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सिमरनजीत की जुबानी, संघर्ष और जीत की कहानी

Sun, 22 Aug 2021 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 22 Aug 2021 01:18 AM IST
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पीलीभीत। इतने सारे लोगों की दुआएं मेरे साथ थीं, इन्हीं दुआओं ने मुझे मुकाम तक पहुंचाया है। यह कहना है टोक्यो ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले राष्ट्रीय खिलाड़ी सिमरनजीत सिंह का। अपनी जीत का श्रेय वह अपने परिवार, कोच और देशवासियों को दिया है। जिनका प्यार और दुआओं से यह मुकाम हासिल किया है।
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टोक्यो ओलंपिक में टीम इंडिया को कांस्य पदक जीतने में अहम भूमिका निभाने वाले सिमरनजीत सिंह सवा साल के बाद शुक्रवार को अपने घर मझोला के मझारा फार्म पहुंचे। उनकी जीत और कामयाबी पर जिले भर से लोग बधाई देने के लिए पहुंच रहे हैं। टोक्यो ओलंपिक में सिमरनजीत सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उन्हें बचपन से ही हॉकी के प्रति रुझान था। इसलिए उनके ताऊ रक्षपाल सिंह उन्हें बचपन में अपने साथ ले गए थे। परिवार वालों ने बड़े प्यार और आशीर्वाद के साथ पंजाब भेजा था। उनके दादा दिवंगत गुरुदेव सिंह का सपना था कि उनके घर का कोई भी बेटा खेल में परिवार का नाम रोशन करें। पंजाब पहुंचने के बाद उन्हें हॉकी कोच रंजीत सिंह चीमा का साथ मिला। जहां उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण प्राप्त किया। पंजाब पहुंचने के बाद वह एक बाद एक कामयाबी की सीढ़ी चढ़ते चले गए। कोच अवतार सिंह, गुरुदेव सिंह ने मैदान पर सिमरनजीत को हॉकी के प्रति जज्बे को निखारा। 2016 में आयोजित लखनऊ में पुरुष हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीताया था। इसके बाद उन्हें ओलंपिक के लिए टीम इंडिया में सलेक्ट किया गया था। जब इसकी जानकारी परिवार वालों को दी तो परिवार वाले भी खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। उन्हें पिता इकबाल सिंह, मां मंजीत कौर, दादी गुरमीत कौर ने कहा था कि बेटे जा और परिवार और देश का नाम रोशन करे लौटना। बंगलूरू पहुंचने के बाद वहां कोच गैरम डे के नेतृत्व में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहां परिवार को भूलकर रात और दिन सिर्फ प्रशिक्षण में जुटे रहे। वहां सुबह आठ बजे से 10 बजे तक स्टेडियम में हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त करते थे। कैसे गोल करना है, किस तरह से फिजिकल फिट रहना है। शाम को पांच बजे सात बजे तक ट्रेनिंग चालू रहती थी। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जब टीम के साथ टोक्यो ओलंपिक के लिए रवाना हुए थे। तब पूरे देश की दुआएं टीम इंडिया के साथ थी। वहां पर अन्य देशों से आए खिलाड़ियों को प्रदर्शन भी बेहतर था। मगर उन्हें देखकर नकारात्मक विचार अपने और अपनी टीम के मन में नहीं आने दिए थे। कोच द्वारा दिया प्रशिक्षण और परिवार का प्यार बेहद आसानी से कामयाबी तक ले गया। सिमरन का कहना है कि ओलंपिक में हर कोई खिलाड़ी मेहनत करता है, खेलता है। ओलंपिक में दुनियाभर से बहुत खिलाड़ी आए थे। सभी खिलाड़ियों ने मेहनत की थी। उनसे भी अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन मेरे साथ पिता इकबाल सिंह, मां मंजीत कौर, दादी गुरमीत कौर, ताऊ रक्षपाल सिंह, ताई और पूरे देश के लोगों का आशीर्वाद था। हमारी सरकार को भी हमारी टीम से बहुत उम्मीद थी। इन्हीं दुआओं ने ओलंपिक में उनकी टीम को जिताया है। मुझे गर्व है कि मैं भारतवासी हूं।
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