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Pilibhit News: मेडिकल काॅलेज में व्यवस्था चरमराई
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जिला महिला चिकित्सालय का बंद किया गया गेट । संवाद
स्टाफ की कमी, कभी पुरुष तो कभी महिला अस्पताल में बंट रही दवा
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं एक-दो दिन पटरी पर आती हैं, इसके बाद फिर वही पुराना हाल हो जाता है। जिला अस्पताल जब से मेडिकल कॉलेज बना है तब से मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में पर्चे बनवाने से लेकर दवा लेने तक लाइन लगानी पड़ रही है।
यहां बता दें कि पहले यहां 1000-1200 की ओपीडी हुआ करती थी वहीं अब 1500-2000 मरीज जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे हैं। मरीजों की भीड़ को देखते हुए हाल ही में दवा के लिए महिला मरीजों को महिला अस्पताल में भेजा जा रहा था, लेकिन वहां एक ही फार्मासिस्ट है। ऐसे में कभी पुरुष तो कभी महिला अस्पताल में दवा बंट रही है।
मेडिकल कालेज में रोजाना करीब 1500 नए पर्चे बन रहे हैं। जबकि दो-तीन सौ मरीज पुराने आ रहे हैं। मरीजाें को दवा देने के लिए दो खिड़कियां थी। इनमें एक पुरुष व एक महिला के लिए थी। लंबी लाइन को देखते हुए पांच दिन पहले महिला मरीजों के लिए महिला अस्पताल में दवा की व्यवस्था की गई।
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वहां तीन-चार दिन महिलाओं को दवा मिली लेकिन फिर लाइन पुरुष अस्पताल में ही लगने लगी। मंगलवार को पुरुष अस्पताल में महिलाओं को दवा लेनी पड़ी तो बुधवार को महिला अस्पताल में जैसे-तैसे स्टाफ को लगाकर दवा बांटी गई।
छानबीन करने पर पता चला कि महिला अस्पताल की तरफ दवा वाली खिड़की पर महज एक फार्मासिस्ट क्षितिज शुक्ला की तैनाती है। इसके अलावा ट्रेनिंग करने वाले मेडिकल के छात्र रहते हैं। फार्मासिस्ट के पास इंजेक्शन कक्ष का भी चार्ज है।
महिला अस्पताल में इंजेक्शन लगाने का जिम्मा भी उन्हीं का है। ऐसे में जब वह इंजेक्शन कक्ष में चले जाते हैं तब दवा वितरण की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है, तब पुरुष अस्पताल में ही महिलाओं को दवा लेनी पड़ती है। इधर, फार्मासिस्ट ने भी किसी एक जगह पर ड्यूटी करने के लिए प्रभारी प्राचार्य को पत्र लिखा है।
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लाइन में बैठ-बैठकर ही आगे बढ़ते हैं मरीज
मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा लंबी लाइन फिजिशियन कक्ष के बाहर लगती है। रोजाना करीब तीन सौ से ज्यादा मरीज अकेले फिजिशियन कक्ष में पहुंचते हैं। एकमात्र फिजिशियन होने के कारण सबसे ज्यादा लंबी लाइन यहां लगती है। मरीज जब लाइन में खड़ेॉ-खड़े थक जाते हैं तब बैठ जाते हैं और बैठ-बैठकर ही आगे बढ़ने लगते हैं।
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महिला अस्पताल का गेट भी बंद
हालांकि अब महिला व पुरुष दोनों ही अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन हैं। पिछले दो-तीन दिन से महिला अस्पताल का गेट भी बंद कर दिया गया है। इसे पीछे की तरफ शिफ्ट करने की तैयारी है। महिला अस्पताल आने वाले मरीज भी फिलहाल मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट से आ रहे हैं। हालांकि इनके लिए दूसरा भी रास्ता है। जहां से सिर्फ गाड़ी आ-जा सकती है।
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स्टाॅफ की कमी के कारण एक-दो दिन हो सकता है दवा न बंटी हो। महिला अस्पताल परिसर में ही दवा बांटी जा रही है। समस्याओं का समाधान करने की पूरी कोशिश है।
- डाॅ. राजेश, प्रभारी सीएमएस, महिला अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं एक-दो दिन पटरी पर आती हैं, इसके बाद फिर वही पुराना हाल हो जाता है। जिला अस्पताल जब से मेडिकल कॉलेज बना है तब से मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में पर्चे बनवाने से लेकर दवा लेने तक लाइन लगानी पड़ रही है।
यहां बता दें कि पहले यहां 1000-1200 की ओपीडी हुआ करती थी वहीं अब 1500-2000 मरीज जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे हैं। मरीजों की भीड़ को देखते हुए हाल ही में दवा के लिए महिला मरीजों को महिला अस्पताल में भेजा जा रहा था, लेकिन वहां एक ही फार्मासिस्ट है। ऐसे में कभी पुरुष तो कभी महिला अस्पताल में दवा बंट रही है।
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मेडिकल कालेज में रोजाना करीब 1500 नए पर्चे बन रहे हैं। जबकि दो-तीन सौ मरीज पुराने आ रहे हैं। मरीजाें को दवा देने के लिए दो खिड़कियां थी। इनमें एक पुरुष व एक महिला के लिए थी। लंबी लाइन को देखते हुए पांच दिन पहले महिला मरीजों के लिए महिला अस्पताल में दवा की व्यवस्था की गई।
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वहां तीन-चार दिन महिलाओं को दवा मिली लेकिन फिर लाइन पुरुष अस्पताल में ही लगने लगी। मंगलवार को पुरुष अस्पताल में महिलाओं को दवा लेनी पड़ी तो बुधवार को महिला अस्पताल में जैसे-तैसे स्टाफ को लगाकर दवा बांटी गई।
छानबीन करने पर पता चला कि महिला अस्पताल की तरफ दवा वाली खिड़की पर महज एक फार्मासिस्ट क्षितिज शुक्ला की तैनाती है। इसके अलावा ट्रेनिंग करने वाले मेडिकल के छात्र रहते हैं। फार्मासिस्ट के पास इंजेक्शन कक्ष का भी चार्ज है।
महिला अस्पताल में इंजेक्शन लगाने का जिम्मा भी उन्हीं का है। ऐसे में जब वह इंजेक्शन कक्ष में चले जाते हैं तब दवा वितरण की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है, तब पुरुष अस्पताल में ही महिलाओं को दवा लेनी पड़ती है। इधर, फार्मासिस्ट ने भी किसी एक जगह पर ड्यूटी करने के लिए प्रभारी प्राचार्य को पत्र लिखा है।
लाइन में बैठ-बैठकर ही आगे बढ़ते हैं मरीज
मेडिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा लंबी लाइन फिजिशियन कक्ष के बाहर लगती है। रोजाना करीब तीन सौ से ज्यादा मरीज अकेले फिजिशियन कक्ष में पहुंचते हैं। एकमात्र फिजिशियन होने के कारण सबसे ज्यादा लंबी लाइन यहां लगती है। मरीज जब लाइन में खड़ेॉ-खड़े थक जाते हैं तब बैठ जाते हैं और बैठ-बैठकर ही आगे बढ़ने लगते हैं।
महिला अस्पताल का गेट भी बंद
हालांकि अब महिला व पुरुष दोनों ही अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन हैं। पिछले दो-तीन दिन से महिला अस्पताल का गेट भी बंद कर दिया गया है। इसे पीछे की तरफ शिफ्ट करने की तैयारी है। महिला अस्पताल आने वाले मरीज भी फिलहाल मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट से आ रहे हैं। हालांकि इनके लिए दूसरा भी रास्ता है। जहां से सिर्फ गाड़ी आ-जा सकती है।
स्टाॅफ की कमी के कारण एक-दो दिन हो सकता है दवा न बंटी हो। महिला अस्पताल परिसर में ही दवा बांटी जा रही है। समस्याओं का समाधान करने की पूरी कोशिश है।
- डाॅ. राजेश, प्रभारी सीएमएस, महिला अस्पताल

जिला महिला चिकित्सालय का बंद किया गया गेट । संवाद

जिला महिला चिकित्सालय का बंद किया गया गेट । संवाद