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जिले में कोई नहीं नेता तोड़ पाया किशन लाल का रिकॉर्ड, बरखेड़ा से सात बार रहे विधायक
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बरखेड़ा के पूर्व विधायक किशनलाल का फाइल फोटो।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पीलीभीत में स्वर्गीय किशनलाल एक मात्र ऐसे नेता रहे जो बरखेड़ा सुरक्षित विधानसभा सीट सात बार विधायक चुने गए। उल्लेखनीय बात यह है कि जिले का कोई दूसरा नेता सात बार विधायक नहीं रहा। अगर हम बात करें उनके परिवार की तो आठ बार की विधायकी पर उनके परिवार का कब्जा रहा। उनके दिवंगत होने पर सहानुभूति दिखाते हुए जनता ने एक बार उनके बेटे को विधायक बनाकर उनके परिवार को सम्मान दिया था। उनकी सादगी आज भी जनता के बीच में याद की जाती है।
बरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम पचपेड़ा निवासी अनुसूचित जाति के किशनलाल सबसे पहले 1967 में जनसंघ से बरखेड़ा विधानसभा के विधायक बने । उसके बाद वह 1969 और 1974 में भी जनसंघ के टिकट से जीतकर विधायक बने। भारतीय जनसंघ का 1977 में जनता पार्टी में विलय हो गया था और किशन लाल सन 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। जब छह अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई और जनसंघ का उसमें विलय हुआ उसके बाद 1985 में किशनलाल सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक चुने गए। वह वर्ष 1991 में राम लहर के दौरान भी बरखेड़ा से विधानसभा सीट से चुनाव जीते। उसके बाद वर्ष 1993 में विधायक चुने गए। जिले में कोई भी नेता सात बार विधायक रहने का गौरव हासिल नहीं कर सका। किशन लाल के निधन के बाद एक बार बरखेड़ा सुरक्षित सीट से उनके पुत्र सुखलाल ने भी जीत हासिल की। किशन लाल की गिनती जिले में बेहद ईमानदार विधायकों में होती थी। वह आम आदमी के साथ पैदल ही चल देते थे। अधिकारियों के पास जाकर जनता की समस्या का समाधान कराते थे। अब उनकी सादगी को याद किया जा रहा है।
बैंक अधिकारी की नौकरी छोड़कर विधायक बने थे सुखलाल
पीलीभीत। सात बार विधायक रहे किशनलाल के निधन के बाद उनके बेटे विधायक बने। बैंक में अधिकारी पद पर नौकरी कर रहे उनके एकमात्र पुत्र सुखलाल ने बैंक की नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के चुनाव निशान कमल के फूल पर सन 2007 में सुखलाल भी बरखेड़ा विधानसभा से विधायक चुने गए। वर्ष 2012 तक बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे। जिले में किशनलाल के पुत्र सुखलाल उनकी सियासी विरासत संभाली थी। अब सुखलाल भी दिवंगत हैं। सुखलाल के पुत्र ध्रुव चौधरी भी राजनीति में सक्रिय हैं। अपने बाबा और पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वह पूरनपुर सुरक्षित क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।
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बरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम पचपेड़ा निवासी अनुसूचित जाति के किशनलाल सबसे पहले 1967 में जनसंघ से बरखेड़ा विधानसभा के विधायक बने । उसके बाद वह 1969 और 1974 में भी जनसंघ के टिकट से जीतकर विधायक बने। भारतीय जनसंघ का 1977 में जनता पार्टी में विलय हो गया था और किशन लाल सन 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। जब छह अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई और जनसंघ का उसमें विलय हुआ उसके बाद 1985 में किशनलाल सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक चुने गए। वह वर्ष 1991 में राम लहर के दौरान भी बरखेड़ा से विधानसभा सीट से चुनाव जीते। उसके बाद वर्ष 1993 में विधायक चुने गए। जिले में कोई भी नेता सात बार विधायक रहने का गौरव हासिल नहीं कर सका। किशन लाल के निधन के बाद एक बार बरखेड़ा सुरक्षित सीट से उनके पुत्र सुखलाल ने भी जीत हासिल की। किशन लाल की गिनती जिले में बेहद ईमानदार विधायकों में होती थी। वह आम आदमी के साथ पैदल ही चल देते थे। अधिकारियों के पास जाकर जनता की समस्या का समाधान कराते थे। अब उनकी सादगी को याद किया जा रहा है।
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बैंक अधिकारी की नौकरी छोड़कर विधायक बने थे सुखलाल
पीलीभीत। सात बार विधायक रहे किशनलाल के निधन के बाद उनके बेटे विधायक बने। बैंक में अधिकारी पद पर नौकरी कर रहे उनके एकमात्र पुत्र सुखलाल ने बैंक की नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के चुनाव निशान कमल के फूल पर सन 2007 में सुखलाल भी बरखेड़ा विधानसभा से विधायक चुने गए। वर्ष 2012 तक बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे। जिले में किशनलाल के पुत्र सुखलाल उनकी सियासी विरासत संभाली थी। अब सुखलाल भी दिवंगत हैं। सुखलाल के पुत्र ध्रुव चौधरी भी राजनीति में सक्रिय हैं। अपने बाबा और पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वह पूरनपुर सुरक्षित क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।
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