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Pilibhit News: पुलिस अभिरक्षा से बंदी के भागने के मामले में तीन पुलिसकर्मी दोषमुक्त
Sun, 26 Jan 2025 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 26 Jan 2025 12:15 AM IST
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पीलीभीत। दस वर्ष पूर्व पुलिस अभिरक्षा से अभियुक्त के भागने के मामले में आरोप सिद्ध न होने पर तीन पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त कर दिया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा गुप्ता ने फैसला सुनाया।
28 अप्रैल 2015 को फर्रुखाबाद निवासी कांस्टेबल राम भरोसे लाल, बदायूं निवासी हबीबुल रहमान व रामपुर के रहने वाले कांस्टेबल हरीश कुमार बंदी कुलदीप सिंह व राजवीर सिंह उर्फ राजा निवासी बरादनुवा थाना अमरिया को एक मुकदमे में पेशी के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट खटीमा के न्यायालय ले गए थे। लौटते समय विकास भवन के सामने कुलदीप सिंह ने पेट में दर्द होने की बात कहकर शौच जाने की बात कही।
मौका देखकर उसने दौड़ लगा दी। राजवीर भी भाग खड़ा हुआ। पुलिसकर्मियों ने दौड़ाकर कुलदीप को तो पकड़ लिया मगर राजवीर सिंह उर्फ राजा अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गया। तत्कालीन प्रतिसार निरीक्षक पीलीभीत ओमपाल ने 28 अप्रैल 2015 को ही थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए गए।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कई गवाह न्यायालय में पेश किए गए। न्यायालय ने सुनवाई करने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद रामभरोसे लाल, हबीबुल रहमान व हरीश कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध न होने के कारण दोष मुक्त करार किया।
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28 अप्रैल 2015 को फर्रुखाबाद निवासी कांस्टेबल राम भरोसे लाल, बदायूं निवासी हबीबुल रहमान व रामपुर के रहने वाले कांस्टेबल हरीश कुमार बंदी कुलदीप सिंह व राजवीर सिंह उर्फ राजा निवासी बरादनुवा थाना अमरिया को एक मुकदमे में पेशी के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट खटीमा के न्यायालय ले गए थे। लौटते समय विकास भवन के सामने कुलदीप सिंह ने पेट में दर्द होने की बात कहकर शौच जाने की बात कही।
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मौका देखकर उसने दौड़ लगा दी। राजवीर भी भाग खड़ा हुआ। पुलिसकर्मियों ने दौड़ाकर कुलदीप को तो पकड़ लिया मगर राजवीर सिंह उर्फ राजा अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गया। तत्कालीन प्रतिसार निरीक्षक पीलीभीत ओमपाल ने 28 अप्रैल 2015 को ही थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए गए।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कई गवाह न्यायालय में पेश किए गए। न्यायालय ने सुनवाई करने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद रामभरोसे लाल, हबीबुल रहमान व हरीश कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध न होने के कारण दोष मुक्त करार किया।