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Pilibhit News: तराई में प्राकृतिक खेती की उपज की दिल्ली तक धमक

Sat, 27 Jul 2024 02:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2024 02:22 AM IST
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The produce of natural farming in Terai region reaches Delhi
कलीनगर के रमनगरा क्षेत्र में उगाई गई प्राकृतिक खेती से सब्जियां। स्रोत:किसान
पीलीभीत। शारदा डैम की तलहटी में बसे लोगों की प्राकृतिक खेती के प्रति रुचि प्रदेश ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों में भी पहचान दिलाए हैं। बंगाली समुदाय के करीब 500 बागबान विभिन्न प्रजातियों की सब्जियां पैदाकर बाहर की मंडियों में ले जाकर बिक्री कर रहे हैं। आम बजट में प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता देने से जिले में भी खेती का दायरा बढ़ने की उम्मीद जागी है।
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जनपद के कलीनगर तहसील क्षेत्र में शारदा डैम की तलहटी में करीब दस गांव ऐसे हैं जहां के महिला और पुरुष कई सालों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। शुरुआत में खेती करने वालों की संख्या नाममात्र की थी, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ गई। वर्तमान में इन गांवों के करीब 500 बागबान खेती से जुड़े हैं।
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कीटनाशक दवाओं से दूरी बनाकर जैविक खाद का इस्तेमाल कर खेती को बढ़ाया जा रहा है। मेहनत और बेहतर देखरेख के चलते पैदावार भी अच्छी होती है। इस समय बैगन, करेला, अरबी, हल्दी, परवल, लौकी, केला, आलू समेत 37 प्रजातियों की सब्जियों की पैदावार की जा रही है।
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सब्जी तैयार होने के बाद इन्हें जनपद के अलावा उत्तराखंड, कानपुर, दिल्ली की मंडियों में ले जाकर बेचा जाता है। व्यापारी तराई की सब्जियों का नाम देकर बिक्री करते हैं। (संवाद)
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प्राकृतिक खेती में सरकार के मदद देने की घोषणा से मिलेगा बल
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार भी विशेष ध्यान दे रही है। आम बजट में भी प्राकृतिक खेती को प्राथमिक दी गई है। सरकार का कहना है कि अगले दो सालों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने में मदद की जाएगी। इसका असर जिले में भी देखने को मिलेगा। यहां के किसान भी प्राकृतिक खेती के प्रति तेजी से जुड़ सकेंगे। इसके लिए प्रशासन और कृषि विभाग प्रयास करेगा।
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सेहत के लाभकारी है प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती से किसान अभी दूरी बनाए हैं। कीटनाशकों का इस्तेमाल कर जल्द पैदावार बढ़ाने के कारण ऐसा हो रहा है। ऐसे में सब्जियों में दवा का असर होने से लोग बीमार भी हो रहे हैं। वहीं, प्राकृतिक खेती का अपना महत्व है। इसके इस्तेमाल से सेहत बेहतर होती है। बगैर दवा के इस्तेमाल से पैदा होने वाली सब्जियों का शरीर को लाभ मिलता है। बीमारियां घट जाती हैं।
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राज्यपाल कर चुकीं हैं सराहना
पूर्व में जनपद के दौरे पर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी तराई क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करने वाले ग्रामीणों के बीच गईं थीं। उन्होंने सब्जियों को देखकर किसानों की मेहनत की सराहना भी की थी।
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कई सालों से प्राकृतिक खेतों करते आ रहे हैं। कीटनाशक का इस्तेमाल किए बिना ही पैदावार करते हैं। बेहतर उत्पादन करने से खुशी मिलती है। - मंजू विश्वास

--प्राकृतिक खेती अन्य फसलों से बेहतर होती है। बेहतर देखरेख और जैविक खाद का इस्तेमाल कर हम लोग करीब 30 से अधिक सब्जियों की प्रजाति उगाते हैं।

- आशालता विश्वास
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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रति सरकार का विशेष ध्यान है। प्राकृतिक सब्जियों के उत्पादन के लिए लक्ष्य मिला है। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा।

- आरडी गंगवार, उद्यान निरीक्षक

कलीनगर के रमनगरा क्षेत्र में उगाई गई प्राकृतिक खेती से सब्जियां। स्रोत:किसान

कलीनगर के रमनगरा क्षेत्र में उगाई गई प्राकृतिक खेती से सब्जियां। स्रोत:किसान

कलीनगर के रमनगरा क्षेत्र में उगाई गई प्राकृतिक खेती से सब्जियां। स्रोत:किसान

कलीनगर के रमनगरा क्षेत्र में उगाई गई प्राकृतिक खेती से सब्जियां। स्रोत:किसान

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