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जिन गलियों में कभी अकेले थे घूमते, अब चाहने वालों से बचना मुश्किल
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पीलीभीत। ओलंपिक में पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सिमरनजीत एक समय में इलाके की गलियों में जहां चाहे अकेले घूमते थे। लेकिन अब उन जगहों पर चाहने वालों से बचना मुश्किल है। सिमरनजीत इसे वाहे गुरु की कृपा मानते हैं। उनका कहना है कि कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। उन्होंने मेहनत की जिसका फल उन्हें मिला। आगे भी वह देश के लिए मेडल लाते रहेंगे।
मझोला के मझारा फार्म के रहने वाले सिमरजीत काफी सीधे और सरल स्वभाव के बचपन से रहे हैं। उनके पिता इकबाल के अनुसार बचपन में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई उन्होंने मझोला के एस के पब्लिक स्कूल की। उन दिनों ही उन्हें हॉकी के प्रति प्रेम जगा। इसके बाद ताऊ रक्षपाल सिंह उन्हें पंजाब ले गए जहां उन्होंने प्रशिक्षण लेकर देश का नाम रोशन किया। सिमरनजीत के अनुसार बचपन में वह मझोरा की गलियों में खूब घूमा करते थे। यहां आने पर भी इलाके में घूमना कम नहीं हुआ। उस समय उनकी किसी से ज्यादे जान पहचान नहीं थी। कुछ लोग ही उन्हें जानते थे। भारतीय टीम में सलेक्शन के बाद उनकी पहचान बढ़ती गई। देश के लिए पदक लाने के बाद जिंदगी अचानक बदल सी गई। इधर, सिमरजनीत के घर पहुंचने पर उनसे मिलने वालों का तांता सुबह से शाम तक लगा हुआ है। हालांकि वे कई कार्यक्रमों में शामिल हो रहे है लेकिन आने वाले लोगों से समय निकाल जरूर मिल रहे हैं। सिमरनजीत ने बताया कि वह सवा साल के बाद शुक्रवार को अपने घर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जब वह राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने से पहले घर आते थे, तो सिर्फ मझारा फार्म में रहने वाले लोगों से ही मुलाकात होती थी। बचपन भी इन गलियों में अकेले या परिवार के साथ घूमते थे। आज मै बहुत खुश हूं कि मेरे चाहने वालों की कमी नहीं है। हर कोई जीत की बधाई देने के लिए घर पहुंच रहा है। माता पिता दादी और परिवार के लोगों को भी बहुत खुशी है। शनिवार को भी पंजाब से मेहमान आए। आसपास क्षेत्र के लोग उन्हें बधाई देने के लिए पहुंचते रहे।
सवा साल बाद मिली मां के हाथ की बनी पनीर की सब्जी
सवा साल बाद अपने घर लौटे सिमरनजीत ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पनीर की सब्जी और उड़द की दाल बहुत पसंद है। मां मंजीत कौर से हमेशा इस सब्जी की फरमाइश रहती थी। हॉकी के प्रशिक्षण को जाने के बाद वहां पनीर की सब्जी तो खाई, लेकिन मां के हाथ की बनी सब्जी की बात ही कुछ और है। शुक्रवार को जब वह घर पहुंचे। तो मां ने उनके लिए पनीर की सब्जी और उड़द की दाल बनाई थी। जहा रात में मां ने अपने हाथ से सिमरनजीत को खाना खिलाया था। मां के हाथ से खाना खाकर मन प्रसन्न हो गया।
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रक्षाबंधन पर बहनों से बंधवाएंगे राखी, देंगे उपहार
सिमरनजीत के अनुसार रक्षाबंधन पर वह पूरे दिन घर पर रहेंगे। रविवार को वह किसी भी प्रोग्राम में शामिल नहीं होंगे। सिर्फ रक्षाबंधन को पूरा दिन अपनी बहनों के साथ रहेंगे। सिमरनजीत की बहनें उन्हें राखी बंधाकर उनकी लंबी उम्र और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगी। सिमरन ने बताया कि बहनों का प्यार उनका मनोबल हमेशा बढ़ता रहा है। इससे वह निरंतर खेल में अच्छा करते रहे हैं।
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मझोला के मझारा फार्म के रहने वाले सिमरजीत काफी सीधे और सरल स्वभाव के बचपन से रहे हैं। उनके पिता इकबाल के अनुसार बचपन में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई उन्होंने मझोला के एस के पब्लिक स्कूल की। उन दिनों ही उन्हें हॉकी के प्रति प्रेम जगा। इसके बाद ताऊ रक्षपाल सिंह उन्हें पंजाब ले गए जहां उन्होंने प्रशिक्षण लेकर देश का नाम रोशन किया। सिमरनजीत के अनुसार बचपन में वह मझोरा की गलियों में खूब घूमा करते थे। यहां आने पर भी इलाके में घूमना कम नहीं हुआ। उस समय उनकी किसी से ज्यादे जान पहचान नहीं थी। कुछ लोग ही उन्हें जानते थे। भारतीय टीम में सलेक्शन के बाद उनकी पहचान बढ़ती गई। देश के लिए पदक लाने के बाद जिंदगी अचानक बदल सी गई। इधर, सिमरजनीत के घर पहुंचने पर उनसे मिलने वालों का तांता सुबह से शाम तक लगा हुआ है। हालांकि वे कई कार्यक्रमों में शामिल हो रहे है लेकिन आने वाले लोगों से समय निकाल जरूर मिल रहे हैं। सिमरनजीत ने बताया कि वह सवा साल के बाद शुक्रवार को अपने घर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जब वह राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने से पहले घर आते थे, तो सिर्फ मझारा फार्म में रहने वाले लोगों से ही मुलाकात होती थी। बचपन भी इन गलियों में अकेले या परिवार के साथ घूमते थे। आज मै बहुत खुश हूं कि मेरे चाहने वालों की कमी नहीं है। हर कोई जीत की बधाई देने के लिए घर पहुंच रहा है। माता पिता दादी और परिवार के लोगों को भी बहुत खुशी है। शनिवार को भी पंजाब से मेहमान आए। आसपास क्षेत्र के लोग उन्हें बधाई देने के लिए पहुंचते रहे।
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सवा साल बाद मिली मां के हाथ की बनी पनीर की सब्जी
सवा साल बाद अपने घर लौटे सिमरनजीत ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पनीर की सब्जी और उड़द की दाल बहुत पसंद है। मां मंजीत कौर से हमेशा इस सब्जी की फरमाइश रहती थी। हॉकी के प्रशिक्षण को जाने के बाद वहां पनीर की सब्जी तो खाई, लेकिन मां के हाथ की बनी सब्जी की बात ही कुछ और है। शुक्रवार को जब वह घर पहुंचे। तो मां ने उनके लिए पनीर की सब्जी और उड़द की दाल बनाई थी। जहा रात में मां ने अपने हाथ से सिमरनजीत को खाना खिलाया था। मां के हाथ से खाना खाकर मन प्रसन्न हो गया।
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रक्षाबंधन पर बहनों से बंधवाएंगे राखी, देंगे उपहार
सिमरनजीत के अनुसार रक्षाबंधन पर वह पूरे दिन घर पर रहेंगे। रविवार को वह किसी भी प्रोग्राम में शामिल नहीं होंगे। सिर्फ रक्षाबंधन को पूरा दिन अपनी बहनों के साथ रहेंगे। सिमरनजीत की बहनें उन्हें राखी बंधाकर उनकी लंबी उम्र और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगी। सिमरन ने बताया कि बहनों का प्यार उनका मनोबल हमेशा बढ़ता रहा है। इससे वह निरंतर खेल में अच्छा करते रहे हैं।