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Pilibhit News: सिर्फ कागजों पर बचाव के इंतजाम... एसएनसीयू और कई स्थानों पर लटक रहे तार
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पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में खुली पड़ी वायरिंग।संवाद
पीलीभीत। जिला अस्पताल में आग से बचाव के इंतजाम अभी कागजों पर ही दौड़ रहे हैं। करीब पांच माह पूर्व हुई फायर ऑडिट की कमियों को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। झांसी में हुई घटना के बाद भी जिम्मेदार सिर्फ कागजों पर सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने में जुटे हैं। अस्पताल के सुरक्षा इंतजाम बैठक और निर्देशों तक ही सीमित हैं। एसएनसीयू वार्ड के बाहर लटकते तारों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
झांसी में हुए घटना के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन और प्रशासनिक अफसरों ने जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी के अस्पताल परिसरों में लगे फायर सिलिंडरों और अन्य व्यवस्थाओं की पड़ताल की गई थी। कई खामियां मिलीं थीं।
जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी फायर उपकरण भी नहीं चला सके थे तो सीएचसी में कई जगह फायर सिलिंडर कम मिले थे। तीन दिन बीत गए लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रिपोर्ट पर ही अटका है। जिला अस्पताल में खुले तार अब तक उसी हालत में हैं, जबकि कुछ दिन पहले ओपीडी के पास शार्ट सर्किट से आग भी लग चुकी है।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के बाहर भी खुली वायर हादसे को दावत दे रही है। एसएनसीयू वार्ड में 12 बेड है। मौजूदा समय में यहां पर आठ नवजात भर्ती हैं। वार्ड परिसर में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। तारों और आग से बचाव के इंतजामों को दुरुस्त करने के बजाय अस्पताल प्रशासन लोगों की आवाजाही पर रोक लगा रहा है।
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ओपीडी कक्ष के बाहर भी निभाई औपचारिकता
पिछले माह जिला अस्पताल की ओपीडी कक्ष के बाहर पैनल बोर्ड में शार्ट सर्किट की वजह से आग लग गई थी। इससे यहां भगदड़ मच गई थी और एक दिन ओपीडी प्रभावित रही थी। बावजूद वहां पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के नाम पर महज औपचारिकता निभाई गई। खुली वायरिंग अब तक हादसे को दावत दे रही है।
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पैनल लगा, होजरील नदारद
महिला जिला अस्पताल के बाहर विद्युत सब स्टेशन के बाहर फायर पैनल लगाया गया है। इस पैनल से होजरील नदारद है। ऐसे में कागजों पर तो व्यवस्थाएं पूरी हैं, लेकिन धरातल पर आधी-अधूरी हैं। हादसे के समय यह अधूरी व्यवस्थाएं भारी पड़ सकती हैं।
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एसएनसीयू वार्ड में दो फायर सिलिंडर हैं। आग से बचाव के इंतजाम मेडिकल कॉलेज प्रशासन कराएगा। इसके इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
- डॉ. राजेश कुमार, सीएमएस, महिला अस्पताल
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झांसी में हुए घटना के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन और प्रशासनिक अफसरों ने जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी के अस्पताल परिसरों में लगे फायर सिलिंडरों और अन्य व्यवस्थाओं की पड़ताल की गई थी। कई खामियां मिलीं थीं।
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जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी फायर उपकरण भी नहीं चला सके थे तो सीएचसी में कई जगह फायर सिलिंडर कम मिले थे। तीन दिन बीत गए लेकिन स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रिपोर्ट पर ही अटका है। जिला अस्पताल में खुले तार अब तक उसी हालत में हैं, जबकि कुछ दिन पहले ओपीडी के पास शार्ट सर्किट से आग भी लग चुकी है।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के बाहर भी खुली वायर हादसे को दावत दे रही है। एसएनसीयू वार्ड में 12 बेड है। मौजूदा समय में यहां पर आठ नवजात भर्ती हैं। वार्ड परिसर में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। तारों और आग से बचाव के इंतजामों को दुरुस्त करने के बजाय अस्पताल प्रशासन लोगों की आवाजाही पर रोक लगा रहा है।
ओपीडी कक्ष के बाहर भी निभाई औपचारिकता
पिछले माह जिला अस्पताल की ओपीडी कक्ष के बाहर पैनल बोर्ड में शार्ट सर्किट की वजह से आग लग गई थी। इससे यहां भगदड़ मच गई थी और एक दिन ओपीडी प्रभावित रही थी। बावजूद वहां पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के नाम पर महज औपचारिकता निभाई गई। खुली वायरिंग अब तक हादसे को दावत दे रही है।
पैनल लगा, होजरील नदारद
महिला जिला अस्पताल के बाहर विद्युत सब स्टेशन के बाहर फायर पैनल लगाया गया है। इस पैनल से होजरील नदारद है। ऐसे में कागजों पर तो व्यवस्थाएं पूरी हैं, लेकिन धरातल पर आधी-अधूरी हैं। हादसे के समय यह अधूरी व्यवस्थाएं भारी पड़ सकती हैं।
एसएनसीयू वार्ड में दो फायर सिलिंडर हैं। आग से बचाव के इंतजाम मेडिकल कॉलेज प्रशासन कराएगा। इसके इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
- डॉ. राजेश कुमार, सीएमएस, महिला अस्पताल

पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में खुली पड़ी वायरिंग।संवाद

पीलीभीत के जिला चिकित्सालय में खुली पड़ी वायरिंग।संवाद