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गन्ने के साथ करें सहफसली खेती
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 12 May 2016 11:13 PM IST
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गन्ना किसानों को कम लागत अधिक उत्पादन दिलाने को अब गन्ना विभाग ट्रेंच विधि से बुवाई एवं सहफसली खेती पर जो देगा। इसके लिए आगामी सीजन में अभियान में अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत जिले में 25 प्रतिशत बुवाई ट्रेंच विधि से कराने का लक्ष्य रखा गया है।
गन्ना उत्पादन बढ़ाने को कुछ वर्ष पूर्व वैज्ञानिकों ने ट्रेंच विधि अपनाने की संस्तुति की थी। इसके बाद कई किसानों ने इसका उपयोग किया, लेकिन जिले के लगभग 80 प्रतिशत किसान अभी भी साधारण तरीके से पूर्व की विधियों के अनुसार ही गन्ना बुवाई कर रहे हैं। इससे तमाम प्रयास के बाद भी गन्ना उत्पादन में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। अब शासन ने एक बार पुन: ट्रेंच अपनाने पर जोर दिया है। गन्ना आयुक्त के निर्देश पर जिले में भी इसकी तैयारियां शुरू की गई है। गन्ना विभाग अभी से इसके लिए कार्ययोजना बना रहा है। इसके तहत अक्तूबर से पूर्व क्षेत्र में गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को ट्रेंच विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। साथ ही सहफसली को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।
क्या है ट्रेंच विधि
साधारण तरीके से गन्ना बोने में हल या रेंजर से नालियां बनाकर उसमें गन्ने टुकड़ों को सीधा डाला जाता है, जबकि ट्रेंच विधि में खेतों में एक फिट चौड़ी खाई बनाकर गन्ने के टुकड़ों को खाई के विपरीत (आड़ा) रखा जाता है। साथ ही दो खाई के बीच तीन फिट की जगह छोड़ी जाती है, जिस पर सहफसली खेती की जा सकती है।
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25 से 30 प्रतिशत
तक बढ़ती है उपज
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका के अनुसार साधारण विधि के मुकाबले ट्रेंच विधि से गन्ने में कल्ले काफी अधिक मात्रा में निकलते हैं, जिससे 25-30 प्रतिशत तक उपज बढ़ती है साथ दो लाइनों के बीच आलू, प्याज, टमाटर, उर्द, मूंग, लोबिया, खीरा, ककड़ी, मटर आदि की फसल लेकर अतिरिक्त आमदनी की जा सकती है।
अक्तूबर से शुरू होने वाले बुवाई सीजन में ट्रेंच विधि अपनाने पर जोर दिया जाना है। इसके लिए अभी से तैयारियां की जा रही हैं। जिले में 25 प्रतिशत बुवाई ट्रेंच विधि से कराने का लक्ष्य रखा गया है।
- राजेश्वर यादव, जिला गन्ना अधिकारी
मुनिराज
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गन्ना उत्पादन बढ़ाने को कुछ वर्ष पूर्व वैज्ञानिकों ने ट्रेंच विधि अपनाने की संस्तुति की थी। इसके बाद कई किसानों ने इसका उपयोग किया, लेकिन जिले के लगभग 80 प्रतिशत किसान अभी भी साधारण तरीके से पूर्व की विधियों के अनुसार ही गन्ना बुवाई कर रहे हैं। इससे तमाम प्रयास के बाद भी गन्ना उत्पादन में बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। अब शासन ने एक बार पुन: ट्रेंच अपनाने पर जोर दिया है। गन्ना आयुक्त के निर्देश पर जिले में भी इसकी तैयारियां शुरू की गई है। गन्ना विभाग अभी से इसके लिए कार्ययोजना बना रहा है। इसके तहत अक्तूबर से पूर्व क्षेत्र में गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को ट्रेंच विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। साथ ही सहफसली को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।
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क्या है ट्रेंच विधि
साधारण तरीके से गन्ना बोने में हल या रेंजर से नालियां बनाकर उसमें गन्ने टुकड़ों को सीधा डाला जाता है, जबकि ट्रेंच विधि में खेतों में एक फिट चौड़ी खाई बनाकर गन्ने के टुकड़ों को खाई के विपरीत (आड़ा) रखा जाता है। साथ ही दो खाई के बीच तीन फिट की जगह छोड़ी जाती है, जिस पर सहफसली खेती की जा सकती है।
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25 से 30 प्रतिशत
तक बढ़ती है उपज
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका के अनुसार साधारण विधि के मुकाबले ट्रेंच विधि से गन्ने में कल्ले काफी अधिक मात्रा में निकलते हैं, जिससे 25-30 प्रतिशत तक उपज बढ़ती है साथ दो लाइनों के बीच आलू, प्याज, टमाटर, उर्द, मूंग, लोबिया, खीरा, ककड़ी, मटर आदि की फसल लेकर अतिरिक्त आमदनी की जा सकती है।
अक्तूबर से शुरू होने वाले बुवाई सीजन में ट्रेंच विधि अपनाने पर जोर दिया जाना है। इसके लिए अभी से तैयारियां की जा रही हैं। जिले में 25 प्रतिशत बुवाई ट्रेंच विधि से कराने का लक्ष्य रखा गया है।
- राजेश्वर यादव, जिला गन्ना अधिकारी
मुनिराज