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भगवान की कृपा पर आश्रित रहता है भक्त : पाठक
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ग्राम भैसाहा गवालपुर में प्रवचन देती लबली शास्त्री।संवाद
पीलीभीत। कथा व्यास पंडित बृजेश पाठक ने आज यहां कहा कि भक्त और ज्ञानी में अंतर है। ज्ञानी कहता है अगर भाग्य में है तो अवश्य मिलेगा पर भक्त कहता है भाग्य में तो कुछ नहीं है, भगवान की कृपा होगी तो मिलेगा।
शहर के राधा रमन मंदिर में चल रही कथा के चौथे दिन कथा व्यास ने कहा भक्त को एकमात्र भगवान की कृपा का सहारा होता है। भरत जब प्रभु राम के पास चित्रकूट में जाते हैं, तो विचार करते हैं कि मैं सब तरह से अपराधी हूं, मेरे कारण ही श्रीराम को वनवास हुआ है, मैं स्वीकार करने योग्य नहीं। अगर प्रभु राम मुझे स्वीकार कर लें, मेरा आग्रह स्वीकार कर लें तो उनकी कृपा होगी।
कथा व्यास ने कहा कि भक्ति मार्ग में व्यक्तिगत साधन का महत्व नहीं भगवान की कृपा का महत्व है। क्योंकि भक्त जानता है कि भगवान साधन से नहीं कृपा से मिलते हैं।
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काम, क्रोध और लोभ को हावी न होने देंः लवली
बरखेड़ा। गांव भैसहा ग्वालपुर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक लवली शास्त्री ने कहा कि अपने ऊपर काम, क्रोध और लोभ को हावी न होने दें । अपने अर्जित धन का कुछ हिस्सा परमार्थ के कार्य में लगाएं।
उन्होंने कहा कि जीवन में जब अभिमान आ जाता हैं तो भगवान दूर हो जाते है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में चला जाता है तो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उस भक्त को दर्शन देते हैं। जब कोई व्यक्ति नारायण को मन से पूजता हैं और उनकी निस्वार्थ सेवा करता हैं, तो उनकी कृपा स्वतः ही हो जाती हैं। इस मौके पर ताराचंद वर्मा, जितेंद्र वर्मा, राम सिंह, मैकूलाल, शेरसिंह सहित काफी लोग मौजूद रहे। संवाद
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भरत मिलाप का प्रसंग सुनाया
बिलसंडा। गांव घनश्यामपुर में चल रही श्रीराम कथा में शनिवार की रात भारत मिलन का प्रसंग सुनाया गया।
कथावाचक पंकज मिश्रा ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पिता दशरथ के देहांत की जानकारी पाकर भरत स्तब्ध रह गए। इसके बाद पता चला कि बड़े भाई राम वनवास चले गए हैं तो उनका सब्र का बांध टूट गया। उनको वापस लेने भरत वन की ओर चल दिए। भगवान राम से मिले तो दोनों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी। काफी प्रयास के बाद भी भगवान राम वापस नही आए। संवाद
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पार्वती जन्म की लीला का मंचन
बीसलपुर। नगर के ऐतिहासिक रामलीला मेले मेंं रविवार को पार्वती जन्म की लीला का मंचन हुआ।
लीला शाम पांच बजे शुरू हुई। संचालन लीला प्रबंधक गोपाल कृष्ण अग्रवाल और मनोज त्रिपाठी ने रामायण की चौपाइयां व दोहे पढ़कर किया। इधर रामलीला शुरू होते ही मेला मैदान पर खेल तमाशे और दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। शनिवार से नगर का ऐतिहासिक रामलीला मेला शुरू हो गया। लीला शुरू होते ही मेला मैदान पर रविवार से खेल तमाशे और दुकानें लगनी शुरू हो गईं। मेला कमेटी के गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बताया कि बहुत जल्द मेले में मेला कमेटी और पुलिस का शिविर भी लग जाएगा। संवाद
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अहिल्या उद्धार, जनकपुरी अवलोकन लीलाओं का मंचन
पीलीभीत। शहर के परमठ मंदिर में श्री रामलीला महोत्सव में चौथे दिन रविवार को अहिल्या उद्धार, जनकपुरी अवलोकन एवं मीना बाजार लीला का मंचन किया गया। लीला मंचन को देखने के लिए शाम से ही मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। इस मौके पर महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, प्रेम सिंह, संजीव शर्मा, विश्वास प्रकाश सक्सेना, रमाकांत पांडेय, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
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शहर के राधा रमन मंदिर में चल रही कथा के चौथे दिन कथा व्यास ने कहा भक्त को एकमात्र भगवान की कृपा का सहारा होता है। भरत जब प्रभु राम के पास चित्रकूट में जाते हैं, तो विचार करते हैं कि मैं सब तरह से अपराधी हूं, मेरे कारण ही श्रीराम को वनवास हुआ है, मैं स्वीकार करने योग्य नहीं। अगर प्रभु राम मुझे स्वीकार कर लें, मेरा आग्रह स्वीकार कर लें तो उनकी कृपा होगी।
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कथा व्यास ने कहा कि भक्ति मार्ग में व्यक्तिगत साधन का महत्व नहीं भगवान की कृपा का महत्व है। क्योंकि भक्त जानता है कि भगवान साधन से नहीं कृपा से मिलते हैं।
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काम, क्रोध और लोभ को हावी न होने देंः लवली
बरखेड़ा। गांव भैसहा ग्वालपुर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक लवली शास्त्री ने कहा कि अपने ऊपर काम, क्रोध और लोभ को हावी न होने दें । अपने अर्जित धन का कुछ हिस्सा परमार्थ के कार्य में लगाएं।
उन्होंने कहा कि जीवन में जब अभिमान आ जाता हैं तो भगवान दूर हो जाते है, लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में चला जाता है तो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उस भक्त को दर्शन देते हैं। जब कोई व्यक्ति नारायण को मन से पूजता हैं और उनकी निस्वार्थ सेवा करता हैं, तो उनकी कृपा स्वतः ही हो जाती हैं। इस मौके पर ताराचंद वर्मा, जितेंद्र वर्मा, राम सिंह, मैकूलाल, शेरसिंह सहित काफी लोग मौजूद रहे। संवाद
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भरत मिलाप का प्रसंग सुनाया
बिलसंडा। गांव घनश्यामपुर में चल रही श्रीराम कथा में शनिवार की रात भारत मिलन का प्रसंग सुनाया गया।
कथावाचक पंकज मिश्रा ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि पिता दशरथ के देहांत की जानकारी पाकर भरत स्तब्ध रह गए। इसके बाद पता चला कि बड़े भाई राम वनवास चले गए हैं तो उनका सब्र का बांध टूट गया। उनको वापस लेने भरत वन की ओर चल दिए। भगवान राम से मिले तो दोनों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी। काफी प्रयास के बाद भी भगवान राम वापस नही आए। संवाद
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पार्वती जन्म की लीला का मंचन
बीसलपुर। नगर के ऐतिहासिक रामलीला मेले मेंं रविवार को पार्वती जन्म की लीला का मंचन हुआ।
लीला शाम पांच बजे शुरू हुई। संचालन लीला प्रबंधक गोपाल कृष्ण अग्रवाल और मनोज त्रिपाठी ने रामायण की चौपाइयां व दोहे पढ़कर किया। इधर रामलीला शुरू होते ही मेला मैदान पर खेल तमाशे और दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। शनिवार से नगर का ऐतिहासिक रामलीला मेला शुरू हो गया। लीला शुरू होते ही मेला मैदान पर रविवार से खेल तमाशे और दुकानें लगनी शुरू हो गईं। मेला कमेटी के गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बताया कि बहुत जल्द मेले में मेला कमेटी और पुलिस का शिविर भी लग जाएगा। संवाद
अहिल्या उद्धार, जनकपुरी अवलोकन लीलाओं का मंचन
पीलीभीत। शहर के परमठ मंदिर में श्री रामलीला महोत्सव में चौथे दिन रविवार को अहिल्या उद्धार, जनकपुरी अवलोकन एवं मीना बाजार लीला का मंचन किया गया। लीला मंचन को देखने के लिए शाम से ही मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। इस मौके पर महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, प्रेम सिंह, संजीव शर्मा, विश्वास प्रकाश सक्सेना, रमाकांत पांडेय, भानु प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद

ग्राम भैसाहा गवालपुर में प्रवचन देती लबली शास्त्री।संवाद

ग्राम भैसाहा गवालपुर में प्रवचन देती लबली शास्त्री।संवाद