टाडा बंदियों की हत्या के मामले में हाईकोर्ट में सरकार का जवाब दाखिल

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Fri, 06 Mar 2020 01:46 AM IST
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पीलीभीत। वर्ष 1994 में जेल में 10 टाडा बंदियों की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में प्रमुख सचिव गृह की ओर से बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष पेश किया गया। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
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पीलीभीत जेल में वर्ष 1994 में सैकड़ों टाडा बंदी निरुद्ध थे। इनमें पीलीभीत के अलावा उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा राज्य के बंदी भी थे। नौ नवंबर 1994 की रात को कुछ टाडा बंदियों ने बैरक का जंगला काटकर भागने की कोशिश की थी। उसके बाद जेलकर्मियों ने बैरक नंबर सात में निरुद्ध 28 टाडा बंदियों की बेरहमी से पिटाई की। इनमें से नौ की मौके पर ही मौत हो गई थी। दसवें टाडा बंदी की इलाज के दौरान केजीएमसी लखनऊ में मौत हुई। टाडा बंदियों की मौत और पिटाई की खबर जेल से बाहर आते ही हड़कंप मच गया था। तत्कालीन डीएम ने शासन से सीबीसीआईडी जांच की सिफारिश की। तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष ज्ञानी त्रिलोचन सिंह ने अज्ञात जेल कर्मियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। जेल कर्मियों ने भी टाडा बंदियों पर फरार होने का लिखित आरोप लगाया। सीबीसीआईडी ने जांच के बाद जेल अधीक्षक विंध्याचल सिंह यादव, जेलर शंहशाह हुसैन जाफरी सहित 48 जेल कर्मियों पर हत्या समेत विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपी हाईकोर्ट चले गए। जहां मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगा दी गई। इस बीच प्रदेश में सपा की सरकार बनी और करीब एक दशक पहले सरकार ने इस मुकदमे को वापस ले लिया। मुकदमा वापसी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। जवाब दाखिल न करने पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति द्वय सुधीर अग्रवाल और राजीव मिश्रा ने नाराजगी जताई थी। इस पर बृहस्पतिवार को राज्य सरकार की ओर से प्रमुख सचिव गृह ने जवाब पेश किया। इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। जेल कांड के कई मृतकों के परिजनों के साथ जिले के प्रमुख सिख फार्मर हरजिंदर सिंह कहलो ने भी याचिका दायर की है।
मृतकों के परिजनों और पीड़ितों को मिलेगा न्याय-कहलो
जेल कांड में जेल अधीक्षक सहित जेल अधिकारियों और सिपाहियों से मुकदमा वापसी का विरोध जिले में सबसे पहले सिख फार्मर हरजिंदर सिंह कहलो ने शुरू किया। उन्होंने तीन साल पहले हाईकोर्ट में इस मामले में याचिका दायर की है। उसके बाद मृतक के परिजनों और कुछ पीड़ितों ने भी उच्च न्यायालय की शरण ली। सभी याचिकाओं की सुनवाई उच्च न्यायालय में एक साथ हो रही है। हरजिंदर सिंह कहलो इस मामले में लंबे समय से पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मेहनत एक न एक दिन जरूर रंग लाएगी। पीड़ितों को कोर्ट से न्याय अवश्य मिलेगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
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