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Pilibhit News: रामभक्तों पर गोलियां चलीं तो छलक आए थे आंसू
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धीरेंद्र मिश्रा । स्रोत - स्वयं
पीलीभीत। भाजपा के वरिष्ठ नेता व अधिवक्ता धीरेंद्र मिश्र भी उन लोगों में शामिल हैं जो राममंदिर आंदोलन के दौरान जेल गए थे। उन्हें पीलीभीत, बदायूं व बरेली की सेंट्रल जेल में तन्हाई में रखा गया। पहली बार साथ में उनके पिता भी गिरफ्तार कर लिए गए थे।
धीरेंद्र मिश्र बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनके अलावा जिले के सैकड़ों लोगों ने कारागार में ही दिवाली मनाई थी। प्रभात फेरियों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुआ करते थे। सन 1990 में जब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं तो आंसू छलक आए थे। जेल से छूटने के बाद वे अयोध्या होकर आए तो फिर गिरफ्तार कर लिए गए थे।
धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि 1990 में वह भाजपा युवा मोर्चा में जिला महामंत्री थे। अक्तूबर में उन्होंने श्रीराम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लिया। इसी दौरान अक्तूबर के पहले सप्ताह में कोतवाली इंस्पेक्टर ने साहूकारा में उन्हें रोक लिया। बताया कि पीस कमेटी की बैठक है। पिता देवेंद्र स्वरूप मिश्र भी भाजपा नेता थे। कोतवाली पहुंचे तो दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद बदायूं भेज दिया गया। दिवाली जेल में ही मनाई।
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जब जेल से छूटकर दिसंबर में अयोध्या गए तो गोलीकांड हो चुका था। वहां पहुंचे तो मंदिर की दीवारों पर गोलियों के निशान थे। मंदिर के बाहर सैकड़ों चप्पलें बिखरी पड़ीं थीं। जब लौटकर आए और पुलिस को उनके अयोध्या जाने की बात पता चली तो उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया। पीलीभीत से बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां तन्हाई में रखा गया। इस पर उन्होंने जेल में ही अनशन शुरू कर दिया। बाद में 20 दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
इसके बाद उन्होंने पीलीभीत में रामज्योति लाने की ठानी। तब वकील राधेश्याम सक्सेना, उत्तम अग्रवाल, वीरेंद्र सक्सेना समेत पांच लोग बरेली गए। यहां संघ की बैठक थी। यहां से रामज्योति लालटेन की शक्ल में एक थैले में रखकर चोरी-छिपे बड़ी ही हिफाजत से पीलीभीत लाए। छतरी चौराहे पर जब रामज्योति पहुंची तो लोगों की भीड़ जुट गई। जयश्रीराम के नारे लगने लगे। धीरेंद्र मिश्रा ने कहा- अब इतने सालों बाद अयोध्या में श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने से वह अभिभूत हैं। अब बस 22 जनवरी का इंतजार है जब सपना साकार हो जाएगा।
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धीरेंद्र मिश्र बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनके अलावा जिले के सैकड़ों लोगों ने कारागार में ही दिवाली मनाई थी। प्रभात फेरियों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुआ करते थे। सन 1990 में जब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं तो आंसू छलक आए थे। जेल से छूटने के बाद वे अयोध्या होकर आए तो फिर गिरफ्तार कर लिए गए थे।
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धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि 1990 में वह भाजपा युवा मोर्चा में जिला महामंत्री थे। अक्तूबर में उन्होंने श्रीराम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लिया। इसी दौरान अक्तूबर के पहले सप्ताह में कोतवाली इंस्पेक्टर ने साहूकारा में उन्हें रोक लिया। बताया कि पीस कमेटी की बैठक है। पिता देवेंद्र स्वरूप मिश्र भी भाजपा नेता थे। कोतवाली पहुंचे तो दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद बदायूं भेज दिया गया। दिवाली जेल में ही मनाई।
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जब जेल से छूटकर दिसंबर में अयोध्या गए तो गोलीकांड हो चुका था। वहां पहुंचे तो मंदिर की दीवारों पर गोलियों के निशान थे। मंदिर के बाहर सैकड़ों चप्पलें बिखरी पड़ीं थीं। जब लौटकर आए और पुलिस को उनके अयोध्या जाने की बात पता चली तो उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया। पीलीभीत से बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां तन्हाई में रखा गया। इस पर उन्होंने जेल में ही अनशन शुरू कर दिया। बाद में 20 दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
इसके बाद उन्होंने पीलीभीत में रामज्योति लाने की ठानी। तब वकील राधेश्याम सक्सेना, उत्तम अग्रवाल, वीरेंद्र सक्सेना समेत पांच लोग बरेली गए। यहां संघ की बैठक थी। यहां से रामज्योति लालटेन की शक्ल में एक थैले में रखकर चोरी-छिपे बड़ी ही हिफाजत से पीलीभीत लाए। छतरी चौराहे पर जब रामज्योति पहुंची तो लोगों की भीड़ जुट गई। जयश्रीराम के नारे लगने लगे। धीरेंद्र मिश्रा ने कहा- अब इतने सालों बाद अयोध्या में श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने से वह अभिभूत हैं। अब बस 22 जनवरी का इंतजार है जब सपना साकार हो जाएगा।

धीरेंद्र मिश्रा । स्रोत - स्वयं