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Pilibhit News: महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही ‘रेशम की डोर’
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रेशम का धागा तैयार करती महिलाएं संवाद
पीलीभीत। रेशम की डोर (धागा) से 15 से 20 महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। धागा बनाकर यह महिलाएं प्रतिमाह आठ से 10 हजार रुपये कमा रहीं हैं। कच्चा माल रेशम विभाग की ओर से मुहैया कराया जाता है। धागे की बिक्री से मिलने वाले मुनाफे से महिलाओं की आय होती है।
शहर के सहायक निदेशक रेशम कार्यालय परिसर में ही धागा उत्पादन की यूनिट लगी है। इसमें रेशम के कोये से धागा बनाया जाता है। धागा बनाने की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रहीं हैं। इस यूनिट में 15 से 20 महिलाएं काम करती हैं। रोजाना यह महिलाएं सुबह 10 बजे आती हैं और शाम चार से पांच बजे तक धागा तैयार करती हैं। धागा बनाने की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जाती है। सबसे पहले कोये को उबाला जाता है। इसके बाद अलग-अलग मशीनों से धागे को तैयार किया जाता है। यूनिट में काम करने वाली ज्याेति सिंह ने बताया कि वह धागे के दो-दो किलो के बंडल बनाकर रखती हैं।
एक कोये से बनता है एक हजार मीटर धागा
सहायक निदेशक रेशम दयाशंकर ने बताया कि जिले में ही रेशम का उत्पादन करने वालों से कच्चा माल खरीदा जाता है। यूनिट में काम करने वाली महिलाएं धागा बनाती हैं। एक कोये में करीब एक हजार मीटर धागा तैयार होता है। ऑर्डर मिलने पर इसकी बिक्री की जाती है।
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वाराणसी और मुबारकपुर जाता है धागा, कीमत 3800 से चार हजार रुपये किलो
सहायक निदेशक ने बताया कि ऑर्डर के हिसाब से धागा वाराणसी और मुबारकपुर भेजा जाता है। इस समय धागे की कीमत प्रतिकिलो 3800 से चार हजार रुपये है। यूनिट में प्रतिमाह 10 से 15 किलो धागा तैयार किया जाता है। अभी कुछ दिन पहले करीब ढाई क्विंटल धागे की बिक्री की गई है। बताया कि बिक्री से जो मुनाफा मिलता है, उसे महिलाओं में बांट दिया जाता है।
हनी मिशन में 31 जुलाई तक करें आवेदन
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से मानकीकरण एवं गुणवत्ता विनिश्चय योजना (हनी मिशन) चलाई जा रही है। इसका लाभ लेने के लिए 31 जुलाई तक विभागीय बेवसाइट https://upkhaditoolkit.upsdc.gov.in पर आवेदन किया जा सकता है। संवाद
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शहर के सहायक निदेशक रेशम कार्यालय परिसर में ही धागा उत्पादन की यूनिट लगी है। इसमें रेशम के कोये से धागा बनाया जाता है। धागा बनाने की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रहीं हैं। इस यूनिट में 15 से 20 महिलाएं काम करती हैं। रोजाना यह महिलाएं सुबह 10 बजे आती हैं और शाम चार से पांच बजे तक धागा तैयार करती हैं। धागा बनाने की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जाती है। सबसे पहले कोये को उबाला जाता है। इसके बाद अलग-अलग मशीनों से धागे को तैयार किया जाता है। यूनिट में काम करने वाली ज्याेति सिंह ने बताया कि वह धागे के दो-दो किलो के बंडल बनाकर रखती हैं।
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एक कोये से बनता है एक हजार मीटर धागा
सहायक निदेशक रेशम दयाशंकर ने बताया कि जिले में ही रेशम का उत्पादन करने वालों से कच्चा माल खरीदा जाता है। यूनिट में काम करने वाली महिलाएं धागा बनाती हैं। एक कोये में करीब एक हजार मीटर धागा तैयार होता है। ऑर्डर मिलने पर इसकी बिक्री की जाती है।
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वाराणसी और मुबारकपुर जाता है धागा, कीमत 3800 से चार हजार रुपये किलो
सहायक निदेशक ने बताया कि ऑर्डर के हिसाब से धागा वाराणसी और मुबारकपुर भेजा जाता है। इस समय धागे की कीमत प्रतिकिलो 3800 से चार हजार रुपये है। यूनिट में प्रतिमाह 10 से 15 किलो धागा तैयार किया जाता है। अभी कुछ दिन पहले करीब ढाई क्विंटल धागे की बिक्री की गई है। बताया कि बिक्री से जो मुनाफा मिलता है, उसे महिलाओं में बांट दिया जाता है।
हनी मिशन में 31 जुलाई तक करें आवेदन
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से मानकीकरण एवं गुणवत्ता विनिश्चय योजना (हनी मिशन) चलाई जा रही है। इसका लाभ लेने के लिए 31 जुलाई तक विभागीय बेवसाइट https://upkhaditoolkit.upsdc.gov.in पर आवेदन किया जा सकता है। संवाद