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Pilibhit News: तराई की साफ हवा में जहर घोल रहा धुआं

Sat, 02 Dec 2023 12:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:31 AM IST
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Smoke poisoning the clean air of the Terai
सड़क किनारे जल रहा कूड़ा । संवाद
अमूमन 50 से कम रहता है जिले में एक्यूआई, मौजूद समय में 60-70
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राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस आज
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। तराई के इस जिले में यूं तो हवा की गुणवत्ता खासी अच्छी है लेकिन पराली व कूड़ा जलाने से प्रदूषण बढ़ रहा है। हालांकि अधिकारियों ने तमाम कोशिशें कीं लेकिन पराली फिर भी जली। करीब 100 किसानों पर जुर्माना डाला गया। जानकारों का कहना है कि तराई में हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 50 से नीचे रहता है लेकिन दीपावली के बाद से यह 60-70 चल रहा है। बीच में 150 तक पहुंच गया था।
हर साल भोपाल त्रासदी की घटना को लेकर प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। इस दिन दावे और संकल्प तो होते है लेकिन अमल नहीं हो पाता। इसका प्रमाण भी दिखाई देता है। आए दिन कहीं न कहीं सड़क किनारे कूड़ा सुलगता दिखाई पड़ता है।
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प्रदूषण की रोकथाम और इसे फैलाने वालों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कार्रवाई के भी निर्देश हैं। इसमें जुर्माना भी लिया जाता है। बावजूद इसके हालात जस के तस हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण जिले में कूड़ा निस्तारण प्लांट न होना है। शहर से लेकर गांवों तक निस्तारण प्लांट बनाने के लिए लाखों रुपये का बजट तो जारी किया गया लेकिन वह चल नहीं सके हैं, मात्र शोपीस बने हैं।
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ऐसे में शहर से उठने वाला कूड़ा सड़क किनारे ही डालकर आग के हवाले कर दिया जाता है। शहर में बरेली रोड, एकता सरोवर के पास आए दिन ऐसा देखने को मिलता है। इससे हवा जहरीली हो रही है।
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150 तक पहुंच गया था एक्यूआईतराई में एक्यूआई 50 के नीचे काफी अच्छा माना जाता है। यहां पर कहीं न कहीं कूड़ा जलने के कारण यह 60 से 70 के बीच बना हुआ है। यदि इसी तरह से आग जलाने की घटनाएं होती रहीं तो यह सौ के पार हो जाएगा। दीपावली के दो दिन बाद एक्यूआई 150 तक पहुंच गया था।

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पराली जलाने में वसूला जा चुका है 2.10 लाख का जुर्माना
प्रदूषण को बचाने के लिए पराली प्रबंधन लागू किया गया था। रोकथाम के लिए अफसरों की टीम भी लगाई गई। इसके बाद भी घटनाएं हो रही हैं। कृषि विभाग की ओर से ऐसे में 65 किसानों से 2.10 लाख का जुर्माना वसूल गया। 14 अधिकारियों और कर्मचारियों पर वेतन रोकने की भी कार्रवाई की गई। इसके बाद भी पूर्ण रोक नहीं लग सकी।
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जिले में 81 हजार हेक्टेयर जंगल है। यहां फैक्टरियां भी नहीं हैं। जिस कारण प्रदूषण नहीं है। तराई में वैसे एक्यूआई 50 से नीचे रहे तो बेहतर है।
- डाॅ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक
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