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प्रधान को नहीं मालूम गांव के मजरे, पति चला रहे प्रधानी
Bisalpur
Updated Fri, 07 Aug 2015 11:16 PM IST
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ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर भजा की चयनित प्रधान तो संतोषा देवी हैं, लेकिन गांव की असल प्रधानी उनके पति चलाते हैं। गांव में संतोषा देवी का अपना कोई राजनीतिक वजूद नहीं है। यही वजह है कि गांव की अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानी उनके पति ही चलाते हैं। पांच साल गुजर गए संतोषा देवी को विकास कार्य से कोई सीधे तौर पर लेना-देना भी नहीं रहा।
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वर्ष 2010 में ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर भजा में संतोषा देवी ग्राम प्रधान के पद पर चुनी गई थीं। शपथ ग्रहण करने के बाद उनके पति बुधपाल ने ग्राम प्रधान का दायित्व संभाल लिया था और अभी तक वही संभाल रहे हैं। अमर उजाला टीम ने गांव पहुंच कर संतोषा देवी से जब यह पूछा कि उनकी ग्राम पंचायत में कितने मजरे हैं तो वह चुप ही रहीं।
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यही नहीं गांव में कितने बेसिक विद्यालय हैं। कौन ग्राम पंचायत अधिकारी व सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) है। कौन खंड विकास अधिकारी और कौन डीपीआरओ है। उन्हें यह भी नहीं पता है कि बीते पांच वर्षों में उनकी ग्राम पंचायत में विकास के लिए कितनी धनराशि प्राप्त हुई है। यह अलग बात है कि गांव में विकास कार्यों पर खर्च धनराशि उन्हीं के हस्ताक्षर से निकली है, लेकिन उनकी ग्राम पंचायत का कौन सी बैंक में खाता है, यह संतोषा देवी नहीं जानतीं।
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गांव के रोजगार सेवक और सफाई कर्मचारी का भी नाम उन्हें नहीं पता। कितने विकास कार्य हुए, कितने विकास कार्य अधूरे हैं, कितने विकास कार्यों का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है, कितने खडंजे लगवाए, कितनी नालियां बनवाई गई हैं। यह वह कुछ भी नहीं बता सकीं। जवाब के तौर पर पति की ओर संकेत करते हुए कहा कि वही सब बताएंगे।
महिला सीट थी इसलिए पत्नी को चुनाव
प्रधान पति बुधपाल का कहना है कि महिला के लिए आरक्षित सीट होने के कारण उन्होंने मजबूरी में अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाया था। उनका कहना है कि उनकी पत्नी केवल हस्ताक्षर करना जानती हैं। ऐसे हालातों में उन्हें ग्राम प्रधान की भूमिका निभानी पड़ रही है।
ग्राम प्रधान संतोषा देवी का कहना है कि वह ग्राम पंचायत के चेकों पर स्वयं हस्ताक्षर करती हैं और ब्लाक, जिला स्तर पर होने वाली बैठकों में भी भाग लेने जाती हैं।