बाहर निकल रहे बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी तमाम दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन हकीकत में स्थिति सुधरती नहीं दिखाई दे रही है। यही वजह है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति जारी है। बुधवार को दियोरिया रेंज से ग्राम मटहेना कॉलोनी नंबर चार निवासी श्याम मोहन और विजयपाल पर बाघिन के हमले के बाद उग्र हुए ग्रामीणों ने जिस तरह घेराबंदी कर बाघिन पर प्रहार किए उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कई दिन पूर्व से ग्रामीण गुस्से को पाले हुए थे। लाठी-डंडे और धारदार हथियारों के प्रहार से गंभीर घायल हुई बाघिन को बचाने के लिए पहुंचे वन अफसर भी मूक दर्शक बने रहे। जहां ग्रामीण बाघिन को पकड़कर दूसरी जगह छोड़ने की मांग करते हुए उग्र हो रहे थे, वहीं वन अफसर रेस्क्यू करने के बजाए बाघिन से दूरी बनाए खड़े रहे। संघर्ष के दस घंटे के बाद आखिरकार उपचार के अभाव में बाघिन ने दम तोड़ दिया।
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