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जिले के अंदर शिक्षकों के स्थानांतरण में हुआ खेल
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 29 Dec 2016 11:59 PM IST
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परिषदीय विद्यालयों में जनपद के अंदर स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो गई। नई व्यवस्था से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि इससे शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार हो जाएगा। इसकी कई वजह हैं। साथ ही इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जम कर खेल होने की बात कही जा रही है। विभाग ने न तो यह सार्वजनिक किया था कि कितने शिक्षकों के स्थानांतरण किए जाएंगे और न ही यह सार्वजनिक किया गया कि कितने स्थानांतरण हुए। विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण नियमावली में इतना जरूर कहा गया था कि शिक्षकों से प्राप्त आवेदन पत्रों पर डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी का निर्णय अंतिम होगा। डीएम ने कितने शिक्षकों के स्थानांतरण का अनुमोदन किया, इसे विभाग ने पूरी तरह गोपनीय रखा। यही वजह रही कि स्थानांतरित शिक्षकों की सूची जारी नहीं की गई। इसके बजाए स्थानांतरण आदेश सीधे खंड शिक्षा अधिकारियों के कार्यालय भेज दिए गए। सूत्रों के मुताबिक कुल 1261 आवेदन आए थे। इनमें से प्राथमिक विद्यालयों के 412 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 93 शिक्षकों को स्थानांतरण का लाभ मिला। इसमें खेल होने की खबरें आ रही हैं। शिक्षकों की माने तो मनपसंद स्कूल पाने के लिए उन्हें विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की ठीक ठाक खातिरदारी करनी पड़ी। जो ऐसा नहीं कर पाया, उसका स्थानांतरण नहीं हुआ। यहां तक कि म्यूचुअल ट्रांसफर चाहने वालों को भी लेनदेन करना पड़ा। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में भी खेल करने वाले पीछे नहीं रहे। स्थानांतरण पाने वाले शिक्षकों से कार्यमुक्ति आदेश प्रमाणित कराने के नाम पर वसूली की गई। हालांकि प्रधानाध्यापक द्वारा जारी कार्यमुक्ति आदेश को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्रमाणित कराने का कोई औचित्य ही नहीं था। अगर बात यह की जाए कि स्थानांतरण प्रक्रिया से स्कूलों में शिक्षकों की संख्या दुरुस्त हो जाएगी, तो यह कोरी कल्पना ही कही जा सकती है। क्योंकि शिक्षकों को उनकी पसंद का स्कूल देने की व्यवस्था थी, न कि जहां अधिक शिक्षक हों वहां से हटा कर कम संख्या वाले स्कूलों में शिक्षकों को भेजा जाए। कुल मिलाकर यह कहना गलत न होगा कि स्थानांतरण प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों और शिक्षकों की इच्छापूर्ति पर ही आधारित रही।
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