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Pilibhit News: तहसील से गायब कर दी मुकदमे की पत्रावली, तत्कालीन न्याय लिपिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
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पीलीभीत। 34 साल पुराने वाद की पत्रावली गायब होने का मामला सामने आया है। जांच में सदर तहसील के तत्कालीन न्याय लिपिक द्वारा पत्रावली गायब करने की बात सामने आने पर उसके खिलाफ शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
मोहल्ला केसरी सिंह निवासी विवेक कुमार शर्मा ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वर्ष 1990-91 में दर्ज वाद संख्या 282 से संबंधित वाद पत्रावली की तत्कालीन अभिलेखों के माध्यम से खोजबीन की गई। जिसमें पाया गया कि उक्त वाद की पत्रावली सदर तहसील कार्यालय के राजस्व लिपिक पटल पर प्राप्त हुई। जहां से पत्रावली 18 नवंबर 1996 को तहसील के तत्कालीन न्याय लिपिक के पास पहुंची।
बताया गया कि उक्त पत्रावली को न्यायालय के आदेश के अनुसार अमलदरामद के लिए रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय को प्रेषित किया जाना था। न्यायालय द्वारा पत्रावली के संबंध में कोई कार्रवाई अपेक्षित रहने की स्थिति में उक्त पत्रावली को अवलोकन के बाद अभिलेखागार में संचित करने की कार्रवाई न्यायालय की ओर से की जाती है लेकिन उक्त मामले में तत्कालीन न्याय लिपिक ने वर्ष 1996-97 में पत्रावली को न तो मिसिलबंद पंजी (जो राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध है) में दर्ज कराया और न ही रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय में भेजा।
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इसके चलते तत्कालीन न्याय लिपिक द्वारा पत्रावली के गायब करने की बात सामने आई। ऐसे में अब रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
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मोहल्ला केसरी सिंह निवासी विवेक कुमार शर्मा ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वर्ष 1990-91 में दर्ज वाद संख्या 282 से संबंधित वाद पत्रावली की तत्कालीन अभिलेखों के माध्यम से खोजबीन की गई। जिसमें पाया गया कि उक्त वाद की पत्रावली सदर तहसील कार्यालय के राजस्व लिपिक पटल पर प्राप्त हुई। जहां से पत्रावली 18 नवंबर 1996 को तहसील के तत्कालीन न्याय लिपिक के पास पहुंची।
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बताया गया कि उक्त पत्रावली को न्यायालय के आदेश के अनुसार अमलदरामद के लिए रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय को प्रेषित किया जाना था। न्यायालय द्वारा पत्रावली के संबंध में कोई कार्रवाई अपेक्षित रहने की स्थिति में उक्त पत्रावली को अवलोकन के बाद अभिलेखागार में संचित करने की कार्रवाई न्यायालय की ओर से की जाती है लेकिन उक्त मामले में तत्कालीन न्याय लिपिक ने वर्ष 1996-97 में पत्रावली को न तो मिसिलबंद पंजी (जो राजस्व अभिलेखागार में उपलब्ध है) में दर्ज कराया और न ही रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय में भेजा।
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इसके चलते तत्कालीन न्याय लिपिक द्वारा पत्रावली के गायब करने की बात सामने आई। ऐसे में अब रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।