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Pilibhit News: सालों से गायब हैं सात गांवों के बंदोबस्ती नक्शे
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पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद
पूरनपुर। पूरनपुर तहसील के सात गांवों के बंदोबस्ती नक्शे सालों से गायब हैं, ऐसे में माफिया सार्वजनिक कीमती जमीनों पर कब्जा करने में जुटे हैंं तो किसान तूदाबंदी, पैमाइश आदि समस्याओं का निस्तारण न होने से परेशान हैं। बंदोबस्ती नक्शों को लेकर कई बार अफसरों के सामने समस्या रखी गई। टीम राजस्व परिषद के अलावा उत्तराखंड के रुड़की तक भेजी गई, लेकिन वहां भी नक्शे नहीं मिले। फिलहाल समस्या का समाधान न होने से काफी परेशानी हो रही है।
राजस्व विभाग में किस स्तर तक लापरवाही है, इसे समझने के लिए पूरनपुर तहसील के सात गांवों का हाल देखा जा सकता है। नगर से चार किलोमीटर दूर असम हाईवे और खटीमा हाईवे के बीच बसे गांव खमरिया पट्टी की जमीन खासी कीमती है। इसी गांव में वन्य एवं वन्य जीव प्रभाग कार्यालय, कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा का पार्क और कई स्कूल, चावल मिलें, कार की एजेंसी है।
बावजूद इसके इस गांव का भू मानचित्र (नक्शा) दो दशक से गुम है। पहले नक्शे की तलाश हुई, लेकिन जब वह नहीं मिला तो उसे जिला मुख्यालय, राजस्व परिषद बोर्ड में तलाशा गया। यही नहीं उत्तराखंड के रुड़की में भी नक्शा लेने के लिए टीम भेजी गई, पर नक्शा नहीं मिला। (संवाद)
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मुजफ्फरनगर के अलावा पांच अन्य गांवों के नक्शे भी हैं गायब
तहसील क्षेत्र से सात किलोमीटर दूर शहीद गांव मुजफ्फरनगर, नेपाल सीमा से सटे गांव सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, बमनपुर भागीरथ, नदी के इस पार खमरिया कलां, नवदिया मुस्तकीन मुजफ्फरनगर के नक्शे भी गायब हैं। नक्शे न होने का फायदा भूमाफिया और रसूखदार उठाकर सरकारी जमीनों पर कब्जा करने में जुटे है। हाईवे से सटी जमीनों पर कॉलोनाइजर की गिद्ध नजरें लगी हुई है। कॉलोनियां काटी जा रही है। अफसर सिर्फ लिखापढ़ी कर शांत हो जाते हैं। नक्शों के अभाव में जमीनों, चकरोडों की पैमाइशें नहीं हो पा रही हैं। लोग चकरोड और रास्तों को काटकर खेतों में मिला रहे है। समस्या पर संबंधित हल्के के लेखपाल नक्शा न होने का तर्क देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
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पैमाइश, तूदाबंदी आदि की मांग पर नक्शा न होने का तर्क देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। किसान परेशान हैं तो कालोनाइजर कब्जा कर कॉलोनियां काटने मेंं जुटे है। गांव में खालिहान की जमीनों पर कब्जा हो चुका है।
- सुखलाल, खमरिया पट्टी
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गांव की खलिहान की जमीन पर सालों पहले किसान फसलें एकत्र कर उनकी गहाई करते थे। बचपन से खलिहान को देखा है। मगर अब खलिहान की जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी बना दी गई है।
- सुंदरलाल, खमरिया पट्टी
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ग्राम प्रधान होते हुए खलिहान की जमीन पर कब्जे का विरोध किया। डीएम, सीडीओ से मिलकर शिकायत की। कोर्ट की शरण ली। पत्नी के प्रधान रहते हुए भी खलिहान की जमीन पर कब्जे का विरोध किया। बाद में प्रधानी न रहने पर माफिया ने खलिहान की जमीन पर कब्जा कर लिया। जमीन की बिक्री भी कर दी गई।
- राम निवास, पूर्व प्रधान खमरिया पट्टी
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नक्शा न होने पर किसान परेशान हैं। कई सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। तूदाबंदी, पैमाइश, सरकारी जमीनों का चिह्नीकरण नहीं हो पा रहा। अब जमीनों की खरीद-फरोख्त की सूची तैयार की जा रही है। अफसरों से कई बार शिकायत कर चुका हूं। अब लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री से मिलकर उनको पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी।
- रामेश्वर दयाल, प्रधान खमरिया पट्टी
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दो दशक से गांव का बंदोबस्ती नक्शा नहीं मिल रहा है। जिले में तैनात रहे डीएम पुलकित खरे से मिलकर समस्या की जानकारी दी गई थी। तब टीम लखनऊ और रुड़की भेजी गई, लेकिन कहीं भी गांव का बंदोबस्ती नक्शा नहीं मिला। नक्शा न मिलने से किसानों को तूदाबंदी, पैमाइश आदि की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
- नरेशपाल सिंह, प्रधान मुजफ्फरनगर
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उनके गांव के अलावा नेपाल सीमा से सटे गांव बमनपुर भागीरथ, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज का भी बंदोबस्ती नक्शा सालों से गायब है। नक्शा न होने से किसान परेशान है। खलिहान, चकरोडों की जमीन पर कब्जे हो रहे है।
- अमरीक सिंह, प्रधान बैल्हा
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गांव खमरिया पट्टी और मुजफ्फरनगर का बंदोबस्ती नक्शा न मिलने की जानकारी मिली है। लेखपाल से रिपोर्ट लेकर उच्च अफसरों को पत्र भेजा जाएगा। ताकि नक्शा ढूंढ़कर समस्याओं का समाधान कराया जाए। अवैध कब्जों को अभियान चलाकर हटवाया जाएगा, जिससे कब्जेदारों पर कार्रवाई कराई जा सके।
- वीरेंद्र कुमार, तहसीलदार, पूरनपुर
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राजस्व विभाग में किस स्तर तक लापरवाही है, इसे समझने के लिए पूरनपुर तहसील के सात गांवों का हाल देखा जा सकता है। नगर से चार किलोमीटर दूर असम हाईवे और खटीमा हाईवे के बीच बसे गांव खमरिया पट्टी की जमीन खासी कीमती है। इसी गांव में वन्य एवं वन्य जीव प्रभाग कार्यालय, कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा का पार्क और कई स्कूल, चावल मिलें, कार की एजेंसी है।
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बावजूद इसके इस गांव का भू मानचित्र (नक्शा) दो दशक से गुम है। पहले नक्शे की तलाश हुई, लेकिन जब वह नहीं मिला तो उसे जिला मुख्यालय, राजस्व परिषद बोर्ड में तलाशा गया। यही नहीं उत्तराखंड के रुड़की में भी नक्शा लेने के लिए टीम भेजी गई, पर नक्शा नहीं मिला। (संवाद)
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मुजफ्फरनगर के अलावा पांच अन्य गांवों के नक्शे भी हैं गायब
तहसील क्षेत्र से सात किलोमीटर दूर शहीद गांव मुजफ्फरनगर, नेपाल सीमा से सटे गांव सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बैल्हा, बमनपुर भागीरथ, नदी के इस पार खमरिया कलां, नवदिया मुस्तकीन मुजफ्फरनगर के नक्शे भी गायब हैं। नक्शे न होने का फायदा भूमाफिया और रसूखदार उठाकर सरकारी जमीनों पर कब्जा करने में जुटे है। हाईवे से सटी जमीनों पर कॉलोनाइजर की गिद्ध नजरें लगी हुई है। कॉलोनियां काटी जा रही है। अफसर सिर्फ लिखापढ़ी कर शांत हो जाते हैं। नक्शों के अभाव में जमीनों, चकरोडों की पैमाइशें नहीं हो पा रही हैं। लोग चकरोड और रास्तों को काटकर खेतों में मिला रहे है। समस्या पर संबंधित हल्के के लेखपाल नक्शा न होने का तर्क देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
पैमाइश, तूदाबंदी आदि की मांग पर नक्शा न होने का तर्क देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। किसान परेशान हैं तो कालोनाइजर कब्जा कर कॉलोनियां काटने मेंं जुटे है। गांव में खालिहान की जमीनों पर कब्जा हो चुका है।
- सुखलाल, खमरिया पट्टी
गांव की खलिहान की जमीन पर सालों पहले किसान फसलें एकत्र कर उनकी गहाई करते थे। बचपन से खलिहान को देखा है। मगर अब खलिहान की जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी बना दी गई है।
- सुंदरलाल, खमरिया पट्टी
ग्राम प्रधान होते हुए खलिहान की जमीन पर कब्जे का विरोध किया। डीएम, सीडीओ से मिलकर शिकायत की। कोर्ट की शरण ली। पत्नी के प्रधान रहते हुए भी खलिहान की जमीन पर कब्जे का विरोध किया। बाद में प्रधानी न रहने पर माफिया ने खलिहान की जमीन पर कब्जा कर लिया। जमीन की बिक्री भी कर दी गई।
- राम निवास, पूर्व प्रधान खमरिया पट्टी
नक्शा न होने पर किसान परेशान हैं। कई सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया गया। तूदाबंदी, पैमाइश, सरकारी जमीनों का चिह्नीकरण नहीं हो पा रहा। अब जमीनों की खरीद-फरोख्त की सूची तैयार की जा रही है। अफसरों से कई बार शिकायत कर चुका हूं। अब लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री से मिलकर उनको पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी।
- रामेश्वर दयाल, प्रधान खमरिया पट्टी
दो दशक से गांव का बंदोबस्ती नक्शा नहीं मिल रहा है। जिले में तैनात रहे डीएम पुलकित खरे से मिलकर समस्या की जानकारी दी गई थी। तब टीम लखनऊ और रुड़की भेजी गई, लेकिन कहीं भी गांव का बंदोबस्ती नक्शा नहीं मिला। नक्शा न मिलने से किसानों को तूदाबंदी, पैमाइश आदि की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
- नरेशपाल सिंह, प्रधान मुजफ्फरनगर
उनके गांव के अलावा नेपाल सीमा से सटे गांव बमनपुर भागीरथ, सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज का भी बंदोबस्ती नक्शा सालों से गायब है। नक्शा न होने से किसान परेशान है। खलिहान, चकरोडों की जमीन पर कब्जे हो रहे है।
- अमरीक सिंह, प्रधान बैल्हा
गांव खमरिया पट्टी और मुजफ्फरनगर का बंदोबस्ती नक्शा न मिलने की जानकारी मिली है। लेखपाल से रिपोर्ट लेकर उच्च अफसरों को पत्र भेजा जाएगा। ताकि नक्शा ढूंढ़कर समस्याओं का समाधान कराया जाए। अवैध कब्जों को अभियान चलाकर हटवाया जाएगा, जिससे कब्जेदारों पर कार्रवाई कराई जा सके।
- वीरेंद्र कुमार, तहसीलदार, पूरनपुर

पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद

पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद

पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद

पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद

पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद

पूरनपुर क्षेत्र का गांव खमरिया पटृी।संवाद