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गोदाम फुल, अब बरेली और बदायूं में होगा चावल उतार
पीलीभीत।
Updated Sun, 18 Jan 2015 11:42 PM IST
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जिले के गोदाम फुल होने और निजी क्षेत्र के गोदाम किराए पर न लेने के कारण चावल उतार में दिक्कत आ रही है। इस पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने जिले के शेष बचे लगभग 15 हजार मीट्रिक टन चावल को बरेली और बदायूं के गोदाम में उतार कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं इस निर्देश से राइस मिलर्स के आगे दिक्कत खड़ी हो गई है।
तराई के इस जिले में इस बार धान की बम्पर पैदावार हुई है। निजी एजेंसियों द्वारा जहां जमकर खरीद हुई वहीं सरकारी खरीद का आकंड़ा भी 1.18 लाख मीट्रिक टन पार पहुंच गया। इस धान से बने चावल के उतार के लिए जिले में पूरनपुर में रम्पुरा के साथ पीलीभीत व ललौरीखेड़ा के गोदामों में व्यवस्था की गई थी। इन गोदामों में चावल का उतार भी कराया गया, लेकिन काफी मात्रा में चावल के चलते पूरनपुर, पीलीभीत और ललौरीखेड़ा के गोदाम फुल हो चुके हैं। अभी मिलों के पास 15 हजार मैट्रिक टन से अधिक चावल मौजूद है। इसके भंडारण के लिए ललौरीखेड़ा में एक साल पहले बने नए गोदाम में उतरवाने की कोशिश की गई। इस गोदाम को किराए पर लिया जाना था, लेकिन सहमति न बनने के कारण उतार नहीं हो सका। इसके लिए एफसीआई के एरिया मैनेजर ने भी ललौरीखेड़ा पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने जिले के चावल का भंडारण बदायूं और बरेली के गोदामों में कराने के निर्देश डिप्टी आरएमओ को दिए हैं।
अधिकारियों की हठधर्मिता से समस्या
अधिकारियों की हठधार्मिता के चलते राइस मिलर्स के सामने समस्या खड़ी हो गई है। मिलर्स को किराया मात्र 32 किमी का मिलता है जबकि बरेली व बदायूं की दूरी काफी है। दूसरी समस्या चावल फेल होने पर मिलर्स को पूरा ट्रक वापस लाना पड़ेगा। जिसमें उन्हें और नुकसान होगा।
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अश्वनी अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन
ललौरीखेड़ा के निजी गोदाम में चावल उतरवाने को बातचीत की गई थी, लेकिन सहमति न बनने के कारण क्षेत्रीय प्रबंधक ने चावल का भंडारण बरेली बदायूं में कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी जानकारी सभी मिलर्स को दे दी गई है।
ईश्वर चंद्र गुप्ता, डिप्टी आरएमओ
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तराई के इस जिले में इस बार धान की बम्पर पैदावार हुई है। निजी एजेंसियों द्वारा जहां जमकर खरीद हुई वहीं सरकारी खरीद का आकंड़ा भी 1.18 लाख मीट्रिक टन पार पहुंच गया। इस धान से बने चावल के उतार के लिए जिले में पूरनपुर में रम्पुरा के साथ पीलीभीत व ललौरीखेड़ा के गोदामों में व्यवस्था की गई थी। इन गोदामों में चावल का उतार भी कराया गया, लेकिन काफी मात्रा में चावल के चलते पूरनपुर, पीलीभीत और ललौरीखेड़ा के गोदाम फुल हो चुके हैं। अभी मिलों के पास 15 हजार मैट्रिक टन से अधिक चावल मौजूद है। इसके भंडारण के लिए ललौरीखेड़ा में एक साल पहले बने नए गोदाम में उतरवाने की कोशिश की गई। इस गोदाम को किराए पर लिया जाना था, लेकिन सहमति न बनने के कारण उतार नहीं हो सका। इसके लिए एफसीआई के एरिया मैनेजर ने भी ललौरीखेड़ा पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने जिले के चावल का भंडारण बदायूं और बरेली के गोदामों में कराने के निर्देश डिप्टी आरएमओ को दिए हैं।
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अधिकारियों की हठधर्मिता से समस्या
अधिकारियों की हठधार्मिता के चलते राइस मिलर्स के सामने समस्या खड़ी हो गई है। मिलर्स को किराया मात्र 32 किमी का मिलता है जबकि बरेली व बदायूं की दूरी काफी है। दूसरी समस्या चावल फेल होने पर मिलर्स को पूरा ट्रक वापस लाना पड़ेगा। जिसमें उन्हें और नुकसान होगा।
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अश्वनी अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, राइस मिलर्स एसोसिएशन
ललौरीखेड़ा के निजी गोदाम में चावल उतरवाने को बातचीत की गई थी, लेकिन सहमति न बनने के कारण क्षेत्रीय प्रबंधक ने चावल का भंडारण बरेली बदायूं में कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी जानकारी सभी मिलर्स को दे दी गई है।
ईश्वर चंद्र गुप्ता, डिप्टी आरएमओ