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Pilibhit News: चंदिया हजारा गांव में घुसा शारदा का पानी, 36 गांव बाढ़ से प्रभावित, देवहा से शहर के निचले इलाकों में मंडाराया संकट
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गांव हजारा की आबादी में भरा पानी- ग्रामीण
- फोटो : 1
दो दिन में साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से बढ़ा उफान, दो फुट पानी घुसने से लोगों की बढ़ीं दुश्वारियां, खाने पीने का गहराया संकट
पीलीभीत। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्र में हुई बारिश के बाद उफनाई नदियाें से बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। शारदा नदी का पानी पूरनपुर के चंदिया हजारा और शांतिनगर गांव में घुस गया। आबादी क्षेत्र में दो फुट तक पानी घुसने से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गईं। घरों और रास्तों में पानी पहुंचने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। खाद्यान का संकट उत्पन्न होने के साथ पशुओं के लिए चारे का संकट मंडराने लगा। पीड़ित परिवार अपने जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी में जुट गए हैं। देवहा और खकरा नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का संकट मंडराने लगा है।
न्यूरिया क्षेत्र में आबादी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ है। जिले में इस समय बाढ़ से करीब 36 गांव प्रभावित है। हालांकि कहीं भी हालात ज्यादा खराब नहीं है। शारदा नदी में मंगलवार को करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की बुधवार शाम को जारी रिपोर्ट के अनुसार, बनबसा बैराज से शारदा नदी में 1.14 लाख क्यूसेक पानी पास किया गया। मंगलवार की अपेक्षा जलस्तर में फिलहाल गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन नदी में पानी का भारी प्रवाह बना हुआ है। संवाद
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उफनाई देवहा ने ब्रह्मचारी घाट पर बने दो स्पर काटे
पीलीभीत। मंगलवार शाम से देवहा नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ और बुधवार सुबह तक करीब 36 हजार क्यूसेक पानी पास होने से नदी का प्रवाह और तेज हो गया। इससे शहर से सटे ब्रह्मचारी घाट पर कटान रोकने के लिए बनाए गए दो स्पर नदी ने काट दिया। घाट के निकट नदी गोलाई में कटान कर रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर से बेनीचौधरी और चंदोई के निचले इलाके में पानी घुसने का खतरा बढ़ गया, हालांकि बुधवार शाम तक आबादी क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ। प्रशासन की टीम इन क्षेत्रों में नजर बनाए हैं। लोगों को भी सतर्क किया गया।
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हजारा और शास्त्रीनगर के डेढ़ सौ घरों में घुसा दो फुट पानी, कई घरों में नहीं जले चूल्हे, दोनों गांव में खाना न मिलने से भूख से बिलखे बाढ़ पीड़ित, पशुओं के चारे पर भी संकट
पूरनपुर। शारदा नदी उफनाने से गांव हजारा और शास्त्रीनगर की आबादी में जलभराव हो गया। खेत जलमग्न हो गए। कच्चे रास्तों और दोनों गांवों के डेढ़ सौ घरों में दो से ढाई फुट तक पानी भर गया। जलभराव के चलते कई घरों में चूल्हे नहीं जले।
प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को शाम चार बजे तक खाना का वितरण नहीं कराया गया। इससे भूख से बाढ़ पीड़ित बिलखते रहे। गांव हजारा के समीप कराए गए बचाव कार्य डूब गए। सिद्धनगर से भुरजनिया जाने वाले रोड पर तेजी से पानी का बहाव शुरू हो गया। इससे आवागमन बंद हो गया। लोगों के समक्ष पालतू पशुओं के लिए भी चारे का संकट मंडराने लगा।
टीम के साथ शारदा नदी मंगलवार को भेजे गए नायब तहसीलदार और अन्य कर्मी बुधवार शाम चार बजे तक गांव हजारा और शास्त्रीनगर तक नहीं पहुंच सके। इस क्षेत्र में खजुरिया होते हुए सिद्धनगर से गांव भुरजनिया सहित अन्य गांव के मुख्य रास्ते पर निर्माणाधीन मिनी सेतु के समीप सड़क पर डेढ़ फुट तक पानी का तेज बहाव शुरू हुआ। इससे मुख्य मार्ग से आवागमन बंद हो गया। संवाद
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बचाव कार्य की खानापूरी से गांव के लोगों में रोष
पूरनपुर। अगस्त महीने में दो बार नदी के उफनाने से गांव हजारा और शास्त्रीनगर की आबादी में जलभराव हुआ था। नदी का जलस्तर कम होने पर नदी ने तेजी से हजारा के समीप कटान शुरू की थी। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता ने कटानस्थल पहुंचकर निरीक्षण किया था। मंडलायुक्त ने भी गांव हजारा में चौपाल लगाई थी। इसके बाद कटान से बचाव कार्य शुरू कराया गया।
बंबू कटर लगाने शुरू किए गए, मगर सप्ताह भर काम चलने के बाद बंद कर दिया गया। गांव हजारा के राकेश कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर कम होने पर कटान न होने का तर्क देकर बाढ़ खंड ने बचाव कार्य रोक दिया था। उनका कहना है कि जलस्तर कम होने पर बचाव कार्य नहीं किया जाता। बाढ़ आने पर बचाव कार्य कराने का आश्वासन देकर मात्र खानापूरी की जाती है। संवाद
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जलस्तर कम होने से राहत
पूरनपुर। बनवसा बैराज से शारदा नदी में पानी रिलीज होने का क्रम मंगलवार सुबह से शुरू होकर रात आठ बजे तक जारी रहा। इसके बाद रिलीज होने वाले पानी की मात्रा में कमी आनी शुरू हुई। बुधवार को शारदा नदी का जलस्तर कम होने पर आबादी और खेतों, सड़कों पर हुआ जलभराव कम होना शुरू हुआ। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। संवाद
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50 परिवारों को राणा प्रतापनगर के बाढ़ शरणालय में किया शिफ्ट
नदी उफनाने से खेतों, सड़कों और निचले में बने कुछ घरों में जलभराव हुआ था। अब नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। हजारा और शास्त्रीनगर के 50 परिवारों को राणा प्रतापनगर के बाढ़ शरणालय में रखा गया है। टिब्बा में बाढ़ पीड़ितोंं के लिए खाना बनवाया जा रहा है, जिसका वितरण शाम तक कराया जाएगा। बाढ़ की स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। नायब तहसीलदार सौरभ कुमार के नेतृत्व में टीम को शारदा पार भेजा गया है।
- मयंक गोस्वामी, एसडीएम
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अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचा खकरा का पानी, रपटा पुल डूबने से 18 गांवों का संपर्क प्रभावित, रोजी-रोटी का संकट
न्यूरिया। खकरा नदी उफनाने से नदी का पानी आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। न्यूरिया-रामपुर बौरख मार्ग पर बना रपटा पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण इस मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है। इससे आसपास के करीब 18 गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
रपटा पुल से करीब 500 मीटर दूर खेत में रखा इंजन भी पानी में डूबा नजर आया। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी अब अंत्येष्टि स्थल तक पहुंच गया है। अंत्येष्टि स्थल को जाने वाला रास्ता जलमग्न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में किसी की मौत होने पर शव को अंत्येष्टि स्थल तक ले जाने और अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पानी लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। इसके अलावा न्यूरिया कॉलोनी-भरतपुर मार्ग पर भी खकरा नदी का पानी पहुंचने से मार्ग के पास स्थित शिव मंदिर परिसर तक पहुंच गया है। इससे कॉलोनी के लोगों की चिंता बढ़ गई है। टनकपुर हाईवे के पास स्थित प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति न्यूरिया का परिसर भी बारिश के पानी से घिर गया।
जलभराव से सब्जी की फसल प्रभावित होने लगी है। किसानों का कहना है कि जल्द पानी नहीं निकला तो फसल खराब हो सकती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। संवाद
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देवहा से भी बाढ़ का खतरा, पहुंचे अधिकारी
बीसलपुर। तहसील क्षेत्र में भी देवहा, माला समेत अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई। तहसील प्रशासन ने क्षेत्र की सभी नौ बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बाढ़ से संवेदनशील गांव भैंसटा और तिहुलिया का निरीक्षण किया। हालांकि गांव में बाढ़ की स्थिति नहीं मिली, लेकिन एसडीएम ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
इसके अलावा बारिश के पानी से चौसरा मार्ग पर हुए जलभराव से बुधवार को भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मार्ग पर भरा पानी सेंट्रल वेयर हाउस के परिसर में भी घुस गया है। राम बांग्ला कॉलोनी और गांधीनगर कॉलोनी के लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार को मोहल्ला गांधीनगर के कुछ बीमार बच्चों को ठेले पर बैठाकर अस्पताल ले जाया गया।
एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस पानी से कोई नुकसान नहीं है।
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बाढ़ योजनाओं से टकराकर आगे बढ़ रही शारदा, एसडीएम ने लिया जायजा
कलीनगर। तहसील क्षेत्र में जलस्तर बढने के बाद शारदा नदी का प्रवाह तेज हो गया। नोमैंस लैंड से सटे नौजल्हा नंबर दो इलाके में नदी बाढ़ नियंत्रण योजना से टकराते हुए आगे बढ़ रही है। रमनगरा और नगरिया खुर्द कला में जलस्तर कम होने के बाद कटान का खतरा मंडराने लगा है।
बुधवार को एसडीएम प्रमेश कुमार ने तहसीलदार वीरेंद्र कुमार के साथ शारदा नदी का जायजा लिया। नौजल्हा क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण कार्य देखे। उन्होंने ग्राम प्रशासक विवेकानंद से जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि शारदा से बाढ़ का कोई खतरा फिलहाल नहीं है। टीमों को अलर्ट किया गया है। बाढ़ चौकियां पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। संवाद
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डीएम बोले-जलस्तर में कमी शुरू, फिर भी अफसर अलर्ट रहें
डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है, लेकिन प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। एसडीएम से लेकर लेखपाल तक अपनी टीमों के साथ अलर्ट मोड पर हैं। कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया गया है। नदी किनारे बसे गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस समय 36 गांव प्रभावित हैं। डीएम ने ग्रामीणों से नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने को कहा गया है। डीएम ने कहा कि राहत और बचाव से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हैं और जरूरत पड़ने पर टीमें तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।
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पीलीभीत। मैदानी और पहाड़ी क्षेत्र में हुई बारिश के बाद उफनाई नदियाें से बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। शारदा नदी का पानी पूरनपुर के चंदिया हजारा और शांतिनगर गांव में घुस गया। आबादी क्षेत्र में दो फुट तक पानी घुसने से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गईं। घरों और रास्तों में पानी पहुंचने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। खाद्यान का संकट उत्पन्न होने के साथ पशुओं के लिए चारे का संकट मंडराने लगा। पीड़ित परिवार अपने जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी में जुट गए हैं। देवहा और खकरा नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का संकट मंडराने लगा है।
न्यूरिया क्षेत्र में आबादी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ है। जिले में इस समय बाढ़ से करीब 36 गांव प्रभावित है। हालांकि कहीं भी हालात ज्यादा खराब नहीं है। शारदा नदी में मंगलवार को करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की बुधवार शाम को जारी रिपोर्ट के अनुसार, बनबसा बैराज से शारदा नदी में 1.14 लाख क्यूसेक पानी पास किया गया। मंगलवार की अपेक्षा जलस्तर में फिलहाल गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन नदी में पानी का भारी प्रवाह बना हुआ है। संवाद
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उफनाई देवहा ने ब्रह्मचारी घाट पर बने दो स्पर काटे
पीलीभीत। मंगलवार शाम से देवहा नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ और बुधवार सुबह तक करीब 36 हजार क्यूसेक पानी पास होने से नदी का प्रवाह और तेज हो गया। इससे शहर से सटे ब्रह्मचारी घाट पर कटान रोकने के लिए बनाए गए दो स्पर नदी ने काट दिया। घाट के निकट नदी गोलाई में कटान कर रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर से बेनीचौधरी और चंदोई के निचले इलाके में पानी घुसने का खतरा बढ़ गया, हालांकि बुधवार शाम तक आबादी क्षेत्र प्रभावित नहीं हुआ। प्रशासन की टीम इन क्षेत्रों में नजर बनाए हैं। लोगों को भी सतर्क किया गया।
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हजारा और शास्त्रीनगर के डेढ़ सौ घरों में घुसा दो फुट पानी, कई घरों में नहीं जले चूल्हे, दोनों गांव में खाना न मिलने से भूख से बिलखे बाढ़ पीड़ित, पशुओं के चारे पर भी संकट
पूरनपुर। शारदा नदी उफनाने से गांव हजारा और शास्त्रीनगर की आबादी में जलभराव हो गया। खेत जलमग्न हो गए। कच्चे रास्तों और दोनों गांवों के डेढ़ सौ घरों में दो से ढाई फुट तक पानी भर गया। जलभराव के चलते कई घरों में चूल्हे नहीं जले।
प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को शाम चार बजे तक खाना का वितरण नहीं कराया गया। इससे भूख से बाढ़ पीड़ित बिलखते रहे। गांव हजारा के समीप कराए गए बचाव कार्य डूब गए। सिद्धनगर से भुरजनिया जाने वाले रोड पर तेजी से पानी का बहाव शुरू हो गया। इससे आवागमन बंद हो गया। लोगों के समक्ष पालतू पशुओं के लिए भी चारे का संकट मंडराने लगा।
टीम के साथ शारदा नदी मंगलवार को भेजे गए नायब तहसीलदार और अन्य कर्मी बुधवार शाम चार बजे तक गांव हजारा और शास्त्रीनगर तक नहीं पहुंच सके। इस क्षेत्र में खजुरिया होते हुए सिद्धनगर से गांव भुरजनिया सहित अन्य गांव के मुख्य रास्ते पर निर्माणाधीन मिनी सेतु के समीप सड़क पर डेढ़ फुट तक पानी का तेज बहाव शुरू हुआ। इससे मुख्य मार्ग से आवागमन बंद हो गया। संवाद
बचाव कार्य की खानापूरी से गांव के लोगों में रोष
पूरनपुर। अगस्त महीने में दो बार नदी के उफनाने से गांव हजारा और शास्त्रीनगर की आबादी में जलभराव हुआ था। नदी का जलस्तर कम होने पर नदी ने तेजी से हजारा के समीप कटान शुरू की थी। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता ने कटानस्थल पहुंचकर निरीक्षण किया था। मंडलायुक्त ने भी गांव हजारा में चौपाल लगाई थी। इसके बाद कटान से बचाव कार्य शुरू कराया गया।
बंबू कटर लगाने शुरू किए गए, मगर सप्ताह भर काम चलने के बाद बंद कर दिया गया। गांव हजारा के राकेश कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर कम होने पर कटान न होने का तर्क देकर बाढ़ खंड ने बचाव कार्य रोक दिया था। उनका कहना है कि जलस्तर कम होने पर बचाव कार्य नहीं किया जाता। बाढ़ आने पर बचाव कार्य कराने का आश्वासन देकर मात्र खानापूरी की जाती है। संवाद
जलस्तर कम होने से राहत
पूरनपुर। बनवसा बैराज से शारदा नदी में पानी रिलीज होने का क्रम मंगलवार सुबह से शुरू होकर रात आठ बजे तक जारी रहा। इसके बाद रिलीज होने वाले पानी की मात्रा में कमी आनी शुरू हुई। बुधवार को शारदा नदी का जलस्तर कम होने पर आबादी और खेतों, सड़कों पर हुआ जलभराव कम होना शुरू हुआ। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। संवाद
50 परिवारों को राणा प्रतापनगर के बाढ़ शरणालय में किया शिफ्ट
नदी उफनाने से खेतों, सड़कों और निचले में बने कुछ घरों में जलभराव हुआ था। अब नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है। हजारा और शास्त्रीनगर के 50 परिवारों को राणा प्रतापनगर के बाढ़ शरणालय में रखा गया है। टिब्बा में बाढ़ पीड़ितोंं के लिए खाना बनवाया जा रहा है, जिसका वितरण शाम तक कराया जाएगा। बाढ़ की स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। नायब तहसीलदार सौरभ कुमार के नेतृत्व में टीम को शारदा पार भेजा गया है।
- मयंक गोस्वामी, एसडीएम
अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचा खकरा का पानी, रपटा पुल डूबने से 18 गांवों का संपर्क प्रभावित, रोजी-रोटी का संकट
न्यूरिया। खकरा नदी उफनाने से नदी का पानी आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। न्यूरिया-रामपुर बौरख मार्ग पर बना रपटा पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण इस मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है। इससे आसपास के करीब 18 गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
रपटा पुल से करीब 500 मीटर दूर खेत में रखा इंजन भी पानी में डूबा नजर आया। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी अब अंत्येष्टि स्थल तक पहुंच गया है। अंत्येष्टि स्थल को जाने वाला रास्ता जलमग्न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में किसी की मौत होने पर शव को अंत्येष्टि स्थल तक ले जाने और अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पानी लगातार बढ़ने से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। इसके अलावा न्यूरिया कॉलोनी-भरतपुर मार्ग पर भी खकरा नदी का पानी पहुंचने से मार्ग के पास स्थित शिव मंदिर परिसर तक पहुंच गया है। इससे कॉलोनी के लोगों की चिंता बढ़ गई है। टनकपुर हाईवे के पास स्थित प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति न्यूरिया का परिसर भी बारिश के पानी से घिर गया।
जलभराव से सब्जी की फसल प्रभावित होने लगी है। किसानों का कहना है कि जल्द पानी नहीं निकला तो फसल खराब हो सकती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। संवाद
देवहा से भी बाढ़ का खतरा, पहुंचे अधिकारी
बीसलपुर। तहसील क्षेत्र में भी देवहा, माला समेत अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई। तहसील प्रशासन ने क्षेत्र की सभी नौ बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बाढ़ से संवेदनशील गांव भैंसटा और तिहुलिया का निरीक्षण किया। हालांकि गांव में बाढ़ की स्थिति नहीं मिली, लेकिन एसडीएम ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
इसके अलावा बारिश के पानी से चौसरा मार्ग पर हुए जलभराव से बुधवार को भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मार्ग पर भरा पानी सेंट्रल वेयर हाउस के परिसर में भी घुस गया है। राम बांग्ला कॉलोनी और गांधीनगर कॉलोनी के लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार को मोहल्ला गांधीनगर के कुछ बीमार बच्चों को ठेले पर बैठाकर अस्पताल ले जाया गया।
एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इस पानी से कोई नुकसान नहीं है।
बाढ़ योजनाओं से टकराकर आगे बढ़ रही शारदा, एसडीएम ने लिया जायजा
कलीनगर। तहसील क्षेत्र में जलस्तर बढने के बाद शारदा नदी का प्रवाह तेज हो गया। नोमैंस लैंड से सटे नौजल्हा नंबर दो इलाके में नदी बाढ़ नियंत्रण योजना से टकराते हुए आगे बढ़ रही है। रमनगरा और नगरिया खुर्द कला में जलस्तर कम होने के बाद कटान का खतरा मंडराने लगा है।
बुधवार को एसडीएम प्रमेश कुमार ने तहसीलदार वीरेंद्र कुमार के साथ शारदा नदी का जायजा लिया। नौजल्हा क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण कार्य देखे। उन्होंने ग्राम प्रशासक विवेकानंद से जानकारी ली। एसडीएम ने बताया कि शारदा से बाढ़ का कोई खतरा फिलहाल नहीं है। टीमों को अलर्ट किया गया है। बाढ़ चौकियां पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। संवाद
डीएम बोले-जलस्तर में कमी शुरू, फिर भी अफसर अलर्ट रहें
डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है, लेकिन प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। एसडीएम से लेकर लेखपाल तक अपनी टीमों के साथ अलर्ट मोड पर हैं। कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया गया है। नदी किनारे बसे गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस समय 36 गांव प्रभावित हैं। डीएम ने ग्रामीणों से नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने को कहा गया है। डीएम ने कहा कि राहत और बचाव से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हैं और जरूरत पड़ने पर टीमें तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।

गांव हजारा की आबादी में भरा पानी- ग्रामीण- फोटो : 1

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