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रिहाई मंच, एपीसीआर जांच दल ने पूरनपुर पहुंचकर की जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 04 Apr 2016 11:52 PM IST
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बैठक।
- फोटो : pilibhit, beureu
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लखनऊ रिहाई मंच और बरेली से एपीसीआर की संयुक्त जांच टीम आज पूरनपुर पहुंची और पुलिस कस्टडी में मारे गए सद्दाम और शकील के परिवार वालों से मिलकर जानकारी ली। जांच के बाद टीम ने पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग के गठन की मांग की।
कोतवाली पूरनपुर के मोहल्ला रजागंज निवासी सद्दाम और शकील की चार दिन पहले पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। लखनऊ से रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव, शकील कुरैशी, शरद जायसवाल, एपीसीआर बरेली से मुशफिक रजा खां, मोतशिम रजा खां व सीपीआई माले के देवाशीष राय व नरेश जायसवाल पूरनपुर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर घटना की जानकारी ली। पूरनपुर से लौटे जांच दल ने शहर के मोहल्ला पंजाबियान स्थित एक स्कूल में पत्रकारों से वार्ता की। रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि पुलिस कस्टडी और फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने की घटना कोई नई घटना नहीं है। भारत-नेपाल बार्डर पर पुलिस की अपराधिक, सांप्रदायिक भूमिका यहां पहले भी उजागर होती रही है।
सद्दाम और शकील की मृत्यु के समय को लेकर सीएचसी रिकार्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बना रहे हैं। 30 मार्च को सद्दाम और शकील को उनके घरों से उठाया गया। शाम को सद्दाम की पत्नी सबीना कोतवाली गईं तो उनके पति को नहीं छोड़ा गया। शकील के पिता शफीक अहमद सुबह नौ बजे कोतवाली गए तो उनके बेटे को पुलिस वाले बेरहमी से पीट रहे थे। पूरे मामले की जांच से कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसलिए निष्पक्ष विवेचना ही इंसाफ का आधार है, जो कि पुलिस की विवेचना से संभव नहीं है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए राज्य से बाहर के अधिकारियों का न्यायिक जांच आयोग गठित कर मामले की जांच कराने की मांग की है। जांच दल ने प्रदेश सरकार से दोनों मृतकों के परिवार वालों को 25-25 लाख रुपये और एक व्यक्ति को नौकरी दिलाने की मांग की है। जांच दल ने फर्जी मुठभेड़ में सिख युवकों को मारे जाने के मामले में सीबीआई कोर्ट के दिए गए फैसले का स्वागत किया है।
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कोतवाली पूरनपुर के मोहल्ला रजागंज निवासी सद्दाम और शकील की चार दिन पहले पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। लखनऊ से रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव, शकील कुरैशी, शरद जायसवाल, एपीसीआर बरेली से मुशफिक रजा खां, मोतशिम रजा खां व सीपीआई माले के देवाशीष राय व नरेश जायसवाल पूरनपुर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर घटना की जानकारी ली। पूरनपुर से लौटे जांच दल ने शहर के मोहल्ला पंजाबियान स्थित एक स्कूल में पत्रकारों से वार्ता की। रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने कहा कि पुलिस कस्टडी और फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने की घटना कोई नई घटना नहीं है। भारत-नेपाल बार्डर पर पुलिस की अपराधिक, सांप्रदायिक भूमिका यहां पहले भी उजागर होती रही है।
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सद्दाम और शकील की मृत्यु के समय को लेकर सीएचसी रिकार्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बना रहे हैं। 30 मार्च को सद्दाम और शकील को उनके घरों से उठाया गया। शाम को सद्दाम की पत्नी सबीना कोतवाली गईं तो उनके पति को नहीं छोड़ा गया। शकील के पिता शफीक अहमद सुबह नौ बजे कोतवाली गए तो उनके बेटे को पुलिस वाले बेरहमी से पीट रहे थे। पूरे मामले की जांच से कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसलिए निष्पक्ष विवेचना ही इंसाफ का आधार है, जो कि पुलिस की विवेचना से संभव नहीं है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच के लिए राज्य से बाहर के अधिकारियों का न्यायिक जांच आयोग गठित कर मामले की जांच कराने की मांग की है। जांच दल ने प्रदेश सरकार से दोनों मृतकों के परिवार वालों को 25-25 लाख रुपये और एक व्यक्ति को नौकरी दिलाने की मांग की है। जांच दल ने फर्जी मुठभेड़ में सिख युवकों को मारे जाने के मामले में सीबीआई कोर्ट के दिए गए फैसले का स्वागत किया है।
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